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Pakur (Jaydev Kumar) : पाकुड़ की उस रात को शायद ही कोई भूल पाएगा। अक्टूबर की आख़िरी शाम थी, आसमान में बिजली कौंध रही थी, हवा में ठंडक घुल चुकी थी और लखनपुर गांव की गलियों में बारिश की रफ्तार बढ़ती जा रही थी। लोग अपने घरों में दुबके थे। इसी सन्नाटे को चीरती हुई एक गोली की आवाज आई और उसी के साथ खत्म हो गई 55 वर्षीय पत्थर कारोबारी मकबुल शेख की जिंदगी।
भीगती सड़कों पर मौत की पटकथा
रात करीब साढ़े आठ बजे मकबुल शेख चाय पीकर अपने घर लौट रहे थे। सड़क पर बारिश की बौछारें लगातार गिर रही थीं, चारों तरफ अंधेरा पसरा था। उसी अंधेरे में कोई छिपा बैठा था, जिसके दिल में नफरत का जहर कई सालों से पल रहा था। एक झटके में गोली चली और सबकुछ बदल गया। गांव के लोग घरों से बाहर नहीं निकल सके, बस बारिश में गूंजती आवाज़ ने सबको दहला दिया।
मुखिया चुनाव की अदावत बनी खून की वजह
पुलिस की जांच में जो कहानी सामने आई, उसने रिश्तों, राजनीति और नफरत के कई पहलुओं की परत को खोलकर रख दिया। दनारुल शेख…. वही शख्स, जो कभी मकबुल का हमसाया था, अब उसका दुश्मन बन गया था। साल 2023 में मुखिया चुनाव के दौरान हुई कहासुनी झगड़े में बदली, और बदले ने जन्म लिया इस हत्याकांड का। दनारुल और उसका बेटा ललन शेख उर्फ सादिरुल महीनों से मकबुल को रास्ते से हटाने की योजना बना रहे थे। और आखिरकार उन्होंने तय कर लिया… “बारिश की रात सही वक्त है, कोई देखेगा भी नहीं।”
मूसलाधार बारिश में दबी गोलियों की गूंज
उस रात, जब बाकी लोग खिड़कियों से बारिश देख रहे थे, ललन और दनारुल अपनी योजना पर उतरे। मकबुल शेख जैसे ही मोड़ पर पहुंचे, पीछे से चली गोली ने सबकुछ खत्म कर दिया। बारिश की बूंदों के बीच मकबुल की सांसें थम गईं और हत्यारे भाग निकले।
बारिश में भी नहीं थमी पुलिस की रफ्तार
कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। जिले की पुलिस कप्तान निधि द्विवेदी के नेतृत्व में गठित SIT ने उसी रात अभियान छेड़ दिया। बारिश से भीगी सड़कों पर, बिजली की चमक के बीच पुलिस टीम ने लगातार ताबड़तोड़ छापेमारी की। आठ घंटे के भीतर बरतल्ला पानीपोखर के पास ललन शेख को पिस्टल और पांच गोलियों के साथ दबोच लिया गया। उसकी निशानदेही पर दनारुल भी गिरफ्तार हुआ। बारिश में भीगे दस्तावेज़ों के बीच पुलिस ने वह कामयाबी हासिल की, जो अक्सर दिनों लगाती है।
परिवार का बिखर गया सुकून
लखनपुर गांव में मकबुल शेख के घर अब सन्नाटा पसरा है। उनकी पत्नी की आंखें अब भी दरवाज़े पर टिकी हैं, जैसे वो लौट आएंगे।
बेटे अब तक यकीन नहीं कर पा रहे कि पिता की मौत की वजह वही पुराने चुनावी झगड़े थे, जिन पर सबने कहा था… “अब मामला खत्म हो गया।” पर सच यह है कि नफरत का बीज कभी खत्म नहीं हुआ, बस बारिश की उस रात फूटा।
मुखिया चुनाव में शुरू हुई अदावत का नतीजा है मकबुल शेख का मर्डर, पाकुड़ SP निधि द्विवेदी क्या बता गयीं… देखें pic.twitter.com/KtaNRhRggT
— News Samvad (@newssamvaad) November 1, 2025
सराहनीय रही इनकी भूमिका
इस कांड को सुलझाने और हत्या के संदेही गुनहगारों को दबोचने में मुफ्फसिल थानेदार गौरव कुमार, हिरणपुर थानेदार रंजन कुमार सिंह, मालपहाड़ी ओपी प्रभारी राहुल गुप्ता, एसआई संजीव कुमार झा, अजय कुमा उपाध्याय, अनंत साहा, अरविंद मंडल और एएसआई उमर फारुक की भूमिका सराहनीय रही।
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