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Patna : राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग में गंभीर लापरवाही और भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। निलंबित उप समाहर्ता भूमि सुधार पश्चिमी धीरेंद्र कुमार के कार्यकाल में जमीन विवादों से जुड़े 2000 से अधिक मामले दबा दिए गए, जिनमें से 1500 मामलों की सुनवाई तक नहीं हुई और नोटिस भी जारी नहीं किए गए।
यह खुलासा वर्तमान डीसीएलआर स्नेहा कुमारी के निरीक्षण में हुआ। जांच में पाया गया कि धीरेंद्र कुमार ने 92 मामलों को ऑनलाइन निपटाए जाने की बात तो दर्ज की, लेकिन उनके आदेश की प्रति ऑनलाइन दर्ज नहीं की गई। इसके अलावा, 380 मामलों को आदेश के लिए लंबित रखा गया लेकिन किसी का भी निपटारा नहीं हुआ।
नियमों की खुलेआम अवहेलना
हैरानी की बात यह है कि निलंबन के दिन धीरेंद्र ने मोतीपुर के कई मामलों में बिना सुनवाई दर्जनभर आदेश जारी कर दिए, जो पूरी तरह नियमविरुद्ध हैं। स्नेहा कुमारी ने इन सभी 92 मामलों की पुनः सुनवाई और 380 मामलों की नई तारीख तय करने का निर्देश दिया है।
मुख्य सचिव के आदेशों की अनदेखी
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के जनता दरबार में जमीन विवादों की बढ़ती शिकायतों के बाद मुख्य सचिव त्रिपुरारी शरण ने सख्ती के आदेश दिए थे, लेकिन धीरेंद्र कुमार ने इनका पालन नहीं किया। मई 2025 में उन्हें निलंबित कर दिया गया था और उनका मुख्यालय तिरहुत प्रमंडल आयुक्त कार्यालय में तय किया गया है।
और भी खुलासे
निरीक्षण में यह भी पाया गया कि कार्यालय की रोकड़ बही का 6 अगस्त 2024 से सत्यापन नहीं हुआ था। इसके चलते कोर्ट परिसर में नोटिस बोर्ड और तालाबंदी के निर्देश दिए गए हैं। विभाग का मानना है कि धीरेंद्र की लापरवाही के कारण मुजफ्फरपुर में जमीन विवादों का निपटारा रुका रहा, जिससे अपराध बढ़ने की आशंका बनी।
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