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Palamu : बरसात की भीगी रात में, लोटवा गांव की कच्ची झोपड़ी से एक मां का दिल रोते-रोते टूट गया। पिंकी देवी की गोद से उनका एक महीने का लाल छिनकर पड़ोसी गांव चला गया। कीमत तय हुई… 50 हजार रुपये। यह सौदा किसी खुशी से नहीं, बल्कि भूख, गरीबी और बीमारी की आग में झुलसते परिवार की विवशता का नतीजा था। रामचंद्र राम और उनकी पत्नी पिंकी देवी के पांच छोटे-छोटे बच्चे हैं। पेट भरने के लिए वे मजदूरी पर निर्भर हैं, लेकिन लगातार बारिश ने मजदूरी छीन ली। घर के नाम पर टूटा-फूटा छप्पर, राशन कार्ड और आधार कार्ड न होने से सरकारी मदद भी नहीं मिल पा रही थी। ऐसे हालात में जब पिंकी देवी ने बेटे को जन्म दिया तो खुशी से ज्यादा चिंता घर कर गई। प्रसव के बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई, इलाज के पैसे नहीं थे और चूल्हा ठंडा पड़ा था। आखिरकार, मजबूरी ने मां से वह फैसला करवा दिया जिसे कोई भी माता-पिता कभी नहीं लेना चाहते… अपने ही जिगर के टुकड़े मासूम बेटे को बेच देना। पिंकी देवी ने अपने जिगर के टुकड़े को दलाल के जरिये लातेहार के एक निःशंतान दंपति को बेच दिया। इसके एवज में उन्हें 50 हजार रुपये मिले।
मीडिया में खबर आते ही सीएम हेमंत सोरेन ने लिया संज्ञान
जैसे ही यह हृदयविदारक खबर मीडिया में सामने आई, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने तुरंत संज्ञान लिया। उन्होंने पलामू जिला प्रशासन को आदेश दिया कि बच्चे को सुरक्षित वापस लाया जाए। आदेश मिलते ही पुलिस-प्रशासन हरकत में आई और रविवार को लातेहार जिले के बहेड़ाटाड गांव से मासूम को बरामद कर माता-पिता की गोद में लौटा दिया गया। जब पिंकी देवी ने फिर से अपने बेटे को सीने से लगाया, गांव की हवा में एक साथ आंसू और सुकून घुल गया।
.@DC_Palamu उक्त मामले की जांच कर पीड़ित परिवार को हरसंभव मदद पहुंचाने के साथ-साथ नवजात बच्चे को भी उसके माता-पिता को सौंपते हुए सूचित करें। https://t.co/5odkUDcvWY
— Hemant Soren (@HemantSorenJMM) September 6, 2025
मदद का सिलसिला भी शुरू
मामला प्रशासन तक पहुंचने के बाद मदद का सिलसिला भी शुरू हुआ। परिवार को तत्काल 20 किलो अनाज दिया गया। बच्चों का नामांकन आवासीय विद्यालय में कराया जा रहा है, तीन बच्चों को स्पॉन्सरशिप योजना के तहत 4000 रुपये प्रतिमाह मिलेंगे। सभी का आधार कार्ड बनाया जाएगा और रहने के लिए आवास देने की पहल भी की जाएगी। सीएम हेमंत सोरेन ने कहा, “यह घटना बेहद दर्दनाक है। कोई भी गरीब परिवार ऐसी त्रासदी का शिकार न हो, इसके लिए सरकार हर कदम उठाएगी।”
घटना याद कर सिहर उठते हैं लोग
लोटवा गांव के लोग अब भी इस घटना को याद कर सिहर जाते हैं। सभी कहते हैं कि गरीबी इंसान से उसका सबसे बड़ा सुख… बच्चों की परवरिश… छीन लेती है। लेकिन अब उम्मीद है कि प्रशासन की मदद से रामचंद्र और पिंकी का परिवार दोबारा ऐसी मजबूरी में नहीं फंसेगा।
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