अपनी मनपसंद भाषा में पढ़ें :
Patna : डिस्लेक्सिया जैसी लर्निंग डिसेबिलिटी को लेकर लोगों की सोच बदलने और समाज में जागरूकता फैलाने के मकसद से रविवार शाम राजधानी पटना के प्रमुख सरकारी भवनों को लाल रोशनी से रोशन किया गया। भवन निर्माण विभाग की इस खास पहल के तहत शहर की ऐतिहासिक और प्रशासनिक इमारतों ने एक घंटे तक लाल रंग की चादर ओढ़ रखी थी। इसका सीधा संदेश यह था कि जो बच्चे आम तरीकों से अलग सीखते हैं, उन्हें समाज में कमजोरी नहीं बल्कि सही सहयोग और बराबरी के अवसर मिलने चाहिए।
शाम 7 से 8 बजे तक लाल रंग में रंगे रहे प्रमुख भवन
भवन निर्माण विभाग के सचिव प्रणव कुमार ने बताया कि रविवार शाम ठीक 7 बजे से 8 बजे तक शहर के कई बड़े परिसरों में लाल लाइट जलाई गई। इनमें हाल ही में बना बापू टावर, बिहार विधान मंडल परिसर, पुराना सचिवालय, विकास भवन और विश्वेश्वरैया भवन शामिल रहे। शाम ढलते ही जब ये इमारतें लाल रंग में जगमगाने लगीं, तो सड़कों से गुजरने वाले लोगों का ध्यान भी इस ओर गया। विभाग का कहना है कि यह रोशनी सिर्फ सजावट नहीं, बल्कि इस बीमारी को लेकर समाज में फैली गलतफहमियों को दूर करने और एक संवेदनशील माहौल बनाने की एक कोशिश है।
डिस्लेक्सिया कमजोरी नहीं, सीखने का अलग तरीका
डिस्लेक्सिया दरअसल एक ऐसी स्थिति है जिसमें बच्चों या बड़ों को शब्द पहचानने, पढ़ने, लिखने या वर्तनी याद रखने में परेशानी होती है। विशेषज्ञों और अधिकारियों का साफ कहना है कि इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि प्रभावित व्यक्ति में दिमाग या हुनर की कोई कमी है। यह सिर्फ दिमाग के काम करने और चीजों को समझने का एक अलग तरीका है। अगर माता-पिता और शिक्षक समय रहते इसकी पहचान कर लें और बच्चों को सही शैक्षणिक मदद मिले, तो ऐसे बच्चे किसी भी क्षेत्र में बाकी लोगों से आगे निकल सकते हैं।
बच्चों पर टैग लगाने के बजाय समझने की जरूरत
विभाग की इस पहल का मुख्य उद्देश्य समाज को यह समझाना है कि सीखने में दिक्कत का सामना कर रहे बच्चों को किसी नकारात्मक टैग के साथ न देखा जाए। स्कूल और घर दोनों जगह ऐसा माहौल होना चाहिए जहां हर बच्चे की सीखने की गति का सम्मान हो। जब तक समाज और परिवार इन बच्चों की जरूरतों को समझकर उन्हें सही प्लेटफॉर्म नहीं देंगे, तब तक समावेशी समाज का सपना पूरा नहीं हो सकता। राजधानी के भवनों से उठी यह लाल रोशनी इसी बदलाव की दिशा में एक जरूरी कदम साबित हो रही है।
इसे भी पढ़ें : सरकारी स्कूलों में दिखने लगा ‘सम्राट’ मॉडल का असर, क्लासरूम से लेकर टॉयलेट तक चकाचक



