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नई दिल्ली। बैंक कर्मचारी संघों की दो दिवसीय देशव्यापी हड़ताल के दूसरे दिन मंगलवार को कोई खास असर नहीं दिखा। ज्यादातर बैंक कर्मचारी अपने काम पर लौट आए हैं। मंगलवार को यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस की नौ में से सिर्फ लेफ्ट समर्थित तीन बैंक यूनियंस ही हड़ताल पर हैं। इसलिए अधिकांश बैंक कर्मचारियों ने खुद को हड़ताल से अलग कर लिया है।
वॉयस ऑफ बैंकिंग के फाउंडर अशवनी राणा ने हिन्दुस्थान समाचार को बताया कि हडताल के दूसरे दिन बैंक कर्मचारियों को समझ में आ गया है कि वह कब तक वामपंथियों की राजनीतिक हड़ताल का हिस्सा बनते रहेंगे। इस वजह से अधिकांश बैंक कर्मचारियों ने हड़ताल से अलग कर बैंक ज्वाइन कर लिया है। उन्होंने कहा कि हड़ताल के पहले कोई खास असर नहीं देखने को मिला।
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राणा ने बताया कि दरअसल बैंक कर्मचारियों के यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस की 9 यूनियंस में से केवल लेफ्ट समर्थित तीन बैंक यूनियंस, अखिल भारतीय बैंक कर्मचारी संघ (एआईबीईए), बैंक एम्पलाइज फेडरेशन ऑफ इंडिया (बीईएफआई) और ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन (एआईबीओए) ने वाम समर्थित केंद्रीय श्रम संगठनों के समर्थन में 28 तथा 29 मार्च की हड़ताल में भाग लिया है। बाकी 6 यूनियंस ने अपने को हड़ताल से अलग रखा है।
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उल्लेखनीय है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निजीकरण और बैंक कानून संशोधन विधेयक 2021 के विरोध में अखिल भारतीय बैंक कर्मचारी संघ (एआईबीईए) ने दो दिवसीय हड़ताल का आह्वान किया है। हड़ताल के पहले दिन पूर्वी भारत में इसका ज्यादा असर दिखा। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की तमाम शाखाएं बंद रहीं। हालांकि, अन्य क्षेत्रों में बैंकों की शाखाओं में अधिकारियों की मौजूदगी के बावजूद कर्मचारियों के अनुपस्थित होने से कामकाज प्रभावित हुआ।

