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Patna : बिहार में परीक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अब स्कूल से लेकर विश्वविद्यालय और भर्ती परीक्षाओं तक पूरी व्यवस्था की नए सिरे से जांच होगी। परीक्षा में गड़बड़ी रोकने और अभ्यर्थियों को निष्पक्ष मौका देने के लिए 5 सदस्यीय विशेष समिति बनाई जाएगी। सामान्य प्रशासन विभाग ने समिति के गठन को लेकर अधिसूचना जारी कर दी है।
सरकार का जोर ऐसी परीक्षा व्यवस्था तैयार करने पर है, जिसमें पेपर लीक, नकल, परीक्षा केंद्र में हेराफेरी, उत्तर पुस्तिकाओं से छेड़छाड़ और रिजल्ट में गलत तरीके से बदलाव जैसी गड़बड़ियों की गुंजाइश कम हो। इसके साथ ही परीक्षा प्रक्रिया को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए तकनीक के इस्तेमाल की भी समीक्षा होगी।
सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट के जज की हो सकती है अध्यक्षता
विशेष समिति की अध्यक्षता के लिए सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश या हाईकोर्ट के सेवारत अथवा सेवानिवृत्त न्यायाधीश से अनुरोध किया जाएगा। समिति को गठन की तारीख से तीन महीने के भीतर अपनी अनुशंसाएं सरकार को सौंपनी होंगी।
समिति को बिहार की अलग-अलग तरह की परीक्षाओं की समीक्षा करने की जिम्मेदारी दी जाएगी। इसमें स्कूल की बोर्ड परीक्षा से लेकर विश्वविद्यालय, तकनीकी, प्रवेश, पात्रता और भर्ती परीक्षाएं तक शामिल रहेंगी।
स्कूल की परीक्षा से नौकरी की परीक्षा तक होगी जांच
समिति माध्यमिक और उच्च माध्यमिक परीक्षाओं की व्यवस्था देखेगी। विश्वविद्यालयों में होने वाली परीक्षाओं, व्यावसायिक और तकनीकी परीक्षाओं तथा प्रवेश और पात्रता परीक्षाओं की भी समीक्षा की जाएगी। सरकारी नौकरी के लिए होने वाली भर्ती और प्रतियोगी परीक्षाएं भी समिति के दायरे में रहेंगी।
परीक्षा कराने वाली संस्थाओं की जिम्मेदारी पर भी खास नजर होगी। बोर्ड, आयोग, विश्वविद्यालय, संबंधित विभाग, जिला प्रशासन और परीक्षा केंद्रों की भूमिका की समीक्षा की जाएगी। अगर परीक्षा प्रक्रिया के किसी चरण में लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारी तय करने की व्यवस्था पर भी सुझाव दिया जाएगा।
पेपर बनने से रिजल्ट तक हर कदम की होगी निगरानी
परीक्षा में सबसे अहम सवाल प्रश्न-पत्र की सुरक्षा का है। समिति प्रश्न-पत्र तैयार करने से लेकर उसके सुरक्षित भंडारण, परीक्षा केंद्र तक पहुंचाने और अभ्यर्थियों को उपलब्ध कराने तक पूरी प्रक्रिया की जांच करेगी।
प्रश्न-पत्र तैयार करने के लिए कई स्तरों पर जांच, मॉडरेशन और प्रशिक्षित पेपर सेटर की व्यवस्था पर सुझाव दिए जाएंगे। प्रश्न-पत्र के कठिनाई स्तर को एक समान रखने की व्यवस्था पर भी विचार होगा।
परीक्षा के बाद उत्तर पुस्तिकाओं की सुरक्षा भी जांच के दायरे में रहेगी। कॉपियों को जमा करने, सुरक्षित रखने, एक जगह से दूसरी जगह ले जाने, स्कैन करने, मूल्यांकन और रिजल्ट तैयार करने तक पूरी प्रक्रिया की समीक्षा की जाएगी।
बायोमेट्रिक और सीसीटीवी से परीक्षा केंद्रों की निगरानी
परीक्षा केंद्रों पर अभ्यर्थियों की पहचान पक्की करने के लिए बायोमेट्रिक सत्यापन की व्यवस्था पर विचार किया जाएगा। सीसीटीवी निगरानी, सुरक्षित परिवहन और परीक्षा सामग्री के सुरक्षित भंडारण को भी मजबूत करने की योजना है।
