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Patna : दुर्गा पूजा और दशहरा के दौरान राज्य में अमन-चैन और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन ने पूरी ताकत झोंक दी है। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत और पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) प्रीता वर्मा ने सभी प्रमंडलीय आयुक्तों, जिलाधिकारियों और पुलिस कप्तानों के साथ हाईलेवल बैठक कर साफ कर दिया है कि त्योहार में खलल डालने वालों से सख्ती से निपटा जाएगा। बैठक में गृह विभाग के प्रधान सचिव पंकज कुमार, डीजी (अभियान एवं विशेष शाखा) कुंदन कृष्णन और एडीजी (विधि व्यवस्था) के. सुहिता अनुपम भी मौजूद रहे।
11 से 20 अक्टूबर तक सभी 40 जिले अलर्ट पर
गृह विभाग के प्रधान सचिव पंकज कुमार ने बैठक में सुरक्षा तैयारियों का खाका पेश किया। उन्होंने बताया कि 11 अक्टूबर से 20 अक्टूबर 2026 तक राज्य के सभी 38 प्रशासनिक और 2 पुलिस जिलों में विशेष चौकसी बरती जाएगी। उन्होंने अफसरों से कहा कि यह त्योहारों के पूरे सीजन की शुरुआत है। अगर शुरुआत शांत और व्यवस्थित रहेगी, तो आगे आने वाले सभी पर्व भी बिना किसी परेशानी के संपन्न होंगे।
डीजे पर पूरी तरह ताला, महिलाओं की सुरक्षा प्राथमिकता
मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने दो टूक शब्दों में कहा कि दुर्गा पूजा राज्य का बड़ा उत्सव है और इसे सुरक्षित माहौल में कराना सरकार की पहली जिम्मेदारी है। उन्होंने अफसरों को निर्देश दिया कि महिलाओं और बच्चों की हिफाजत से कोई समझौता नहीं होगा। हुड़दंग मचाने वाले असामाजिक तत्वों पर तुरंत एक्शन लिया जाए। इसके अलावा पूरे राज्य में डीजे बजाने पर पूरी तरह पाबंदी रहेगी और इसका उल्लंघन करने वालों पर सीधी कानूनी कार्रवाई होगी।

संवेदनशील इलाकों में ज्यादा पुलिस, पंडालों की फायर जांच
डीजीपी प्रीता वर्मा ने सड़कों पर पुलिस की मौजूदगी बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि संवेदनशील और मुख्य जगहों पर पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया जाए। शांति समिति की बैठकों में बुजुर्गों के साथ युवाओं को भी शामिल करें ताकि जमीनी स्तर पर तालमेल बना रहे। इसके साथ ही बड़े पूजा पंडालों की फायर ब्रिगेड से जांच कराना जरूरी होगा, ताकि आग जैसी किसी भी अनहोनी से समय रहते बचा जा सके।
विसर्जन के लिए लाइसेंस जरूरी, रास्ते की होगी रिकॉर्डिंग
डीजी कुंदन कृष्णन ने मूर्ति विसर्जन और जुलूसों की सुरक्षा को लेकर कड़े निर्देश दिए। अब हर पूजा पंडाल, मूर्ति स्थापना और विसर्जन जुलूस के लिए पहले से अनुमति लेना अनिवार्य होगा। जुलूस की अगुवाई करने वाले 10 से 25 जिम्मेदार लोगों से लिखित मुचलका लिया जाएगा। जुलूस के पूरे रास्ते की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी कराई जाएगी ताकि उपद्रवियों की पहचान हो सके। कंट्रोल रूम से लगातार निगरानी होगी और अफसर औचक निरीक्षण करेंगे।
हथियार, भड़काऊ गाने और रात में लाउडस्पीकर पर रोक
जुलूस या पंडालों में किसी भी तरह के हथियार का प्रदर्शन, भड़काऊ गाने या विवादित नारों पर सख्त पाबंदी रहेगी। पटना हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए डीजे पूरी तरह बंद रहेगा। लाउडस्पीकर के लिए परमिशन लेनी होगी, लेकिन रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक यह पूरी तरह बंद रहेगा। इलाके के सभी डीजे और साउंड सिस्टम संचालकों का पंजीकरण अनुमंडल कार्यालय में होगा और उनकी सूची थानों में रखी जाएगी।
भीड़ पर नजर, घाटों पर तैनात रहेंगे गोताखोर
पंडालों में आने-जाने के लिए अलग-अलग रास्ते बनाए जाएंगे ताकि भगदड़ जैसी स्थिति न बने। किसी भी इमरजेंसी से निपटने के लिए एंबुलेंस, मेडिकल टीम, त्वरित कार्य बल (क्यूआरटी) और एसडीआरएफ की टीमें तैनात रहेंगी। ऊंचे वॉच टावर और सीसीटीवी कैमरों से हर गतिविधि पर नजर रखी जाएगी। रावण दहन के मैदानों और मूर्ति विसर्जन वाले घाटों पर गोताखोरों की तैनाती पहले से सुनिश्चित की जाएगी।
सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाई तो जेल तय
इंटरनेट और सोशल मीडिया पर धार्मिक या जातीय उन्माद फैलाने वालों पर साइबर सेल की पैनी नजर रहेगी। बैठक में साफ चेतावनी दी गई कि फेसबुक, वॉट्सऐप या किसी अन्य माध्यम से गलत अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की गंभीर धाराओं में केस दर्ज कर जेल भेजा जाएगा। प्रशासन ने आम जनता से भी अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान न दें और त्योहार को आपसी भाईचारे के साथ मनाएं।
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