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Supaul : अस्पताल के बर्न वार्ड की सफेद चादर पर झुलसा हुआ बदन और सांसों में बाकी बची सिर्फ इतनी ताकत कि वह अपने साथ हुई हैवानियत का सच दुनिया को बता सके। मुजफ्फरपुर की रहने वाली दमनी देवी को शायद यह गुमान भी नहीं रहा होगा कि जिस इंसान के नाम की सिंदूर उसने नौ महीने पहले बड़े चाव से मांग में भरी थी, वही एक शाम उसकी जिंदगी को पेट्रोल और माचिस के हवाले कर देगा। अस्पताल के बेड पर दम तोड़ने से पहले जब उसने अपनी धीमी आवाज में कहा कि मुझे मेरे पति संजीव ने जला दिया, तो वहां मौजूद हर शख्स का कलेजा कांप उठा।
फोन की स्क्रीन पर शुरू हुई बातें और कोर्ट की चौखट तक पहुंचा प्यार
यह कहानी करीब साल भर पहले सोशल मीडिया ऐप इंस्टाग्राम पर शुरू हुई थी। मुजफ्फरपुर के गरुअल की रहने वाली दमनी की बातचीत सुपौल के भपटियाही इलाके के संजीव कुमार साह से शुरू हुई। रील्स और मैसेज के जरिए शुरू हुई यह बातचीत धीरे-धीरे मुलाकातों में बदली और दोनों को लगा कि वे एक-दूसरे के बिना नहीं रह सकते। परिवार की बंदिशों और सामाजिक रीतियों को पीछे छोड़ते हुए दोनों ने लव मैरिज करने की ठानी। कोर्ट में जाकर दोनों ने कागजों पर दस्तखत किए और साथ रहने लगे। उस वक्त दमनी को लगा था कि उसने अपना मनचाहा हमसफर पा लिया है, लेकिन शादी के कुछ ही हफ्तों बाद प्यार का यह रंग फीका पड़ने लगा।
मीठी बातों के पीछे छिपा था खौफनाक इरादा
घर की चारदीवारी में दोनों के बीच रोज-रोज की खटपट शुरू हो गई। बात इतनी बढ़ गई कि दमनी अपने मायके लौट आई। दोनों की बातचीत बंद हो गई और आखिरकार दोनों ने एक-दूसरे से कानूनी तौर पर अलग होने यानी तलाक लेने का मन बना लिया। इसी तलाक को हथियार बनाकर संजीव ने खौफनाक साजिश रची। उसने बड़े ही शांत लहजे में दमनी को फोन किया और कहा कि तलाक के कागजात पर साइन करने के लिए सुपौल आ जाओ ताकि दोनों अपनी जिंदगी में आगे बढ़ सकें। दमनी को लगा कि सब कुछ शांति से सुलझ जाएगा और वह सीधे सुपौल पहुंच गई। शाम ढल चुकी थी और संजीव उसे बाइक पर बिठाकर लालमनपट्टी नहर के पास ले गया।
सन्नाटे में गूंजी चीखें और राख में बदल गए सारे ख्वाब
नहर के किनारे दूर-दूर तक कोई आबादी नहीं थी। अंधेरे और सन्नाटे का फायदा उठाकर संजीव का बर्ताव अचानक बदल गया। उसने पहले दमनी को बेरहमी से पीटा। दमनी कुछ समझ पाती, उससे पहले ही संजीव ने साथ लाई बोतल से पेट्रोल उसके पूरे बदन पर उड़ेल दिया और आग लगा दी। आग की लपटों से घिरी दमनी दर्द से छटपटाते हुए जान बचाने के लिए भागी, जबकि संजीव अपनी बाइक स्टार्ट कर अंधेरे में गायब हो गया। जलते हुए शरीर के साथ किसी तरह दमनी पास के गांव तक पहुंची। ग्रामीणों ने जब एक जलती हुई परछाई को देखा, तो फौरन कंबल डालकर आग बुझाई और पुलिस को फोन किया।
अस्पताल में जिंदगी की आखिरी घड़ियां गिनते हुए दमनी ने अपने पिता, भाई और पति का नाम बताया और साफ कहा कि उसके प्यार का कत्ल उसके पति ने किया है। इलाज के दौरान दमनी ने दम तोड़ दिया और एक लड़की के ख्वाब हमेशा के लिए राख की ढेरी बन गए।
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