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Lucknow : सीएम योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई उत्तर प्रदेश कैबिनेट की बैठक में 22 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने, पशुपालन को बढ़ावा देने, कंपनियों के विलय की प्रक्रिया आसान बनाने, जल परिवहन को सुरक्षित करने और शिक्षा से जुड़े कर्मचारियों को चिकित्सा सुविधा देने पर जोर दिया। बैठक में चार लिंक एक्सप्रेसवे बनाने की योजना को भी मंजूरी मिली। इन परियोजनाओं पर करीब 17,542 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके अलावा 48 हजार से ज्यादा शिक्षणेत्तर कर्मचारियों और बेसिक शिक्षा क्षेत्र के 1.22 लाख से अधिक कर्मचारियों को कैशलेस इलाज की सुविधा देने का फैसला लिया गया।
कैबिनेट के फैसलों में पशुपालकों के लिए आर्थिक सहायता, नावों और यात्रियों के बीमा, कंपनियों के मर्जर पर स्टांप ड्यूटी के स्पष्ट नियम और विभिन्न क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा देने से जुड़े प्रस्ताव शामिल हैं।
पशुपालकों को गाय पर 50 हजार रुपये का अनुदान
उत्तर प्रदेश दूध उत्पादन में देश में पहले स्थान पर है। इसके बावजूद पशुपालन के क्षेत्र में पशुओं की उत्पादकता बढ़ाने, पशु उत्पादों की बेहतर कीमत दिलाने और बाजार तक पहुंच आसान बनाने की जरूरत है। इसे देखते हुए कैबिनेट में पशुपालन क्षेत्र को मजबूत करने के लिए स्टेट लैब स्टार्ट मिशन के गठन का प्रस्ताव रखा गया।
इस मिशन का उद्देश्य पशुपालन को किसानों की आमदनी बढ़ाने का प्रमुख साधन बनाना है। इसके तहत पशुओं की नस्ल सुधारने, दूध उत्पादन बढ़ाने, रोजगार के नए अवसर तैयार करने और पशु उत्पादों की बिक्री के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध कराने पर काम किया जाएगा। मुर्गी और बकरी पालन को भी प्रोत्साहित करने की योजना है।
योजना के तहत गाय की नस्ल सुधारने और दूध उत्पादन बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। प्रति गाय प्रतिदिन 10 लीटर तक दूध उत्पादन पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। पशुपालकों को आर्थिक मदद देने के साथ पशुओं का बीमा भी कराया जाएगा।
प्रस्ताव के अनुसार, पशु बीमा की कुल लागत का 85 प्रतिशत हिस्सा सरकार और 15 प्रतिशत हिस्सा किसान देंगे। इसके अलावा एक गाय पर 50 हजार रुपये का अनुदान देने का प्रावधान बताया गया है। इससे पशुपालकों पर आर्थिक बोझ कम करने और पशुपालन को रोजगार का बेहतर विकल्प बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
कंपनियों के मर्जर पर शेयर वैल्यू का 0.50% स्टांप ड्यूटी
उत्तर प्रदेश में कंपनियों के विलय यानी मर्जर और विभाजन यानी डी-मर्जर की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए स्टांप ड्यूटी से जुड़े प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। स्टांप मंत्री रविंद्र जायसवाल के मुताबिक, प्रदेश में अब तक इस प्रक्रिया के लिए स्टांप ड्यूटी का स्पष्ट प्रावधान नहीं था। इसके कारण कई मामलों में उद्यमियों को असमंजस और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता था।
प्रस्ताव के तहत कंपनी के मर्जर या डी-मर्जर के मामलों में शेयर वैल्यू पर 0.50 प्रतिशत स्टांप ड्यूटी लगाने का प्रावधान किया गया है। यदि मामले में संपत्ति भी शामिल है, तो उस पर दो प्रतिशत स्टांप ड्यूटी का प्रस्ताव है। कंपनी के पंजीकरण और कंपनी रजिस्ट्रार यानी आरओसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शेयर वैल्यू के आधार पर ड्यूटी देनी होगी।

