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Lohardaga (Gautam Lenin) : काले शीशे वाली चमचमाती थार, सुनसान सड़क और जेबों में छिपा मौत का सामान। लातेहार के चंदवा से राजधानी रांची की ओर निकला यह काफिला कोई आम सफर नहीं था, बल्कि शहर के युवाओं की नसों में धीमा जहर घोलने की एक बड़ी साजिश थी। तस्करों को लगा था कि महंगी गाड़ी का रुतबा और सुनसान रास्तों का सहारा उन्हें पुलिस की नजरों से बचा लेगा। लेकिन उन्हें यह इल्म नहीं था कि लोहरदगा पुलिस उनके हर मोड़ पर पहले से नजर गड़ाए बैठी थी। केरवाड़ी मोड़ के पास जैसे ही गाड़ी रुकी, पुलिस ने ऐसा चक्रव्यूह रचा कि किसी को हिलने तक का मौका नहीं मिला। चंद मिनटों की घेराबंदी में बीस लाख की ब्राउन शुगर के साथ आठ सौदागर सलाखों के पीछे पहुंच गए।
मुखबिर की टिप और हाईवे पर बिछा जाल
कहानी की शुरुआत पुलिस अधीक्षक सादिक अनवर रिजवी के पास आई एक गुप्त सूचना से हुई। खबर पक्की थी कि चंदवा की तरफ से एक थार गाड़ी में कुछ शातिर तस्कर मादक पदार्थों की बड़ी खेप लेकर रांची के लिए निकले हैं। मामला गंभीर था, इसलिए बिना वक्त गंवाए एक विशेष ऑपरेशन टीम तैयार की गई। कमान सौंपी गई अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी श्रद्धा केरकेट्टा को, जिनके साथ पुलिस निरीक्षक चंद्रशेखर और कुडू थाना प्रभारी की टीम मुस्तैद हुई। पुलिस ने हाईवे पर निगरानी बढ़ा दी। जैसे ही संदिग्ध थार कुडू की सीमा में दाखिल हुई, जवानों की निगाहें उस पर टिक गईं।
अधूरे मकान में छुपा ठिकाना, पुलिस का अचानक छापा
केरवाड़ी मोड़ के पास पहुंचते ही थार सड़क छोड़कर एक निर्माणाधीन मकान की तरफ मुड़ गई। चारों तरफ से खुला यह अधूरा ढांचा तस्करों को महफूज ठिकाना लग रहा था। गाड़ी खड़ी कर सभी आठ लोग अंदर दाखिल हुए और आपस में माल के बंटवारे और आगे की डिलीवरी की योजना बनाने लगे। इसी बीच सादी वर्दी और हथियारों से लैस पुलिस टीम ने बिना कोई आहट दिए पूरे मकान को चारों तरफ से घेर लिया। जब तक अंदर मौजूद तस्कर कुछ समझ पाते या भागने की कोशिश करते, पुलिस ने उन्हें धर दबोचा।
सिल्वर फॉयल में लिपटी मौत की पुड़िया
जब मौके पर पकड़े गए युवकों की तलाशी ली गई, तो पुलिस भी हैरान रह गई। सभी के पास से एल्युमिनियम फॉयल में करीने से लपेटकर रखी गई ब्राउन शुगर की पुड़िया बरामद हुईं। इस रैकेट का मुख्य सरगना चंदवा का रितु राज जायसवाल उर्फ रितु राज कुमार था, जिसकी तलाशी लेने पर अकेले लगभग सैंतीस ग्राम ब्राउन शुगर मिली। बाकी साथियों के पास से भी आठ से दस ग्राम की पुड़िया बरामद हुईं। जब पूरी बरामदगी को एक जगह तौला गया, तो कुल वजन अठानवे ग्राम निकला। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के मानकों के मुताबिक इसकी अनुमानित कीमत करीब बीस लाख रुपए बैठती है, जबकि नशे के अवैध बाजार में यह रकम इससे भी कहीं ज्यादा वसूली जाती।
रांची के युवाओं तक पहुंचना था यह धीमा जहर
पुलिस की पूछताछ में साफ हुआ कि चंदवा से चला यह माल सीधे रांची के कॉलेज-हॉस्टल और क्लब संस्कृति से जुड़े युवाओं तक पहुंचाया जाना था। गिरोह का दूसरा मुख्य साथी सोनू राज कुमार भी इस धंधे में बराबर का हिस्सेदार था। दोनों ने मिलकर नशे की एक ऐसी चेन तैयार कर रखी थी, जहां छोटे-छोटे पैडलरों के जरिए इसे महंगे दामों में खपाया जाता था। फिलहाल पुलिस ने थार गाड़ी और मादक पदार्थ जब्त कर सभी आठ आरोपियों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। पुलिस अब रांची में बैठे उन कड़ियों की तलाश कर रही है, जो इस खेप के इंतजार में बैठे थे।
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