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Patna : बिहार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा है कि राज्य सरकार कृषि की पढ़ाई कर रहे छात्रों को सिर्फ नौकरी ढूंढने वाला यानी ‘जॉब सीकर’ नहीं, बल्कि दूसरों को काम देने वाला ‘जॉब प्रोवाइडर’ बनाएगी। कृषि विभाग ने इसके लिए एक खास योजना तैयार की है, जिसके तहत बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर (भागलपुर) के सभी नौ कॉलेजों में ASSIST मॉडल लागू किया जाएगा।
कृषि मंत्री ने बताया कि युवाओं को आत्मनिर्भर उद्यमी बनाने के लिए सरकार ने 4.80 करोड़ रुपए के बजट की मंजूरी दी है। यह राशि अगले चार सालों (वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2029-30) में खर्च की जाएगी। पहले साल के काम के लिए सरकार ने 90 लाख रुपए जारी भी कर दिए हैं।
किताबी ज्ञान के साथ मिलेगा प्रैक्टिकल अनुभव
कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने जोर देकर कहा कि कृषि क्षेत्र में काम और कमाई की कोई कमी नहीं है, बस जरूरत इस बात की है कि छात्रों को क्लासरूम की पढ़ाई के साथ-साथ फील्ड का तजुर्बा भी मिले। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) की सिफारिशों के तहत तैयार इस मॉडल का मकसद छात्रों को सीधे एग्री-बिजनेस, सफल स्टार्टअप और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ना है। जब छात्र जमीनी स्तर पर काम देखेंगे और समझेंगे, तभी वे खुद का काम शुरू करने का हौसला जुटा पाएंगे।
हर सेमेस्टर में मनेगा ‘असिस्ट वीक‘
इस पूरी योजना को व्यावहारिक रूप देने के लिए एक खास कैलेंडर बनाया गया है। स्नातक की पढ़ाई के दौरान पहले से लेकर चौथे सेमेस्टर तक, मिड-टर्म परीक्षा खत्म होते ही उसके अगले हफ्ते को ‘असिस्ट वीक’ के रूप में मनाया जाएगा। इस हफ्ते में छात्रों को उद्योगों का दौरा कराया जाएगा, सफल स्टार्टअप संचालकों से उनकी सीधी बातचीत कराई जाएगी और गांवों में जाकर खेती से जुड़ी गतिविधियों को नजदीक से समझने का मौका मिलेगा। इससे छात्रों को समझ आएगा कि बाजार में किस उत्पाद की मांग है और उसका कारोबार कैसे खड़ा किया जाता है।
इन क्षेत्रों में तैयार होंगे नए उद्यमी
प्रशिक्षण के दौरान उन आधुनिक क्षेत्रों पर खास जोर रहेगा, जहां कम लागत में बड़ा व्यवसाय शुरू किया जा सकता है। छात्रों को बायोफर्टिलाइजर, बायोपेस्टीसाइड, टिशू कल्चर, वर्मीकम्पोस्ट, मशरूम उत्पादन, सजावटी मछली पालन, शहद उत्पादन और फूड प्रोसेसिंग का प्रैक्टिकल प्रशिक्षण दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि इन क्षेत्रों में हुनर हासिल करने के बाद युवा अपनी कंपनी या यूनिट शुरू करेंगे और राज्य के अन्य बेरोजगार युवाओं को भी काम देकर सही मायने में ‘जॉब प्रोवाइडर’ की भूमिका निभाएंगे।
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