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Patna : बिहार में नेशनल हाईवे के प्रोजेक्ट्स को जमीन पर उतारने के लिए सरकार ने कमर कस ली है। सड़क निर्माण में आ रही अड़चनों और प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करने में हो रही देरी को लेकर पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने साफ लहजे में चेतावनी दी है कि डीपीआर बनाने वाले कंसल्टेंट की मनमानी और सुस्ती अब बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। लापरवाही बरतने वाली एजेंसियों को नोटिस थमाने और नियमानुसार एक्शन लेने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। काम में तेजी लाने के लिए अब अफसर हर दिन बैठक करेंगे और लंबित मामलों का तुरंत निपटारा करेंगे।
करोड़ों की इन बड़ी परियोजनाओं पर हुआ मंथन
समीक्षा बैठक के दौरान राज्य की कई प्रमुख सड़क परियोजनाओं की जमीनी हकीकत सामने रखी गई। भागलपुर में 13 किलोमीटर लंबे विक्रमशिला एप्रोच रोड (एनएच-131बी) का फाइनल डीपीआर केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय को भेजा जा चुका है, जिस पर करीब 698 करोड़ रुपये खर्च होने हैं। इसके अलावा 3,844 करोड़ रुपये से ज्यादा की लागत से अरवल से बिहारशरीफ तक 89 किलोमीटर लंबा हाईवे बनेगा।
उत्तर बिहार के लिए बेहद अहम 146 किलोमीटर लंबे मशरख-चकिया-भिट्ठामोड़ राम जानकी मार्ग (एनएच-227 और 227ए) पर 8,671 करोड़ रुपये से अधिक की लागत आएगी, जिसके शुरुआती दो पैकेजों का ड्राफ्ट डीपीआर मंत्रालय को भेज दिया गया है। वहीं जयनगर बाईपास और कमला नदी पर 4-लेन पुल के लिए 1,239 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा गया है। नौबतपुर से हरिहरगंज तक 137 किलोमीटर लंबे फोरलेन प्रोजेक्ट पर 3,656 करोड़ और बेतिया के 37 किलोमीटर लंबे फोरलेन बाईपास पर करीब 1,718 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। बरियारपुर से बिशनपुर तक 141 किलोमीटर लंबी सड़क के लिए ड्रोन सर्वे पूरा हो चुका है, जबकि समस्तीपुर और सिंघेश्वर बाईपास के अलाइनमेंट पर भी तेजी से काम चल रहा है।
जमीन अधिग्रहण से लेकर रेलवे की एनओसी तक दूर होंगी अड़चनें
बैठक में जमीन अधिग्रहण, वन विभाग की पर्यावरण मंजूरी, बिजली के खंभे और पाइपलाइन हटाने जैसी दिक्कतों पर बिंदुवार चर्चा हुई। सचिव ने साफ कहा कि जिन सड़कों का रूट तय हो चुका है, उनकी फाइनल रिपोर्ट तुरंत तैयार कर मंत्रालय को भेजी जाए। रेलवे ओवर ब्रिज के निर्माण में एनओसी मिलने में हो रही देरी को सुलझाने के लिए बहुत जल्द रेलवे के जीएम स्तर के अधिकारियों के साथ बैठक की जाएगी। यूटिलिटी शिफ्टिंग के लिए संबंधित विभागों के साथ रोजाना तालमेल बैठाया जाएगा ताकि सड़क निर्माण शुरू होने के बाद कोई रुकावट न आए।
अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि मंत्रालय से आने वाली आपत्तियों का तुरंत समाधान करें। यह सड़कें बनने से न केवल बिहार के गांवों और शहरों की दूरी घटेगी, बल्कि आने-जाने में समय बचेगा और पूरे इलाके में व्यापार और रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे।
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