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Pakur (Jaydev Kumar) : पाकुड़ शहर की सडक़ों पर दिन-रात रेंगती गाड़ियों का शोर, उड़ती धूल और घंटों लगा रहने वाला जाम जल्द ही बीती बात बनने वाला है। सालों से फाइल में सिमटी पड़ी शहरकोल-पियादापुर पाकुड़ बाईपास निर्माण परियोजना अचानक से नई रफ्तार पकड़ चुकी है। इस बहुप्रतीक्षित प्रोजेक्ट में जान फूंकने का पूरा श्रेय जाता है पाकुड़ की युवा और संजीदा उपायुक्त मेघा भारद्वाज को। जिले की कमान संभालने के बाद से ही उन्होंने आम जनता से जुड़े बुनियादी मुद्दों पर ध्यान देना शुरू किया और बाईपास की फाइल पर अटकी धूल को साफ कर इसे फिर से धरातल पर उतारने की ठान ली।
रैयतों को मिलेगा वाजिब हक, निगरानी के लिए खुद बनाई खास कमेटी
किसी भी बड़े प्रोजेक्ट में जमीन अधिग्रहित करना और लोगों को मुआवजा बांटना सबसे पेचीदा काम माना जाता है। डीसी मेघा भारद्वाज ने इस प्रशासनिक उलझन को अपनी सूझबूझ से आसान बना दिया। उन्होंने जिला भू-अर्जन पदाधिकारी को सख्त निर्देश दिए कि जमीन देने वाले रैयतों को नियमों के मुताबिक बिना किसी परेशानी के तुरंत मुआवजा मुहैया कराया जाए। इतना ही नहीं, प्रोजेक्ट में कहीं कोई ढिलाई या देरी न हो, इसके लिए उन्होंने अफसरों की एक विशेष कमेटी भी गठित कर दी है। यह कमेटी हर दिन काम की प्रगति पर नजर रखेगी ताकि बाईपास का निर्माण तय समय सीमा में पूरा हो सके।

बदलेगी पाकुड़ की तस्वीर, विकास और आर्थिक तरक्की को मिलेगी नई रफ्तार
डीसी भारद्वाज के इस प्रशासनिक फैसले की पूरे जिले में काफी सराहना हो रही है। जब यह बाईपास बनकर तैयार हो जाएगा तो भारी वाहन शहर के बाहर से ही निकल जाएंगे, जिससे शहर की सडक़ें सुरक्षित होंगी और हादसों में भारी कमी आएगी। पाकुड़ के व्यापारी हों या रोजाना सफर करने वाले आम लोग, हर कोई इस बात से बेहद खुश है कि एक संवेदनशील प्रशासनिक अधिकारी की वजह से सालों पुराना सपना आखिरकार पूरा होने जा रहा है। पाकुड़ की यह नई सडक़ न केवल ट्रैफिक को आसान बनाएगी, बल्कि जिले के व्यापार और विकास को भी एक नई दिशा देगी।
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