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Pakur (Jaydev Kumar) : पाकुड़ के रविंद्र भवन टाउन हॉल में कुछ ऐसा नज़ारा देखने को मिला, जिसने प्रशासनिक प्रयासों और सामाजिक सरोकारों की नई तस्वीर पेश की। दीप प्रज्वलन से शुरू हुआ विधिक सेवा सशक्तिकरण शिविर सिर्फ एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह आम जनता तक न्याय और योजनाओं का लाभ पहुंचाने की जीवंत मिसाल था। शिविर में झारखंड हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति संजय प्रसाद, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश शेषनाथ सिंह, DC मनीष कुमार और अन्य अधिकारियों की मौजूदगी ने इसे और भी खास बना दिया।
संवेदनशील अधिकारी बदलते हैं जिले की तस्वीर : न्यायमूर्ति संजय प्रसाद
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए न्यायमूर्ति संजय प्रसाद ने कहा कि किसी भी जिले के विकास की असली कुंजी वहाँ के प्रशासन और जनता की जागरूकता होती है। उन्होंने उपायुक्त मनीष कुमार की कार्यशैली की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने वृद्धों, महिलाओं और बच्चों के लिए जो कदम उठाए हैं, वे समाज में एक सकारात्मक बदलाव की नींव रख रहे हैं। वृद्धाश्रम में बुजुर्गों के बीच बैठना, आश्रय गृह में बच्चों की शिक्षा और देखभाल की व्यवस्था करना – ये केवल योजनाएँ नहीं, बल्कि संवेदनशील प्रशासन की पहचान हैं।

पाकुड़ को हर पैमाने पर ऊंचाई पर ले जाना है : DC मनीष कुमार
शिविर में डीसी मनीष कुमार ने जब उपलब्धियों का ब्यौरा रखा तो साफ दिखा कि पाकुड़ अब सिर्फ नक्शे पर भौगोलिक ऊंचाई पर ही नहीं, बल्कि विकास के पैमाने पर भी राज्य में अग्रणी बनने की ओर बढ़ रहा है।
- शिक्षा में छलांग: 2024 की बोर्ड परीक्षा में पाकुड़ 22वें से सीधे दूसरे स्थान पर पहुंचा।
- स्वास्थ्य में सुधार: कालाजार, टीबी और कुष्ठ जैसी बीमारियों के खिलाफ अभियान चलाया गया, यहाँ तक कि अधिकारी खुद टीबी मरीजों को गोद ले रहे हैं।
- योजनाओं की सफलता: मनरेगा में पहला स्थान, पीएम आवास और जनमन में उत्कृष्ट प्रदर्शन, पंचायत असेसमेंट इंडेक्स में टॉप-50 में शामिल होना, ये सब जिला प्रशासन की मेहनत और टीमवर्क का नतीजा हैं।
उन्होंने साफ कहा – “हमारा लक्ष्य सिर्फ योजनाओं को लागू करना नहीं, बल्कि हर नागरिक की जिंदगी को बेहतर बनाना है।”
57 करोड़ की परिसंपत्तियों का वितरण, मुस्कुराते चेहरों की भीड़
शिविर का सबसे भावुक पल तब था जब विभिन्न योजनाओं के लाभुकों के हाथों में स्वीकृति पत्र, चेक और परिसंपत्तियाँ पहुँचीं। कुल 57 करोड़ 15 लाख 88 हजार 270 रुपए की राशि का वितरण हुआ।
- आवास योजनाएँ: 1400 से अधिक परिवारों को घर का सपना पूरा करने के लिए 26 करोड़ की स्वीकृति पत्र मिली।
- छात्र-छात्राएँ: 3000 बच्चों के चेहरों पर नई साइकिल पाकर चमक आ गई। छात्रवृत्ति योजनाओं से हजारों परिवारों को राहत मिली।
- सखी मंडल दीदी: 1500 से ज्यादा स्व-सहायता समूह की महिलाओं को 7.67 करोड़ की सामुदायिक निवेश निधि दी गई, जिससे आजीविका की नई राह खुली।
- किसान और श्रमिक: ट्रैक्टर की चाभी, पम्पसेट और औजार पाकर किसानों और मजदूरों ने भविष्य की नई उम्मीद देखी।
- मनरेगा और ग्राम योजना: 285 लाभुकों के बीच 11 करोड़ से अधिक राशि वितरित हुई, जिससे गाँवों में हरियाली और रोजगार का रास्ता साफ होगा।
‘आदि कर्मयोगी अभियान’ : सेवा की नई परिभाषा
कार्यक्रम में एक और अहम क्षण तब आया, जब DC मनीष कुमार ने सभी को ‘आदि कर्मयोगी अभियान’ की शपथ दिलाई।
उन्होंने कहा –
- हम सब नशा और बाल विवाह जैसी कुरीतियों से दूर रहें।
- महिलाओं को सम्मान और पोषण का अधिकार दिलाएं।
- अपने गाँव-समाज को स्वच्छ और स्वस्थ बनाने में योगदान दें।
यह शपथ केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव की ओर एक ठोस कदम थी। शिविर सिर्फ परिसंपत्तियों का वितरण स्थल नहीं रहा, बल्कि वहां मौजूद हर व्यक्ति ने महसूस किया कि योजनाओं का लाभ सीधे जनता तक पहुंचाना ही अच्छे शासन की पहचान है। बच्चों की आंखों में उत्साह था, महिलाओं के चेहरे पर आत्मनिर्भरता की मुस्कान और बुजुर्गों की आंखों में उम्मीद की चमक।

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