रविंद्र जायसवाल ने बताया कि स्पष्ट नियम नहीं होने के कारण कुछ मामलों में सर्किल रेट के आधार पर स्टांप ड्यूटी की मांग की जाती थी। इससे कंपनियों के विलय के दौरान परेशानी होती थी। नए प्रावधान से दो कंपनियों के मिलकर एक कंपनी बनने जैसी प्रक्रियाओं में नियम स्पष्ट होने की उम्मीद है।
मंत्री के मुताबिक, गुजरात और महाराष्ट्र में इस तरह की व्यवस्था है। उत्तर प्रदेश में इसे लागू करने के लिए प्रस्ताव केंद्र सरकार की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद प्रदेश में इसे लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
नावों का पंजीकरण होगा, यात्रियों और नाविकों का बीमा भी
प्रदेश में नदियों के जरिए जल परिवहन को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए सरकार नावों और पानी के जहाजों के पंजीकरण की व्यवस्था करेगी। परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने बताया कि अभी मोटर से चलने वाले जहाजों और नावों के संचालन के लिए स्पष्ट नियमावली नहीं थी। नई व्यवस्था में यांत्रिक और गैर-यांत्रिक दोनों तरह की नावों का पंजीकरण किया जाएगा।
जल परिवहन के संचालन और निगरानी के लिए इनलैंड वाटर अथॉरिटी बनाई जाएगी। इसके अध्यक्ष परिवहन मंत्री होंगे। नावों को उनके आकार, इंजन और यात्रियों को ले जाने की क्षमता के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में रखा जाएगा। इसमें 10 यात्रियों की क्षमता वाली मोटर नाव, पांच से 10 यात्रियों वाली नाव और पांच तक यात्रियों को ले जाने वाली नाव जैसी श्रेणियां शामिल होंगी। गैर-यात्री नावों के पंजीकरण के लिए 50 रुपये शुल्क प्रस्तावित है।
नई व्यवस्था के तहत नावों और नाविकों का रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। अभी खासकर गैर-यांत्रिक नावों के संचालन से जुड़ा व्यवस्थित आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। सरकार का उद्देश्य छोटे और असंगठित जल परिवहन क्षेत्र को भी नियमों के दायरे में लाना है।
यात्रियों और नाविकों के बीमा का भी प्रावधान किया जाएगा। नावों के पंजीकरण और निगरानी में एआरटीओ प्रशासन, तहसील स्तर के अधिकारी और आरआई की भूमिका होगी। सरकार गंगा और यमुना समेत प्रदेश की 11 नदियों पर जल परिवहन की संभावनाओं को विकसित करने की दिशा में काम करेगी। इससे नदी मार्गों पर नाव संचालन को सुरक्षित बनाने और परिवहन के नए विकल्प तैयार करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
48,062 शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को मिलेगा कैशलेस इलाज
कैबिनेट ने शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कर्मचारियों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी। इसके तहत अशासकीय सहायता प्राप्त, वित्तविहीन और अशासकीय सहायता प्राप्त संस्कृत विद्यालयों के शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को पांच लाख रुपये तक के इलाज की सुविधा मिलेगी।
सरकार के मुताबिक, अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों के 23,989, वित्तविहीन विद्यालयों के 22,541 और अशासकीय सहायता प्राप्त संस्कृत विद्यालयों के करीब 110 शिक्षणेत्तर कर्मचारी इस योजना के दायरे में आएंगे। इस तरह कुल 48,062 कर्मचारियों को लाभ मिलेगा।
प्रत्येक कर्मचारी के बीमा प्रीमियम के लिए सरकार 3,000 रुपये देगी। इस पर कुल 14.41 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। योजना के तहत कर्मचारियों के साथ उनके परिवार के सदस्य भी पांच लाख रुपये तक के कैशलेस इलाज का लाभ ले सकेंगे।
बेसिक शिक्षा क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए भी इसी तरह की सुविधा देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इस श्रेणी में कुल 1,22,305 कर्मचारियों को लाभ मिलेगा। इनमें चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, लिपिक, वित्तविहीन संस्थानों के कर्मचारी और जिला परियोजना से जुड़े कर्मी शामिल हैं।
