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Home » कोर्ट की तारीख पर गवाहों की दौड़ खत्म, बिहार में अब डिजिटल गवाही
बिहार

कोर्ट की तारीख पर गवाहों की दौड़ खत्म, बिहार में अब डिजिटल गवाही

July 17, 2026No Comments4 Mins Read
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Patna : बिहार की अदालतों में अब मुकदमों की सुनवाई का तरीका बदलने जा रहा है। गवाही देने के लिए गवाहों को बार-बार अदालत आने की जरूरत नहीं होगी। जेल में बंद कैदियों को भी हर बार पेशी के लिए कोर्ट लाने की जरूरत कम होगी। पुलिस अधिकारी और फोरेंसिक एक्सपर्ट भी सुरक्षित डिजिटल माध्यम से अदालत की कार्यवाही में शामिल हो सकेंगे। नए आपराधिक कानूनों को जमीन पर प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए बिहार में ‘न्यायश्रुति’ प्रणाली शुरू की जा रही है। इस व्यवस्था के पायलट प्रोजेक्ट का पहला मॉक ट्रायल सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है।

एक ही ट्रायल में कोर्ट, जेल, अभियोजन और फोरेंसिक लैब जुड़े

इस ट्रायल में पटना के जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश-23 गौरव कुमार की अदालत में चल रहे एक मामले को चुना गया था। ट्रायल के दौरान आपराधिक न्याय व्यवस्था से जुड़े अलग-अलग संस्थानों को एक साथ डिजिटल माध्यम से जोड़ा गया। पटना का अभियोजन कार्यालय, बेऊर स्थित आदर्श केंद्रीय कारा और पटना स्थित विधि विज्ञान प्रयोगशाला इस पूरी प्रक्रिया का हिस्सा बने। यानी कोर्ट में चल रही कार्यवाही से जुड़े सभी जरूरी पक्ष एक ही डिजिटल व्यवस्था के जरिए आपस में जुड़े रहे। पूरे मॉक ट्रायल का संचालन एनआईसी के स्तर से किया गया। ट्रायल के सफल होने के बाद अब इस व्यवस्था को आगे बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी गई है।

गवाही के लिए आने-जाने में लगने वाला समय बचेगा

अभी किसी आपराधिक मामले में गवाह की गवाही के लिए उसे अदालत में मौजूद रहना पड़ता है। पुलिस अधिकारी को भी अपनी ड्यूटी से समय निकालकर कोर्ट आना पड़ता है। जेल में बंद किसी आरोपी को पेशी के लिए लाने में पुलिस बल और सुरक्षा व्यवस्था लगती है। फोरेंसिक विशेषज्ञों को भी जांच से जुड़ी जानकारी देने के लिए अदालत में उपस्थित होना पड़ता है। कई बार इन वजहों से सुनवाई टल जाती है और मामला आगे नहीं बढ़ पाता। ‘न्यायश्रुति’ प्रणाली में ऐसी परेशानियों को कम करने की कोशिश की जा रही है। जरूरत पड़ने पर संबंधित व्यक्ति सुरक्षित और प्रमाणित डिजिटल माध्यम से अदालत की कार्यवाही में शामिल हो सकेगा।

लंबित मुकदमों के निपटारे में तेजी की उम्मीद

इस व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा लंबित आपराधिक मामलों की सुनवाई में हो सकता है। गवाह के नहीं आने, पुलिस अधिकारी के व्यस्त होने या जेल से कैदी को कोर्ट तक लाने में देरी जैसी वजहों से सुनवाई टलने की संभावना कम होगी। इससे अदालत का समय बचेगा और सरकारी संसाधनों का भी बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा। आम लोगों को भी अपने मामलों में न्याय के लिए लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

नए आपराधिक कानूनों को लागू करने की दिशा में बड़ा कदम

बिहार सरकार नए आपराधिक कानूनों को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए न्यायिक प्रक्रिया में तकनीक का इस्तेमाल बढ़ा रही है। गृह विभाग के सचिव कुंदन कुमार के नेतृत्व में इस दिशा में लगातार अनुश्रवण किया जा रहा है। ‘न्यायश्रुति’ प्रणाली इसी प्रयास का हिस्सा है। इसका मकसद अदालत की कार्यवाही को आसान बनाना और उन कारणों को कम करना है, जिनकी वजह से कई बार मुकदमों की सुनवाई आगे नहीं बढ़ पाती।

अब दूसरे जिलों की अदालतों में भी लागू होगी व्यवस्था

पहले पायलट प्रोजेक्ट के सफल होने के बाद अब ‘न्यायश्रुति’ प्रणाली को चरणबद्ध तरीके से राज्य की अन्य जिला अदालतों में लागू करने की तैयारी है। सरकार की कोशिश है कि अदालत, पुलिस, जेल, अभियोजन और फोरेंसिक जांच से जुड़ी सभी व्यवस्थाओं के बीच बेहतर तालमेल बने। अगर यह व्यवस्था पूरी तरह लागू होती है तो बिहार में आपराधिक मामलों की सुनवाई को अधिक तेज और सुविधाजनक बनाने में मदद मिल सकती है। यानी आने वाले दिनों में गवाही के लिए हर व्यक्ति को कोर्ट की तारीख पर पहुंचना जरूरी नहीं होगा। सुरक्षित डिजिटल माध्यम से अदालत तक पहुंचकर भी न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा बना जा सकेगा।

इसे भी पढ़ें : CM सम्राट का बड़ा विजन, AI के सहारे लिखी जाएगी विकसित बिहार की नयी कहानी

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