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Patna : बिहार के बच्चों को अच्छी पढ़ाई के लिए कोटा या दूसरे राज्यों का रुख न करना पड़े, इसके लिए राज्य में ही बेहतर शैक्षणिक व्यवस्था तैयार की जाएगी। सीएम सम्राट चौधरी ने रविवार को शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार की आगे की रणनीति बताते हुए कहा कि बिहार का भविष्य यहां के युवा हैं और आने वाली पीढ़ी ही राज्य का नवनिर्माण करेगी। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसी शिक्षा व्यवस्था बनाना चाहती है, जहां बच्चों को बेहतर पढ़ाई के लिए दूसरे राज्यों में जाने की मजबूरी कम हो। जिन परिवारों के पास संसाधन हैं, वे अपने बच्चों को अच्छे स्कूलों में पढ़ा लेते हैं, लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को बेहतर शिक्षा देना सरकार की जिम्मेदारी है।
शिक्षा विभाग की ओर से अधिवेशन भवन में आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला सह चिंतन शिविर का मुख्यमंत्री ने दीप प्रज्ज्वलित कर उद्घाटन किया। इसी दौरान उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर कई महत्वपूर्ण फैसलों और योजनाओं की जानकारी दी।
कोटा जाने वाले बच्चों की संख्या से समझें चुनौती
सीएम सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार से बड़ी संख्या में बच्चे उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए दूसरे राज्यों में जाते हैं। खासकर कोटा जाने वाले छात्रों की संख्या काफी है। उन्होंने स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना का जिक्र करते हुए कहा कि इसके तहत करीब 18 हजार करोड़ रुपये दिए जा रहे हैं। इस राशि का बड़ा हिस्सा दूसरे राज्यों में जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोटा में लाखों बच्चे पढ़ने जाते हैं और वहां पढ़ाने वाले शिक्षकों में भी बड़ी संख्या बिहार के लोगों की है। ऐसे में सवाल यह है कि जब बिहार के बच्चे और शिक्षक दोनों बाहर जाकर बेहतर व्यवस्था से जुड़ रहे हैं तो वैसी व्यवस्था बिहार में ही क्यों न तैयार की जाए। सरकार अब इसी दिशा में काम करना चाहती है।

हर स्कूल को बेहतर बनाने के लिए बनेगी राज्य स्तरीय समिति
सीएम सम्राट चौधरी ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सिर्फ कुछ चुनिंदा स्कूलों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। राज्य के हर स्कूल में पढ़ाई का स्तर बेहतर हो, इसके लिए राज्य स्तरीय समिति का गठन किया गया है। यह समिति शिक्षा व्यवस्था में जरूरी सुधार और उसकी कार्ययोजना पर काम करेगी। कोशिश होगी कि हर विद्यालय बच्चों के लिए बेहतर शिक्षा का केंद्र बने और उनके सीखने के स्तर में लगातार सुधार हो।
परीक्षा में गड़बड़ी पर सख्ती, AI से बदलेगा मूल्यांकन
बिहार में परीक्षाओं को लेकर भी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि परीक्षा व्यवस्था को सुचारु, पारदर्शी, निष्पक्ष और आधुनिक बनाने के लिए राज्य स्तरीय परीक्षा सुधार समिति गठित की गई है। यह समिति बोर्ड परीक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं के साथ कक्षा स्तर पर होने वाले मूल्यांकन की भी समीक्षा करेगी। परीक्षा में तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के इस्तेमाल पर भी सुझाव दिए जाएंगे।
सीएम ने कहा कि बच्चों का मूल्यांकन सिर्फ इस आधार पर नहीं होना चाहिए कि उन्होंने कितना याद किया। यह भी देखा जाना जरूरी है कि बच्चे किसी विषय को कितना समझते हैं और उसका विश्लेषण किस तरह करते हैं। इसी को ध्यान में रखकर परीक्षा व्यवस्था में बदलाव की तैयारी है।
मुख्यमंत्री से लेकर विधायक तक छात्रों से करेंगे सीधा संवाद
अब छात्रों की समस्याएं सिर्फ स्कूल और कॉलेज के स्तर तक सीमित नहीं रहेंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि मंत्री, सांसद, विधायक और वरिष्ठ अधिकारी स्कूलों और कॉलेजों में जाकर छात्रों से सीधे बातचीत करेंगे। छात्रों से उनकी समस्याएं और सुझाव लिए जाएंगे। इन सुझावों को पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा, ताकि उन पर आगे कार्रवाई की जा सके।
सीएम सम्राट चौधरी ने कहा कि हर महीने मुख्यमंत्री स्तर पर छात्रों के लिए एक सहयोग शिविर आयोजित किया जाएगा। इसका उद्देश्य यह है कि बच्चों की समस्याओं को सीधे सुना जाए और उनके समाधान की कोशिश की जाए।

