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Lucknow : नेपाल, पीलीभीत, लखीमपुर खीरी और सीतापुर में लगातार हुई मूसलाधार बारिश का असर अब राजधानी लखनऊ और आसपास के इलाकों में दिखने लगा है। गोमती नदी के उफान पर आने से बख्शी का तालाब, लखनऊ उत्तर, फैजुल्लागंज से लेकर नैमिषारण्य तक का पूरा इलाका जलमग्न हो गया है। हालात का जायजा लेने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया। इसके बाद वे बीकेटी के सुल्तानपुर गांव पहुंचे, जहां उन्होंने राहत शिविरों में शरण लिए परिवारों से मुलाकात की, उनका हालचाल जाना और राहत सामग्री बांटी। मुख्यमंत्री ने साफ लफ्जों में कहा कि आपदा की इस घड़ी में सरकार हर पीड़ित परिवार के साथ मजबूती से खड़ी है और किसी को भी बेसहारा नहीं छोड़ा जाएगा।
फैजुल्लागंज से नैमिष तक बनेगा सुरक्षा घेरा, ग्रीन कॉरिडोर की तरह होगा इस्तेमाल
हवाई सर्वे के बाद मुख्यमंत्री ने सिंचाई विभाग को निर्देश दिया कि फैजुल्लागंज से नैमिष तक गोमती नदी के पूरे किनारे का तत्काल विस्तृत सर्वे कराया जाए और एक मजबूत तटबंध तैयार किया जाए। उन्होंने कहा कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी फोन पर हालात की जानकारी ली है और इस तटबंध के निर्माण को जरूरी बताया है। सरकार ने इस परियोजना को मंजूरी देते हुए जरूरी बजट भी जारी करने का फैसला कर लिया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि यह तटबंध सिर्फ पानी रोकने की दीवार नहीं बनेगा, बल्कि इसे लखनऊ के ग्रीन कॉरिडोर की तरह दोहरे उपयोग के तौर पर विकसित किया जाएगा। इससे एक तरफ जहां दर्जनों गांवों और मोहल्लों को हर साल आने वाली बाढ़ से स्थायी राहत मिलेगी, वहीं दूसरी तरफ इस पर सड़क बनाकर लोगों के आने-जाने का रास्ता भी तैयार किया जाएगा। इसके अलावा तटबंध के बाहर वाले इलाकों में जमा होने वाले बारिश के पानी को बड़े पंपिंग सेट लगाकर नदी में गिराने की पूरी कार्ययोजना बनाने को कहा गया है।
जनहानि पर 4 लाख की मदद, आशियाना उजड़ा तो सरकार देगी पक्का मकान
बाढ़ के कारण जान गंवाने वाले परिवारों के प्रति गहरी संवेदना जताते हुए मुख्यमंत्री ने बड़ी राहत का एलान किया। उन्होंने कहा कि बाढ़, पानी में डूबने या आकाशीय बिजली गिरने से अगर किसी नागरिक की असमय मौत होती है, तो प्रशासन बिना किसी देरी के पीड़ित परिवार को 4 लाख रुपये की आर्थिक मदद मुहैया कराएगा। जिन गरीब परिवारों के कच्चे मकान या आशियाने बाढ़ के पानी में पूरी तरह ढह गए हैं, उन्हें खुले आसमान के नीचे रहने की जरूरत नहीं पड़ेगी। ऐसे परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना या मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत नया पक्का मकान दिया जाएगा। किसानों की बर्बाद हुई फसलों को लेकर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि पानी उतरते ही समय सीमा तय करके नुकसान का सर्वे किया जाए ताकि अन्नदाताओं को जल्द से जल्द पूरा मुआवजा मिल सके।
राहत शिविरों में मिलेगा गर्म खाना, खाली पड़े गांवों में रात भर होगी पुलिस पेट्रोलिंग
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को हिदायत दी कि किसी भी बाढ़ पीड़ित को रात खुले में न बितानी पड़े। इसके लिए स्कूलों, मैरिज हॉल और सुरक्षित सरकारी इमारतों को राहत शिविरों में बदला जाए। शिविरों में शरणार्थियों के लिए दोनों वक्त ताजा गर्म खाना, बच्चों के लिए दूध और गर्भवती महिलाओं के लिए पौष्टिक आहार की पुख्ता व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रभावित इलाकों में जहरीले कीड़े और सांपों के खतरे को देखते हुए सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर पर्याप्त एंटी स्नेक वेनम और एंटी रेबीज के इंजेक्शन रखने को कहा गया है। इसके साथ ही पशुओं के लिए भूसा-चोकर और वेटरनरी डॉक्टरों की टीम तैनात करने के आदेश दिए गए हैं। बाढ़ के चलते जो लोग अपने घर छोड़कर शिविरों में रह रहे हैं, उनकी संपत्ति और मवेशियों की सुरक्षा के लिए गांवों में रात के वक्त पुलिस, होमगार्ड और पीआरडी जवानों की लगातार गश्त सुनिश्चित की जाएगी ताकि किसी भी तरह की चोरी या असामाजिक घटना को रोका जा सके।
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