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Ranchi : सिनेमा की चमक अक्सर पर्दे पर दिखने वाले कलाकारों तक ही सीमित नजर आती है, लेकिन एक फिल्म को पर्दे तक पहुंचाने के पीछे सैकड़ों लोगों की मेहनत होती है। कहानी लिखने से लेकर कैमरा संभालने, साउंड रिकॉर्ड करने, एडिटिंग करने और ओटीटी प्लेटफॉर्म तक फिल्म पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया अपने आप में एक बड़ा संसार है। अब झारखंड के युवाओं को इसी दुनिया को करीब से समझने का मौका मिलने जा रहा है। आगामी 9 अगस्त को रांची के मोराबादी मैदान में आयोजित होने वाले आदिवासी महोत्सव 2026 में झारखंड फिल्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (JFFDCL) विशेष फिल्म फेस्टिवल और मास्टर क्लास का आयोजन करेगा। यह सिर्फ फिल्मों का प्रदर्शन भर नहीं होगा, बल्कि उन छात्रों के लिए सीखने का मंच बनेगा जो भविष्य में फिल्म, मीडिया और डिजिटल कंटेंट की दुनिया में अपनी पहचान बनाना चाहते हैं।
किताबों से बाहर, सीधे फिल्म विशेषज्ञों से सीखने का मौका
कॉलेज और विश्वविद्यालयों में मीडिया और पत्रकारिता की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को अक्सर सैद्धांतिक ज्ञान मिलता है, लेकिन फिल्म निर्माण की वास्तविक प्रक्रिया को समझने के अवसर कम मिलते हैं। इस बार उन्हें देश के प्रतिष्ठित सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट (SRFTI), कोलकाता के विशेषज्ञों और प्राध्यापकों से सीधे सीखने का मौका मिलेगा।
झारखंड फिल्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन ने विनोबा भावे विश्वविद्यालय, हजारीबाग के कुलपति को पत्र भेजकर कार्यक्रम में भागीदारी का आग्रह किया है। विश्वविद्यालय से जनसंचार, पत्रकारिता, मीडिया स्टडीज, फिल्म स्टडीज, परफॉर्मिंग आर्ट्स, विजुअल कम्युनिकेशन और संबंधित विषयों के कम से कम 50 विद्यार्थियों को कार्यक्रम में भेजने का अनुरोध किया गया है। माना जा रहा है कि अन्य संस्थानों के विद्यार्थियों की भी इसमें भागीदारी रहेगी।

आदिवासी समाज की कहानियां बड़े पर्दे पर दिखेंगी
फिल्म फेस्टिवल की सबसे खास बात यह होगी कि यहां सिर्फ मनोरंजन के लिए फिल्में नहीं दिखाई जाएंगी। आदिवासी जीवन, उनकी परंपराओं, संस्कृति, संघर्ष, सामाजिक सरोकारों और प्रकृति से जुड़े रिश्तों को पर्दे पर उतारने वाली चुनिंदा फिल्मों का प्रदर्शन किया जाएगा। यह आयोजन युवाओं को यह समझाने की कोशिश करेगा कि सिनेमा समाज की संस्कृति और इतिहास को सहेजने का भी मजबूत माध्यम है। खासकर झारखंड जैसे राज्य में, जहां आदिवासी संस्कृति की समृद्ध विरासत है, वहां ऐसी फिल्मों के जरिए नई पीढ़ी अपनी जड़ों को नए नजरिए से देख सकेगी।
कैमरा, स्क्रिप्ट, एडिटिंग से लेकर ओटीटी तक की पूरी जानकारी
मास्टर क्लास का विषय रखा गया है “फिल्म मेकिंग एंड करियर ऑपर्च्युनिटीज इन द फिल्म इंडस्ट्री”। इसमें विशेषज्ञ विद्यार्थियों को बताएंगे कि एक फिल्म की शुरुआत कहानी से होती है और फिर वह पटकथा, निर्देशन, सिनेमैटोग्राफी, साउंड डिजाइन, एडिटिंग और पोस्ट प्रोडक्शन के कई चरणों से गुजरते हुए दर्शकों तक पहुंचती है। सिर्फ फिल्मों तक ही नहीं, बल्कि तेजी से बढ़ रही ओटीटी और डिजिटल कंटेंट इंडस्ट्री में रोजगार के अवसरों पर भी विस्तार से चर्चा होगी। विशेषज्ञ यह भी बताएंगे कि इस क्षेत्र में उच्च शिक्षा के क्या विकल्प हैं और किस तरह युवा अपने हुनर को पेशे में बदल सकते हैं।
झारखंड में फिल्म शिक्षा को नई दिशा देने की कोशिश
झारखंड में फिल्म निर्माण को बढ़ावा देने की दिशा में पिछले कुछ समय से लगातार प्रयास हो रहे हैं। इसी कड़ी में 22 जुलाई को सीएम हेमंत सोरेन की मौजूदगी में झारखंड राज्य फिल्म विकास निगम और सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट, कोलकाता के बीच स्थानीय सूचना भवन में फिल्म इंस्टीट्यूट की स्थापना को लेकर एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए थे। अब आदिवासी महोत्सव के दौरान आयोजित यह फिल्म फेस्टिवल और मास्टर क्लास उसी पहल का अगला कदम माना जा रहा है। इसका मकसद सिर्फ फिल्में दिखाना नहीं, बल्कि झारखंड के युवाओं में छिपी रचनात्मक प्रतिभा को सही दिशा देना और उन्हें राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों से जोड़ना है।
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