सैनिक स्कूल मैनपुरी के विस्तार के लिए मुफ्त जमीन
कैबिनेट ने सैनिक स्कूल मैनपुरी के विस्तार के लिए ग्रामीण क्षेत्र में निःशुल्क जमीन उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी। यह स्कूल 22 जुलाई 2019 से संचालित है। जमीन उपलब्ध होने से स्कूल के विस्तार का रास्ता साफ होगा। सरकार का उद्देश्य स्कूल की सुविधाओं को बढ़ाने के साथ विद्यार्थियों के लिए बेहतर शैक्षणिक व्यवस्था तैयार करना है।
चार लिंक एक्सप्रेसवे पर 17,542 करोड़ रुपये खर्च होंगे
उत्तर प्रदेश में सड़क कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए चार लिंक एक्सप्रेसवे बनाने की योजना को कैबिनेट की मंजूरी मिली। यूपीडा के प्रस्ताव के तहत इनका निर्माण इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन यानी ईपीसी मोड पर किया जाएगा। चारों परियोजनाओं पर करीब 17,542 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इन्हें तीन साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
इनमें फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेसवे के पैकेज-1 और पैकेज-2 शामिल हैं। दोनों की कुल लंबाई करीब 90 किलोमीटर होगी। इसके अलावा आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जोड़ने वाला लिंक एक्सप्रेसवे बनाया जाएगा।
योजना में झांसी लिंक एक्सप्रेसवे के पैकेज-1 और पैकेज-2 का निर्माण भी शामिल है। इनकी कुल लंबाई 106 किलोमीटर होगी। इसके साथ 74 किलोमीटर लंबे जेवर लिंक एक्सप्रेसवे का निर्माण किया जाएगा।
इन परियोजनाओं के पूरा होने से अलग-अलग एक्सप्रेसवे के बीच संपर्क बेहतर होने और यात्रा के विकल्प बढ़ने की उम्मीद है। निर्माण करने वाली कंपनियों को एक्सप्रेसवे तैयार करने के बाद पांच साल तक उनके रखरखाव की जिम्मेदारी भी निभानी होगी।
झांसी-ललितपुर में भंडारण क्षमता 6.5 लाख मीट्रिक टन बढ़ेगी
कैबिनेट ने सहकारिता विभाग के उस प्रस्ताव को भी मंजूरी दी, जिसके तहत झांसी और ललितपुर में 6.5 लाख मीट्रिक टन की अतिरिक्त भंडारण क्षमता विकसित की जाएगी। इसके लिए 5.47 हेक्टेयर जमीन पर निर्माण किया जाएगा।
इस योजना का उद्देश्य क्षेत्र में भंडारण की सुविधा बढ़ाना है। इससे कृषि उपज और दूसरी जरूरतों के लिए भंडारण व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
ग्रेटर नोएडा में 654 करोड़ का निवेश प्रस्ताव
कैबिनेट बैठक में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश यानी एफडीआई से जुड़े प्रस्ताव पर भी मुहर लगी। इसके तहत ग्रेटर नोएडा में एंपावर्ड कमेटी की संस्तुति को मंजूरी दी गई। इसमें एंपावर्ड कमेटी के प्रस्ताव के अनुसार, एकागो हॉस्पिटेलिटी की ओर से 654 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव शामिल है।
ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर यानी जीसीसी नीति के तहत चार कंपनियों को लेटर ऑफ कंफर्ट जारी करने पर भी सहमति बनी। इनमें हैवेल्स की नोएडा में 889 करोड़ रुपये के निवेश की योजना शामिल है। इसके अलावा अमेरियोराइड इंडिया एलएलपी के 112 करोड़ रुपये, मेटलाइफ ग्लोबल के 84 करोड़ रुपये और एलजी सॉफ्ट के 634 करोड़ रुपये के प्रस्ताव शामिल हैं।
इन प्रस्तावों का उद्देश्य प्रदेश में निवेश को बढ़ावा देना और कंपनियों के लिए कारोबारी गतिविधियों के विस्तार का रास्ता आसान करना है। कैबिनेट के फैसलों में ग्रामीण अर्थव्यवस्था, शिक्षा, परिवहन, उद्योग और बुनियादी ढांचे से जुड़े कई क्षेत्रों को शामिल किया गया है।
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