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Ranchi : किसी जरूरतमंद परिवार में जब बेटी की शादी की तारीख तय होती है, तो पिता के चेहरे पर खुशी से ज्यादा चिंता की लकीरें खिंच जाती हैं। ठीक वैसे ही, जब किसी दूर-दराज के गांव की लड़की मीलों पैदल चलकर स्कूल जाने से कतराने लगती है, तो अक्सर उसकी पढ़ाई बीच में ही छूट जाती है। लेकिन अगर कोई बिना शोर मचाए आगे आए, शादी का खर्च थोड़ा हल्का कर दे और उस लड़की के हाथों में एक साइकिल थमा दे, तो इसे सिर्फ मदद नहीं कहते। इसे किसी की जिंदगी की दिशा मोड़ना कहते हैं। रांची में CCL यानी सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड से जुड़ी अर्पिता महिला मंडल की महिलाएं यही काम चुपचाप कर रही थीं। अब इसी जमीनी पहल को पहचान मिली है झारखंड आइकॉनिक अवॉर्ड के रूप में, जो संस्था की अध्यक्षा प्रीति सिंह को सौंपा गया।
कागजी वादों से दूर, रोजमर्रा की दिक्कतों पर सीधी चोट
महाबली एंटरटेनमेंट और ईस्ट जोन टैलेंट शो के मंच पर जब समाज के पांच प्रमुख नामों को चुना गया, तो अर्पिता महिला मंडल का काम सबसे अलग नजर आया। वजह साफ थी कि उनका काम किसी मंच या भाषण तक सीमित नहीं रहा। मंडल की टीम ने उन बुनियादी जरूरतों को पकड़ा जो आम तौर पर छूट जाती हैं। दिहाड़ी मजदूरी करने वाली महिलाओं को काम पर समय से पहुंचने के लिए साइकिलें दी गईं, ताकि उनका सफर थोड़ा आसान हो सके। वहीं होनहार बच्चों के हाथों में टैबलेट थमाकर उन्हें ऑनलाइन पढ़ाई से जोड़ा गया। तपती गर्मियों में जब गरीब बस्तियों में पंखे भी गर्म हवा फेंकते हैं, तब कूलर पहुंचाए गए और छोटे फेरीवालों को अपने पैरों पर खड़े होने के लिए हाथ ठेले दिए गए।
हुनर की चाबी से खुला आत्मनिर्भरता का रास्ता
महिला सशक्तिकरण की असली परीक्षा तब होती है जब कोई महिला अपनी कमाई से घर चलाने लगे। अर्पिता महिला मंडल ने इसी बात को ध्यान में रखते हुए महिलाओं को सिलाई का व्यवस्थित प्रशिक्षण दिया। सीखने के बाद सिर्फ प्रमाण पत्र देकर बात खत्म नहीं की गई, बल्कि उन्हें सिलाई मशीनें भी सौंपी गईं ताकि वे घर बैठे कमाई शुरू कर सकें। इसके साथ ही, झिझक और संकोच को तोड़ते हुए बस्तियों में सेनेटरी पैड वेंडिंग मशीनें लगाई गईं, ताकि किशोरियों और महिलाओं को माहवारी के दौरान साफ-सफाई की सुविधा मिल सके।
एक अकेला हाथ नहीं, पूरे कुनबे की मेहनत का फल
अवॉर्ड हाथ में लेने के बाद अध्यक्ष प्रीति सिंह ने साफ कहा कि यह ट्रॉफी उनकी अपनी नहीं है। उनका मानना है कि जब कई महिलाएं एक ही मकसद से साथ जुटती हैं, तभी जमीन पर बदलाव दिखता है। उन्होंने इस सम्मान का श्रेय संस्था की हर एक सदस्य को दिया और कहा कि यह पहचान आगे काम करने की नई ऊर्जा देती है। कार्यक्रम के दौरान संस्था की उपाध्यक्ष रीता मिश्रा, इंदु मिश्रा और रीता तिवारी समेत कई सदस्य मौजूद रहीं। सबके चेहरों पर एक ही सुकून था कि जो कोशिशें उन्होंने छोटे-छोटे स्तर पर शुरू की थीं, आज उनकी गूंज पूरे राज्य में सुनाई दे रही है।
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