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Patna : बिहार पुलिस ड्राइवर भर्ती के अभ्यर्थी अपनी मांगों को लेकर अब आर-पार के मूड में आ गए हैं। गर्दनीबाग धरना स्थल पर पिछले 51 दिनों से डटे उम्मीदवार सोमवार को उग्र प्रदर्शन की तैयारी में जुट गए। करीब 5 हजार से ज्यादा अभ्यर्थी जब धरना स्थल से निकलकर मुख्य सड़क की ओर बढ़ने लगे, तो पुलिस ने तुरंत मोर्चा संभालते हुए गर्दनीबाग का मुख्य गेट बंद कर दिया। सड़क पर उतरने से रोके जाने के बाद अभ्यर्थियों ने गेट के पास ही जमीन पर बैठकर जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। कोई थाली पीट रहा था तो कोई डफली और खाली टीन बजाकर सरकार के खिलाफ अपना गुस्सा जता रहा था।
खाली बची 1200 सीटों को पुरुष उम्मीदवारों से भरने की मांग
अभ्यर्थियों की सबसे बड़ी नाराजगी भर्ती में खाली रह गई सीटों को लेकर है। उम्मीदवारों का कहना है कि पुलिस ड्राइवर भर्ती में महिलाओं के लिए करीब 1600 पद तय किए गए थे। इनमें से केवल 250 महिला उम्मीदवार ही परीक्षा और शारीरिक दक्षता पास कर पाईं। इसके चलते 1200 से अधिक पद खाली रह गए हैं। अभ्यर्थियों का सीधा तर्क है कि इन खाली पदों को उसी श्रेणी के योग्य पुरुष उम्मीदवारों से भरा जाना चाहिए। उनका कहना है कि अगर नियम इसकी अनुमति देते हैं तो सरकार को इस पर फैसला लेना चाहिए, ताकि भर्ती प्रक्रिया में शामिल योग्य लड़कों का साल बर्बाद न हो और सीटें भी खाली न रहें।
खून से अंगूठा लगाने से लेकर छठ पूजा तक, अनोखे विरोध के तरीके
गर्दनीबाग में बैठे इन युवाओं का प्रदर्शन सिर्फ नारों तक सीमित नहीं रहा है। धरने के दौरान अपनी बात पहुंचाने के लिए इन्होंने कई अलग तरीके अपनाए हैं। कुछ दिन पहले अभ्यर्थियों ने अपने अंगूठे से खून निकालकर मांग पत्र पर दस्तखत किए थे। उनका कहना था कि अगर सरकार ने अब भी सुध नहीं ली तो वे और कड़ा कदम उठाएंगे। इससे पहले छठ पर्व के दौरान कई अभ्यर्थी पीली धोती पहनकर, हाथ में सूप और कलश लेकर धरने पर बैठ गए थे और सूर्य उपासना के जरिए अपनी पीड़ा बयां की थी। अब थाली और चम्मच बजाकर ये युवा सरकार को नींद से जगाने की बात कह रहे हैं।
मांगें पूरी नहीं हुईं तो होगा बड़ा आंदोलन
धरना दे रहे अभ्यर्थियों का साफ कहना है कि वे पिछले पौने दो महीने से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी गुहार लगा रहे हैं, लेकिन प्रशासन की तरफ से कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है। गेट बंद होने के बाद उम्मीदवारों ने वहीं बैठकर चेतावनी दी कि अगर सरकार ने महिला कोटे की बची सीटों को भरने पर जल्द फैसला नहीं लिया, तो यह आंदोलन सिर्फ गर्दनीबाग तक सीमित नहीं रहेगा। आने वाले दिनों में वे पूरे पटना में बड़ा आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।
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