Close Menu
News SamvadNews Samvad
  • होम
  • देश
  • दुनिया
  • झारखंड
  • बिहार
  • बिजनेस
  • स्पोर्ट्स
  • राशिफल
Facebook X (Twitter) Instagram
Tuesday, 15 September, 2026 • 08:11 pm
  • About Us
  • Contact Us
  • Privacy Policy
  • AdSense Policy
  • Terms and Conditions
Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest Vimeo
News SamvadNews Samvad
  • HOME
  • INDIA
  • WORLD
  • JHARKHAND
    • RANCHI
  • BIHAR
  • UP
  • SPORTS
  • HOROSCOPE
  • CAREER
  • HEALTH
  • MORE…
News SamvadNews Samvad
  • होम
  • देश
  • दुनिया
  • झारखंड
  • बिहार
  • बिजनेस
  • स्पोर्ट्स
  • राशिफल
Home » चारदीवारी से बाजार तक पहुंची बिहार की महिलाएं, बदली लाखों परिवारों की तकदीर
बिहार

चारदीवारी से बाजार तक पहुंची बिहार की महिलाएं, बदली लाखों परिवारों की तकदीर

September 15, 2026No Comments4 Mins Read
Share Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Telegram WhatsApp Email
Follow Us
Google News Flipboard Facebook X (Twitter)
बिहार
Share
Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Telegram WhatsApp Email
WhatsApp Group जुड़ने के लिए क्लिक करें 👉 Join Now

अपनी मनपसंद भाषा में पढ़ें :

Patna : कभी घर की चारदीवारी से बाहर निकलने में झिझकने वाली बिहार की महिलाएं अब गांव की अर्थव्यवस्था की नई कहानी लिख रही हैं। किसी के हाथ में सिलाई मशीन है, तो कोई दूध का कारोबार संभाल रही है। कोई खेत में आधुनिक तरीके से खेती कर रही है, तो कोई अस्पताल में जीविका दीदी की रसोई चलाकर परिवार का खर्च उठा रही है। यह बदलाव अचानक नहीं आया। इसके पीछे वर्षों की छोटी-छोटी बचत, आपसी भरोसा और स्वयं सहायता समूहों से जुड़ने की कहानी है। करीब दो दशक पहले जब जीविका की शुरुआत हुई थी, तब शायद बहुत कम लोगों ने सोचा होगा कि गांव की महिलाओं के छोटे-छोटे समूह एक दिन इतनी बड़ी आर्थिक ताकत बन जाएंगे। वर्ष 2006 में शुरू हुई जीविका परियोजना आज बिहार के गांव-गांव तक पहुंच चुकी है। महिलाएं स्वयं सहायता समूहों में जुड़कर पहले थोड़ी-थोड़ी बचत करती हैं। फिर जरूरत के समय इसी समूह से ऋण लेकर अपना काम शुरू करती हैं। धीरे-धीरे यही छोटी शुरुआत परिवार की आमदनी का बड़ा सहारा बन जाती है।

बचत से बैंकिंग तक, महिलाओं के हाथ में आया पैसा

आज बिहार में 11.88 लाख स्वयं सहायता समूह, 73,517 ग्राम संगठन और 1,684 संकुल स्तरीय संघ काम कर रहे हैं। इन समूहों में महिलाओं की साप्ताहिक बचत 2,693 करोड़ रुपए तक पहुंच गई है। करीब 13,590 करोड़ रुपए की सामुदायिक निवेश निधि भी उपलब्ध कराई गई है। इस पैसे ने महिलाओं को दूसरों से उधार मांगने के बजाय अपने पैरों पर खड़े होने का मौका दिया है। गांवों में बैंकिंग व्यवस्था को महिलाओं तक पहुंचाने में बैंक सखियों ने भी बड़ी भूमिका निभाई है। राज्य में 6,749 बैंक सखियां काम कर रही हैं। इनके जरिए हर साल 20 हजार करोड़ रुपए से अधिक का डिजिटल वित्तीय लेन-देन हो रहा है। यानी अब बैंक सिर्फ शहरों की इमारतों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि गांव की महिलाओं के घर के करीब पहुंच गए हैं।

auto

खेत से बाजार तक महिलाओं की बढ़ी भागीदारी

जीविका से जुड़ने के बाद महिलाओं का काम अब सिर्फ घर या खेत तक सीमित नहीं है। राज्य में 46.89 लाख से अधिक महिला किसान आधुनिक और मौसम के अनुकूल खेती से जुड़ी हैं। 61 महिला नेतृत्व वाली किसान उत्पादक कंपनियां महिलाओं को सामूहिक उत्पादन और बाजार से जोड़ रही हैं। दूध के कारोबार में भी महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है। कौशिकी मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी हर दिन 35 हजार से अधिक महिला दुग्ध उत्पादकों से करीब 80 हजार लीटर दूध एकत्र कर रही है। इससे गांव की महिलाओं को अपने दूध का संगठित बाजार मिला है और आमदनी का भरोसा भी बढ़ा है।