छात्रों के लिए अलग व्यवस्था, विभाग मिलकर बनाएंगे डायरेक्ट्रेट
सीएम सम्राट चौधरी ने कहा कि छात्रों के कल्याण से जुड़े कई काम अलग-अलग विभागों में होते हैं। ऐसे में काम के बेहतर समन्वय के लिए संबंधित विभागों में निदेशालय का गठन किया जाएगा। छात्रों से जुड़े विभाग मिलकर काम करेंगे और एक ऐसी व्यवस्था विकसित की जाएगी, जहां छात्रों की समस्याओं को लेकर बेहतर तालमेल हो और उनका समाधान तेजी से किया जा सके।
15 अगस्त से रात 11 बजे तक ऑनलाइन पढ़ाई
मुख्यमंत्री ने कहा कि 15 अगस्त से बच्चों के लिए ऑनलाइन पढ़ाई की ऐसी व्यवस्था शुरू की जा रही है, जिसके तहत वे रात 11 बजे तक पढ़ाई कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि आज के समय में तकनीक से दूरी बनाकर शिक्षा व्यवस्था को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता। AI और डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल बच्चों की पढ़ाई को बेहतर बनाने के लिए किया जाना चाहिए।
551 मॉडल स्कूल तैयार, लक्ष्य 1001 का
मुख्यमंत्री ने बताया कि बिहार में अब तक 551 मॉडल स्कूल तैयार किए जा चुके हैं। सरकार का लक्ष्य 1001 मॉडल स्कूल बनाने का है। उन्होंने कहा कि स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता के साथ अनुशासन पर भी ध्यान दिया जाएगा। शिक्षा व्यवस्था में किसी तरह की गड़बड़ी या अपराध को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

शिक्षा से जुड़े अपराधियों पर गुंडा एक्ट और CCA की कार्रवाई
सीएम सम्राट चौधरी ने चेतावनी दी कि शिक्षा व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। शिक्षा से जुड़े अपराधों में शामिल लोगों पर गुंडा एक्ट और सीसीए के तहत भी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में दोषियों को एक साल तक जेल में रखने का प्रावधान है। सरकार का साफ संदेश है कि परीक्षा और शिक्षा व्यवस्था में गड़बड़ी करने वालों के साथ सख्ती से निपटा जाएगा।
कंप्यूटर और अंग्रेजी के साथ संस्कृत-उर्दू पर भी जोर
सीएम ने कहा कि बिहार के सभी बच्चों को कंप्यूटर और अंग्रेजी की शिक्षा देने पर जोर दिया जाएगा। इसके साथ ही संस्कृत, उर्दू और बिहार की पांच भाषाओं के विकास के लिए भी काम किया जाएगा। उनका कहना था कि बच्चों को आधुनिक शिक्षा के साथ अपनी भाषा, संस्कृति और इतिहास की जानकारी भी होनी चाहिए। बिहार की संस्कृति और गौरवशाली इतिहास को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी युवा पीढ़ी की है।
युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ना सबसे बड़ी प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार के युवा और नौजवान सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता हैं। युवा पीढ़ी को सही शिक्षा और बेहतर अवसर मिलेंगे तो वे राज्य के विकास में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का मकसद सिर्फ स्कूलों की संख्या बढ़ाना नहीं है, बल्कि ऐसी शिक्षा व्यवस्था खड़ी करना है, जिससे बच्चों को अच्छी पढ़ाई, बेहतर मूल्यांकन और अपनी समस्याओं का समाधान एक ही व्यवस्था में मिल सके।

‘वंदे मातरम’ पुस्तक का भी लोकार्पण
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने ‘वंदे मातरम’ पुस्तक और ‘वंदे मातरम’ बुकलेट का लोकार्पण किया। शिक्षा विभाग के विशेष सचिव धर्मेंद्र कुमार ने मुख्यमंत्री को अंगवस्त्र, पुष्प गुच्छ और स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा का स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत किया।
चिंतन शिविर में शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, मुख्यमंत्री के सचिव संजय कुमार सिंह, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के अध्यक्ष डॉ. त्यागराजन एस.एम., जिलाधिकारी कुंदन कुमार समेत शिक्षा विभाग के कई अधिकारी मौजूद रहे।
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