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Ranchi : झारखंड हाईकोर्ट ने बहुचर्चित चारा घोटाले के देवघर ट्रेजरी से 89 लाख रुपये की फर्जी निकासी मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने इस घोटाले में दोषी बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव, बेक जूलियस और सुधीर कुमार भट्टाचार्य की सजा बढ़ाने संबंधी सीबीआई की अपील को स्वीकार कर लिया है। मुख्य न्यायाधीश रंगोन मुखोपाध्याय और न्यायमूर्ति अंबुज नाथ की खंडपीठ ने बुधवार को यह फैसला सुनाया। सीबीआई की ओर से अधिवक्ता दीपक भारती ने अदालत में दलील दी थी कि निचली अदालत ने इन दोषियों को सजा देते समय उनके अपराध की गंभीरता को कम करके आंका।
सीबीआई ने दलील दी कि विशेष सीबीआई न्यायाधीश की अदालत ने चारा घोटाले के केस नंबर RC 64A/96 में लोक लेखा समिति के तत्कालीन अध्यक्ष जगदीश शर्मा को सात साल की सजा और 10 लाख रुपये जुर्माने की सजा दी थी, जबकि लालू यादव समेत अन्य दोषियों को सिर्फ साढ़े तीन साल की सजा सुनाई गई थी। यह सजा कम है क्योंकि अदालत ने खुद यह स्वीकार किया था कि घोटाले को लालू प्रसाद के संरक्षण में अंजाम दिया गया।
सीबीआई ने कुल छह दोषियों की सजा बढ़ाने की अपील की थी, जिनमें लालू यादव, बेक जूलियस, सुधीर कुमार भट्टाचार्य, आरके राणा, फूलचंद सिंह और महेश प्रसाद के नाम शामिल थे। लेकिन इनमें से आरके राणा, फूलचंद सिंह और महेश प्रसाद की मृत्यु हो चुकी है, इसलिए कोर्ट ने बाकी तीन आरोपियों के खिलाफ ही सुनवाई की।
बता दें कि देवघर ट्रेजरी से 89 लाख रुपये की अवैध निकासी के इस मामले में सीबीआई ने 1996 में प्राथमिकी दर्ज की थी। लंबे समय चली सुनवाई के बाद 23 दिसंबर 2017 को विशेष सीबीआई अदालत ने दोषी करार दिया था और 6 जनवरी 2018 को सजा सुनाई गई थी। अब हाईकोर्ट के फैसले के बाद इन तीनों दोषियों की सजा बढ़ सकती है। सीबीआई इस फैसले को अपनी एक बड़ी कानूनी जीत मान रही है।
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