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Ranchi : शुक्रवार की सुबह सीसीएल मुख्यालय परिसर का माहौल आम दिनों से बिल्कुल जुदा था। दफ्तर की फाइलों, बैठकों और औपचारिक कामकाज के बीच परिसर में 200 से अधिक बच्चों की खिलखिलाहट गूंज रही थी। मौका था सतर्कता जागरूकता सप्ताह के तहत आयोजित रचनात्मक प्रतियोगिताओं का, जहां सीसीएल कर्मियों के बच्चों ने अपनी कला, कल्पना और शब्दों के जरिए यह साबित कर दिया कि ईमानदारी कोई भारी-भरकम शब्द नहीं, बल्कि जीवन जीने का सबसे सहज तरीका है।
कोरे कागजों पर उकेरा भ्रष्टाचार मुक्त समाज का सपना
चित्रकला प्रतियोगिता के दौरान बच्चों ने सफेद ड्राइंग शीट पर जब रंग भरने शुरू किए, तो उनकी सोच देखकर वहां मौजूद अभिभावक और अधिकारी हैरान रह गए। किसी बच्चे ने तराजू बनाकर एक पलड़े में सच और दूसरे में समृद्धि को दिखाया, तो किसी ने अपनी कूची से एक ऐसा हरा-भरा समाज रचा जहां रिश्वत और बेईमानी के लिए कोई जगह नहीं थी। इस साल की थीम “सत्यनिष्ठा से समृद्धि” को बच्चों ने अपने मासूम नजरिए से बेहद संजीदगी के साथ कैनवास पर उतारा।
कविताओं और निबंधों में गूंजे नैतिकता के बोल
चित्रकला के साथ-साथ कविता पाठ और निबंध लेखन में भी नन्हें प्रतिभागियों का जोश देखते ही बन रहा था। मंच पर जब बच्चों ने अपनी तुकांत पंक्तियों में सच बोलने की ताकत और देश के प्रति जिम्मेदारी का अहसास कराया, तो पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा। वहीं निबंध प्रतियोगिता में बच्चों ने तर्क और उदाहरणों के जरिए साफ लिखा कि तरक्की की राह हमेशा सच्चाई से होकर ही गुजरती है। शब्दों की यह सादगी हर किसी के दिल को छू गई।
बचपन की यह सीख कल का मजबूत भारत गढ़ेगी
कार्यक्रम का असली उद्देश्य बच्चों को केवल प्रतिस्पर्धा में शामिल करना नहीं, बल्कि उनके मन में बचपन से ही नैतिक मूल्यों और पारदर्शिता के बीज बोना था। आयोजकों ने रेखांकित किया कि आने वाला कल इन्हीं बच्चों का है। अगर आज से ही इनमें सही और गलत का फर्क समझने और सच्चाई पर टिके रहने का संस्कार पड़ेगा, तभी एक जवाबदेह और मजबूत समाज की नींव रखी जा सकेगी। दिनभर चले इस आयोजन ने यह संदेश साफ कर दिया कि जब शुरुआत सही संस्कारों से होती है, तो एक पारदर्शी और समृद्ध राष्ट्र का सपना सच होने में देर नहीं लगती।
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