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Patna : पाटलिपुत्र रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर सजी एक विशेष ट्रेन के डिब्बों में खिड़कियों से बाहर झांकते चेहरे बुधवार को कुछ अलग ही दास्तान बयां कर रहे थे। ये वे लोग हैं जिनके गांवों में कभी शाम ढलते ही सन्नाटा पसर जाता था, जहां रातों की खामोशी गोलियों की तड़तड़ाहट से टूटती थी और लाल आतंक का खौफ जिंदगी पर पहरा देता था। आज वही 22 जिलों के 1100 बाशिंदे नई उम्मीदों और हौसले से लबरेज होकर गुजरात के एकता नगर (केवड़िया) के लिए रवाना हुए। मौका है 31 अक्टूबर को सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर होने वाले राष्ट्रीय एकता दिवस का, जहां ये ग्रामीण पूरी दुनिया के सामने बिहार के बदले हुए मिजाज की गवाही देंगे।
ट्रेन की रवानगी से ठीक पहले माहौल में गजब का जोश था। सीएम सम्राट चौधरी ने जैसे ही स्पेशल ट्रेन को हरी झंडी दिखाई, ‘भारत माता की जय’ के गगनभेदी नारों से पूरा रेलवे स्टेशन परिसर गूंज उठा। ट्रेन रवाना करने के बाद सीएम खुद डिब्बों के पास पहुंचे, खिड़कियों पर खड़े यात्रियों से हाथ मिलाया, उनका कुशलक्षेम पूछा और पूरी आत्मीयता से इस ऐतिहासिक सफर की मंगलमय शुभकामनाएं दीं।

पीएम मोदी के विजन से मिली नई पहचान, राष्ट्रीय मंच पर दिखेगी बदलती तस्वीर
सीएम सम्राट चौधरी ने स्टेशन पर उपस्थित जनसमूह और यात्रियों को संबोधित करते हुए कहा कि यह यात्रा महज एक ट्रेन का चलना नहीं है, बल्कि उस मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति की जीत है जिसने बिहार के सबसे पिछड़े और भयभीत कोनों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ दिया है। उन्होंने विस्तार से बताते हुए कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नक्सलवाद के खिलाफ चले सुनियोजित अभियानों का ही नतीजा है कि कल तक बंदूकों के साए में जीने वाले इलाके आज खुली हवा में सांस ले रहे हैं।
सीएम ने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री के ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ और ‘संकल्प से सिद्धि’ के मंत्र ने देश के प्रत्येक नागरिक को यह विश्वास दिलाया है कि सुरक्षा, समृद्धि और विकास पर सबका बराबर हक है। उन्होंने कहा कि गुजरात के केवड़िया में सरदार पटेल की विशाल प्रतिमा के समक्ष आयोजित राष्ट्रीय समारोह में जब बिहार के इन 22 जिलों के ग्रामीण कदम रखेंगे, तो यह नजारा देश को बताएगा कि बिहार अब लाल आतंक की काली छाया से पूरी तरह मुक्त होकर अमन, विश्वास और स्वाभिमान के रास्ते पर बहुत आगे निकल चुका है।
“प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में नक्सलवाद के खिलाफ चले निर्णायक अभियान और विकास की मुख्यधारा से जुड़ते क्षेत्रों की नई पहचान को यह पहल देश के सर्वोच्च मंच पर स्थापित करेगी। बिहार के नक्सलमुक्त जिलों से इन ग्रामीणों की इतनी बड़ी भागीदारी पूरे देश को राष्ट्रीय एकता, शांति और निरंतर विकास का सबसे मजबूत संदेश देगी।”
– सम्राट चौधरी, मुख्यमंत्री, बिहार
कल तक जहां पहरा था, आज वहां से निकली विकास और विश्वास की बारात
एक दौर था जब गया, औरंगाबाद, जमुई और कैमूर की पहाड़ियों से सटे गांवों का नाम आते ही जेहन में पुलिस की गश्त और नक्सलियों के फरमान कौंध जाते थे। सरकारी योजनाओं के पैसे या तो डर के मारे पहुंच नहीं पाते थे या विकास की रफ्तार जंगलों के मुहाने पर ही दम तोड़ देती थी। लेकिन आज वही गांव खुलकर जी रहे हैं।
ट्रेन में सवार ग्रामीणों की आंखों में इस बात का फख्र साफ झलक रहा था कि वे अब किसी नक्सली दस्ते के खौफ में नहीं, बल्कि देश के सबसे बड़े राष्ट्रीय मंच पर अपने बिहार का प्रतिनिधित्व करने जा रहे हैं। स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के साए में आयोजित होने वाले भव्य समारोह में जब ये लोग कदम रखेंगे, तो यह आयोजन न केवल सरदार पटेल के राष्ट्रीय एकीकरण के सपनों को नमन करेगा, बल्कि केंद्र और राज्य सरकार के उस साझा संकल्प की भी पुष्टि करेगा जिसमें अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक विकास पहुंचाने का वादा किया गया था।

