अपनी मनपसंद भाषा में पढ़ें :
Patna : बिहार की सड़कों पर मनमानी करने वाले वाहन चालकों की अब खैर नहीं है। राज्य सरकार ने सड़क हादसों पर लगाम लगाने और ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के लिए सख्त रुख अपना लिया है। नियमों की अनदेखी करने वाले 15,680 वाहन चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित या रद्द कर दिए गए हैं। विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह ने परिवहन विभाग को साफ निर्देश दिया है कि लाइसेंस निलंबन की जितनी भी सिफारिशें मिली हैं, उन पर 15 दिनों के भीतर हर हाल में एक्शन लें। साथ ही यह चेतावनी भी दी गई है कि अगर किसी का लाइसेंस रद्द या निलंबित है और वह फिर भी सड़क पर गाड़ी दौड़ाते हुए पकड़ा गया, तो उसकी गाड़ी तुरंत जब्त कर ली जाएगी।
गुरुवार को बिहार सड़क सुरक्षा परिषद की लीड एजेंसी की कार्यपालक समिति की अहम बैठक हुई। इसमें सड़क सुरक्षा के बुनियादी ढांचे, स्कूली बसों की चेकिंग, हाईवे पेट्रोलिंग और हादसों के बाद घायलों को मिलने वाले इलाज की गहन समीक्षा की गई।
सड़कों पर जेब्रा क्रॉसिंग और अंडरपास, हाईवे पर तैनात हुए 58 पेट्रोलिंग वाहन
पैदल चलने वालों और गाड़ियों की सुरक्षित आवाजाही के लिए राज्य भर में बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य चल रहा है। पथ निर्माण विभाग और एनएचएआई की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में अब तक 5,124 से ज्यादा जेब्रा क्रॉसिंग बना दी गई हैं या उनकी दोबारा पेंटिंग की गई है। इसके अलावा 1,000 से अधिक नई क्रॉसिंग बनाने की योजना है। पैदल चलने वालों के लिए 170 सबवे (PUP) बनकर तैयार हो चुके हैं और 474 व्हीकल अंडरपास का काम भी पूरा हो चुका है।
यातायात पर पैनी नजर रखने के लिए राज्य के 29 जिलों में 307 जगहों पर नए सीसीटीवी कैमरे और ट्रैफिक लाइटें लगाई जा रही हैं। इसके लिए नगर विकास विभाग को जगहों की सूची सौंप दी गई है। राष्ट्रीय राजमार्गों पर हादसों को रोकने और तुरंत मदद पहुंचाने के लिए दूसरे चरण में 58 नई हाईवे पेट्रोल गाड़ियां खरीदी गई हैं, जिन्हें सड़कों पर तैनात कर दिया गया है।
स्कूल बसों में सीट क्षमता लिखना जरूरी, बीएचयू मॉडल पर सुधरेगी ट्रॉमा केयर
स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी बैठक में कड़े निर्देश जारी किए गए। राज्य की कुल 10,162 स्कूल बसों में से 8,547 बसों में बैठने की तय क्षमता लिख दी गई है। विकास आयुक्त ने शिक्षा विभाग को निर्देश दिया कि बची हुई बसों में भी यह काम तुरंत पूरा कराया जाए। स्कूलों और कॉलेजों में जागरूकता फैलाने के लिए 983 रोड सेफ्टी एंबेसडर और 253 नोडल अफसर बनाए गए हैं। चालकों की ट्रेनिंग पर भी जोर दिया जा रहा है और अब तक करीब 8 हजार ड्राइवरों को प्रशिक्षित किया जा चुका है।
हादसे के शिकार लोगों की जान बचाने के लिए राज्य के ट्रॉमा केयर सिस्टम को मजबूत किया जा रहा है। इसके लिए बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के ट्रॉमा केयर मॉडल का अध्ययन किया गया है और उसी तर्ज पर बिहार के सरकारी अस्पतालों में सुविधाएं बढ़ाई जाएंगी। साथ ही निजी अस्पतालों को भी अपने यहां ट्रॉमा बेड तैयार रखने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, ताकि दुर्घटना के तुरंत बाद घायलों को इलाज मिल सके।
इसे भी पढ़ें : आसमान से होगी बाढ़ की निगरानी : सीएम सम्राट बोले- सिर्फ लैब तक न रहे तकनीक



