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Bokaro : बोकारो के पुलिस कप्तान मनोज स्वर्गियारी उस वक्त चौंक गये, जब आज यानी सोमवार को भोरे-भोर एक महिला नक्सली उनके घर पहुंच गयी। करीब 22 साल की इस महिला नक्सली का नाम सुनीता मुर्मू है। उसने कांपते हुए आवाज में SP मनोज स्वर्गियारी से बस इतना कहा कि… साहेब, एक सप्ताह से भूखी-प्यासी इधर-उधर भटक रही हूं। जंगल की जिंदगी से ऊब चुकी हूं। मैं सरेंडर कर नयी जिंदगी शुरू करना चाहती है। SP को सुनीता ने बताया कि वह बीते 21 अप्रैल को बोकारो के लुगु पहाड़ पर हुए मुठभेड़ में शामिल थी। गोलियों की बौछार के बीच किसी तरह अपनी जान बचाकर भाग निकली थी। तब से लेकर आज तक जंगलों में छिपती-छिपाती भटकती रही। फिर गोमिया से ट्रेन पकड़ी और चंद्रपुरा होते हुए आपके दरवाजे तक पहुंची हूं। SP मनोज स्वर्गियारी ने उसे अपने दफ्तर लाकर सभी औपचारिकताएं पूरी कर सरेंडर प्रक्रिया पूरी कराई और भोजन भी कराया।
सुनीता मुर्मू ने सरेंडर करने के दरम्यान बताया कि वह भाकपा माओवादी संगठन की सक्रिय सदस्य थी। दुमका जिले के अमरपानी गांव की रहने वाली सुनीता ने कबूल किया कि वह गिरिडीह जेल में पहले तीन साल तक न्यायिक हिरासत में रह चुकी है। हाल ही में वह लुगु पहाड़ में सुरक्षाबलों के साथ हुई मुठभेड़ में भी दस्ते का हिस्सा थी। झारखंड सरकार की आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति और लगातार बढ़ते पुलिस दबाव से प्रभावित होकर उसने हिंसा का रास्ता छोड़ने का निर्णय लिया।
मीडिया से बातचीत में सुनीता ने अपनी आपबीती सुनाई। उसने बताया कि वह गरीब परिवार से आती है और उसके परिवार में माता-पिता और एक भाई हैं। वर्ष 2017 में नीलू नामक एक जानकार महिला ने उसे सांस्कृतिक कार्यक्रम में भाग लेने के बहाने जंगलों में बुलाया और फिर जबरन माओवादी संगठन में शामिल कर दिया। उसे कैंप में संत्री ड्यूटी, खाना बनाना और संगठन की विचारधारा का प्रचार करने का कार्य सौंपा गया। धीरे-धीरे वह संगठन के हर छोटे-बड़े कार्यों में भाग लेने लगी।
बोकारो पुलिस कप्तान मनोज स्वर्गियारी ने बताया कि लुगु पहाड़ की मुठभेड़ में 6-7 नक्सली बचकर भागे थे, जिनमें से सुनीता एक है। अन्य नक्सलियों की तलाश जारी है। एसपी ने आशा जताई कि अगर वे भी अपने भविष्य और परिवार के प्रति चिंतित होंगे तो जल्द ही आत्मसमर्पण कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार की सरेंडर नीति के तहत सुनीता को सुरक्षा प्रदान की जाएगी और उसे ओपन जेल में रखा जाएगा ताकि वह समाज की मुख्यधारा से जुड़ सके।
बता दें कि सुनीता मुर्मू के खिलाफ महुआटांड थाना और खुखरा थाना में यूएपीए, आर्म्स एक्ट और विस्फोटक अधिनियम के तहत कई गंभीर मामले दर्ज हैं। वह पहले गिरिडीह जेल में तीन वर्षों तक न्यायिक हिरासत में रही है। मुठभेड़ में शामिल रहने की पुष्टि उसके स्वयं के बयान से हुई है, जिसे पुलिस ने रिकॉर्ड किया है। फिलहाल सुनीता को कानूनी प्रक्रिया के तहत पुनर्वास योजना में शामिल किया जा रहा है।
लुगु पहाड़ के एनकाउंटर में बच निकली महिला नक्सली सुनीता मुर्मू भूख-प्यास से तड़पती पहुंची बोकारो SP मनोज स्वर्गियारी के घर, क्या बोली… देखें pic.twitter.com/oXrE9TFwPk
— News Samvad (@newssamvaad) April 28, 2025
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