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Patna : बिहार के सहकारिता मंत्री राम कृपाल यादव ने स्पष्ट कर दिया है कि किसानों से जुड़ी सरकारी योजनाओं में किसी भी तरह की ढिलाई या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को दो टूक निर्देश दिया है कि जो काम जहां अटका है, उसे तुरंत आगे बढ़ाया जाए और किसानों को तय समय में योजनाओं का फायदा पहुंचाया जाए। मंत्री ने पटना में पूर्णिया और मुंगेर प्रमंडल के सभी जिलों में चल रही सहकारिता योजनाओं की गहन समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों से कहा कि कागजों पर काम दिखाने के बजाय जमीनी स्तर पर निगरानी रखी जाए, ताकि गांव के अंतिम किसान तक सरकारी सहायता आसानी से पहुंच सके।
धान खरीद और फसल सहायता के लंबित मामलों पर सख्त रुख
बैठक में खरीफ विपणन मौसम 2025-26 के तहत धान खरीद और चावल आपूर्ति के आंकड़ों की पड़ताल की गई। आंकड़ों के अनुसार, मुंगेर प्रमंडल में धान खरीद का लक्ष्य लगभग 99.92 प्रतिशत और चावल आपूर्ति करीब 99.56 प्रतिशत दर्ज की गई है। इसी तरह पूर्णिया प्रमंडल में धान खरीद 99.72 प्रतिशत और चावल आपूर्ति 97.62 प्रतिशत तक पहुंची है। मंत्री ने इन आंकड़ों पर संतोष जताने के साथ ही बचे हुए काम को फौरन निपटाने को कहा। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि खरीद और आपूर्ति की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और इसमें किसी भी स्तर पर किसानों को परेशानी नहीं आनी चाहिए।
इसके साथ ही बिहार राज्य फसल सहायता योजना की धीमी प्रगति पर भी विस्तार से चर्चा हुई। मंत्री ने पाया कि कई जगहों पर किसानों का भौतिक सत्यापन और कागजी जांच अभी भी रुकी हुई है। उन्होंने अधिकारियों को आदेश दिया कि विशेष अभियान चलाकर सभी लंबित आवेदनों का सत्यापन तुरंत पूरा किया जाए। जिला और प्रखंड स्तर के अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे अपने कार्यालयों में बैठकर समय न गंवाएं, बल्कि फाइलों को तेजी से आगे बढ़ाएं ताकि प्राकृतिक आपदा या नुकसान झेलने वाले पात्र किसानों के बैंक खातों में सहायता राशि समय पर पहुंचाई जा सके।
गोदाम निर्माण में तेजी और पैक्स का डिजिटल कायाकल्प
समीक्षा बैठक के दौरान ग्रामीण इलाकों में गोदामों के निर्माण और भंडारण की स्थिति पर भी बात हुई। मंत्री ने साफ कहा कि जो गोदाम आधे-अधूरे बने पड़े हैं या जिन परियोजनाओं में देरी हो रही है, उन्हें निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा कराया जाए। उन्होंने कहा कि इन गोदामों का सीधा फायदा किसानों को अपनी उपज सुरक्षित रखने में मिलना चाहिए। इसके अलावा प्राथमिक कृषि साख समितियों यानी पैक्स के कम्प्यूटरीकरण के काम को भी गति देने के निर्देश दिए गए। मंत्री ने कहा कि सभी पैक्स को पूरी तरह सक्रिय और डिजिटल किया जाए ताकि किसानों को खाद, बीज और अन्य सुविधाएं ऑनलाइन माध्यम से बिना किसी झंझट के मिल सकें। जिला स्तर पर इसकी नियमित मॉनिटरिंग के आदेश दिए गए हैं।
गांव-गांव तक बैंकिंग और किसान क्रेडिट कार्ड का दायरा बढ़ाने पर जोर
सहकारी बैंकों और समितियों के जरिए बैंकिंग सेवाओं के विस्तार की समीक्षा करते हुए मंत्री ने बताया कि ग्रामीण इलाकों में माइक्रो एटीएम और बैंक मित्रों की भूमिका अहम है। मुंगेर प्रमंडल में 146 माइक्रो एटीएम के जरिए 9,298 खातों से सेवाएं दी जा रही हैं और 1,134.78 लाख रुपये की जमा पूंजी जुटाई गई है। वहीं पूर्णिया प्रमंडल में 74 माइक्रो एटीएम के जरिए 3,702 खातों और 83.79 लाख रुपये की जमा राशि दर्ज की गई है। मंत्री ने निर्देश दिया कि पैक्स, दुग्ध सहकारी समितियों और मत्स्यजीवी सहयोग समितियों को जोड़कर इस सेवा को और अधिक मजबूत बनाया जाए।
किसान क्रेडिट कार्ड को लेकर भी मंत्री ने अधिकारियों को चेताया कि पात्र किसानों को लोन देने में बेवजह अड़ंगे न लगाए जाएं। जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों को निर्देश दिया गया कि वे आवेदनों को लटकाने के बजाय तेजी से लोन स्वीकृत करें। मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि वे एसी कमरों से बाहर निकलकर खेतों और गांवों का दौरा करें ताकि योजनाओं का सच सामने आ सके। इस उच्चस्तरीय बैठक में सहकारिता विभाग के अपर सचिव अभय कुमार सिंह, अपर निबंधक विकास कुमार बरियार सहित दोनों प्रमंडलों के वरिष्ठ अधिकारी और बैंकों के प्रबंध निदेशक मौजूद रहे।
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