प्रश्न-पत्र और उत्तर पुस्तिकाओं की आवाजाही का रिकॉर्ड रखने के लिए चेन ऑफ कस्टडी व्यवस्था बनाने पर भी विचार किया जाएगा। यानी परीक्षा सामग्री कब, किसके पास और किस जगह रही, इसका पूरा रिकॉर्ड रखने की कोशिश होगी।
इसके अलावा डिजिटल ट्रांसमिशन, सुरक्षित पैकेजिंग, मल्टी फैक्टर प्रमाणीकरण, जियो टैगिंग और जियो फेंसिंग जैसे उपायों की जरूरत और उपयोगिता भी समिति देखेगी।
एआई और डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल की भी होगी समीक्षा
बिहार सरकार परीक्षा व्यवस्था में डिजिटल तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल की संभावनाएं भी तलाशेगी। डेटा एनालिटिक्स और साइबर सुरक्षा से जुड़े साधनों की मदद से परीक्षा प्रक्रिया को सुरक्षित बनाने के सुझाव दिए जा सकते हैं।
हालांकि तकनीक का इस्तेमाल करते समय ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों का भी ध्यान रखा जाएगा। ऐसे छात्र जो डिजिटल साधनों से ज्यादा जुड़े नहीं हैं, उन्हें किसी तरह का नुकसान न हो, इसके लिए समिति अलग से सुझाव देगी।
परीक्षा कैलेंडर से देरी रोकने की तैयारी
परीक्षा और रिजल्ट में देरी भी समिति की नजर में रहेगी। इसके लिए राज्य स्तर पर एक परीक्षा कैलेंडर बनाने की सिफारिश की जा सकती है। इसमें परीक्षा का विज्ञापन कब निकलेगा, आवेदन कब होंगे, एडमिट कार्ड कब जारी होगा, परीक्षा कब होगी, उत्तर कुंजी कब आएगी, आपत्तियों का निपटारा कब होगा और रिजल्ट कब जारी किया जाएगा, इसकी समय सीमा तय करने का सुझाव दिया जा सकता है। इससे अभ्यर्थियों को लंबे समय तक परीक्षा और रिजल्ट का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। नियुक्ति से जुड़ी परीक्षाओं में भी आगे की प्रक्रिया समय पर पूरी करने की कोशिश होगी।
शिकायतों का निपटारा भी तय समय में करने पर जोर
परीक्षा से जुड़ी शिकायतों को लेकर भी व्यवस्था मजबूत करने की तैयारी है। परीक्षा संचालन से लेकर प्रश्न-पत्र, मूल्यांकन और रिजल्ट तक किसी स्तर पर गड़बड़ी की शिकायत आती है तो उसके समाधान की स्पष्ट व्यवस्था बनाने की सिफारिश की जाएगी। समिति स्वतंत्र गुणवत्ता जांच और परीक्षा ऑडिट की व्यवस्था पर भी सुझाव देगी। इससे परीक्षा प्रक्रिया की समय-समय पर जांच हो सकेगी और कमियां सामने आने पर उन्हें दूर किया जा सकेगा।
जरूरत पड़ी तो नियम और कानून भी बदलेंगे
समिति मौजूदा कानून, परीक्षा नियम, संस्थागत नियम और गोपनीयता से जुड़े प्रावधानों का भी अध्ययन करेगी। नकल और दूसरे कदाचार से जुड़े नियमों के साथ डेटा और साइबर सुरक्षा की जरूरतों को भी देखा जाएगा। जहां जरूरी होगा, वहां कानून और नियमों में बदलाव की सिफारिश सरकार से की जा सकती है। समिति जरूरत के अनुसार परीक्षा बोर्ड, आयोग, विश्वविद्यालय, भर्ती एजेंसियों, जिला प्रशासन, तकनीकी संस्थानों और विशेषज्ञों से भी सलाह ले सकेगी।
सरकार की कोशिश है कि परीक्षा व्यवस्था में ऐसा भरोसा बने कि अभ्यर्थियों को अपनी मेहनत के आधार पर आगे बढ़ने का पूरा मौका मिले। परीक्षा केंद्र से लेकर रिजल्ट तक हर चरण में पारदर्शिता रहे और किसी भी तरह की गड़बड़ी सामने आने पर जिम्मेदारी तय की जा सके।
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