STF के 206 जवान भी बने इस ऐतिहासिक सफर के हमसफर
इस ट्रेन की सबसे खास तस्वीर यह दिखी कि सुरक्षा बल और ग्रामीण एक साथ बैठकर इस सफर का आनंद ले रहे हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नक्सलमुक्त भारत के संकल्प के तहत इसी साल 31 मार्च 2026 को बिहार को आधिकारिक तौर पर पूरी तरह नक्सलमुक्त घोषित किया जा चुका है। इस ऐतिहासिक मुकाम को हासिल करने में जिन जवानों ने रात-दिन जंगलों में पसीना बहाया और अपनी जान की बाजी लगाई, वे भी इस ट्रेन में मौजूद हैं।
बिहार STF के 206 जांबाज जवान इन 1100 ग्रामीणों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर गुजरात जा रहे हैं। कल तक जो जवान इन ग्रामीणों की जानमाल की हिफाजत के लिए जंगलों में गश्त लगाते थे, आज वे उन्हीं ग्रामीणों के सहयात्री बनकर राष्ट्रीय एकता के महापर्व में शामिल होने जा रहे हैं।

गौरवशाली पल के गवाह बने ये चेहरे
स्टेशन पर विदाई के इस गौरवशाली पल के गवाह शासन और प्रशासन के कई बड़े चेहरे बने। गृह विभाग के प्रधान सचिव पंकज कुमार ने सीएम को पौधा भेंटकर उनका स्वागत किया। कार्यक्रम में सहकारिता मंत्री रामकृपाल यादव, विधायक संजीव चौरसिया, विधान पार्षद अनामिका सिंह पटेल, डीजीपी प्रीता वर्मा, एडीजी कुंदन कृष्णन, एडीजी सुनील कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव संजय कुमार सिंह, गृह विभाग के विशेष सचिव क्षत्रनील सिंह, पटना प्रक्षेत्र के आईजी जितेंद्र राणा, डीएम कुंदन कुमार और एसएसपी कार्तिकेय के. शर्मा सहित रेलवे और पुलिस-प्रशासन के कई आला अधिकारी मौजूद रहे। सबने एक स्वर में माना कि यह स्पेशल ट्रेन बिहार के अमन और भरोसे की नई इबारत लिख रही है।

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“प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में नक्सलवाद के खिलाफ चले निर्णायक अभियान और विकास की मुख्यधारा से जुड़ते क्षेत्रों की नई पहचान को यह पहल देश के सर्वोच्च मंच पर स्थापित करेगी। बिहार के नक्सलमुक्त जिलों से इन ग्रामीणों की इतनी बड़ी भागीदारी पूरे देश को राष्ट्रीय एकता, शांति और निरंतर विकास का सबसे मजबूत संदेश देगी।”