रसोई, सिलाई और छोटे कारोबार से बड़े बदलाव

महिलाओं ने अपनी मेहनत से रोजगार के नए रास्ते भी बनाए हैं। सरकारी अस्पतालों और अन्य संस्थानों में 330 जीविका दीदी की रसोई चल रही हैं। यहां महिलाएं खुद काम करती हैं और परिवार की आय में योगदान देती हैं। दूसरी ओर, जीविका दीदी का सिलाई घर 50 लाख से अधिक आंगनबाड़ी बच्चों के लिए पोशाक तैयार कर चुका है। सबसे गरीब परिवारों को भी इस सफर में पीछे नहीं छोड़ा गया है। सतत जीविकोपार्जन योजना के तहत 2 लाख से अधिक अत्यंत गरीब परिवारों को आजीविका से जोड़ा गया है। इनमें करीब 1.75 लाख परिवार धीरे-धीरे गरीबी से बाहर निकलने में सफल हुए हैं।

मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना ने भी इस बदलाव को आगे बढ़ाया है। राज्य की 1.68 करोड़ से अधिक महिलाओं को 10-10 हजार रुपए की शुरुआती सहायता दी गई है। कारोबार के आधार पर आगे 2.10 लाख रुपए तक की सहायता देने की दिशा में काम किया जा रहा है। योजना की दूसरी किस्त के तहत 27 अगस्त को 1 लाख लाभुकों को 20 हजार रुपए प्रति महिला की दर से राशि दी गई। महिलाओं की बढ़ती आर्थिक भागीदारी का असर आंकड़ों में भी दिख रहा है। वर्ष 2017-18 में बिहार में महिला श्रमबल भागीदारी करीब 3 से 4 प्रतिशत थी, जो 2024-25 में बढ़कर करीब 20 प्रतिशत हो गई। ग्रामीण क्षेत्रों में यह 33.5 प्रतिशत तक पहुंच गई है।

इसे भी पढ़ें : बाढ़ की मार पर ‘सम्राट’ मरहम, एक क्लिक पर पहुंच गई 579 करोड़ की राहत

Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Telegram WhatsApp Email
Previous Articleपुलिस को देखते ही भागे उचक्के, लोडेड पिस्टल के साथ दबोचे गये
Next Article मंत्री नीतीश का बड़ा ऐलान- बिहार में बसेंगी स्मार्ट टाउनशिप, हुआ करार

Related Posts

Headlines

टूटती उम्मीदों और उफनती लहरों के बीच लिखी जीत की कहानी, नवाजे गये 9 जांबाज इंजीनियर

September 15, 2026
Headlines

मंत्री नीतीश का बड़ा ऐलान- बिहार में बसेंगी स्मार्ट टाउनशिप, हुआ करार

September 15, 2026
Headlines

पुलिस को देखते ही भागे उचक्के, लोडेड पिस्टल के साथ दबोचे गये

September 15, 2026
Advertisement
auto
  • Facebook
  • Twitter
  • Telegram
  • WhatsApp

Latest Post

टूटती उम्मीदों और उफनती लहरों के बीच लिखी जीत की कहानी, नवाजे गये 9 जांबाज इंजीनियर

September 15, 2026

मंत्री नीतीश का बड़ा ऐलान- बिहार में बसेंगी स्मार्ट टाउनशिप, हुआ करार

September 15, 2026

चारदीवारी से बाजार तक पहुंची बिहार की महिलाएं, बदली लाखों परिवारों की तकदीर

September 15, 2026

पुलिस को देखते ही भागे उचक्के, लोडेड पिस्टल के साथ दबोचे गये

September 15, 2026

फाइलों की धूल छंटी तो जगी उम्मीद, डीसी मेघा की जिद से दौड़ पड़ा बाईपास प्रोजेक्ट

September 15, 2026
© 2026 News Samvad. Designed by Launching Press.

Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.