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Patna : बिहार में नदियों का पानी लगातार परेशानी बढ़ा रहा है। राज्य के 13 जिलों में बाढ़ की स्थिति बनी हुई है और करीब 27.01 लाख लोग इसकी चपेट में हैं। पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया और अरवल के 74 प्रखंडों की 423 ग्राम पंचायतें बाढ़ से प्रभावित हैं। सबसे ज्यादा चिंता गंगा के बढ़े जलस्तर को लेकर है। पटना के गांधीघाट, पंडारक, दानापुर और बांका घाट में गंगा पुराने हाई फ्लड लेवल से ऊपर बह रही है। हालांकि इन जगहों पर फिलहाल जलस्तर स्थिर बताया गया है।
गांधीघाट में 2016 का रिकॉर्ड टूटा
केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक 6 सितंबर की सुबह 6 बजे पटना के गांधीघाट में गंगा का जलस्तर 50.57 मीटर पहुंच गया। यहां पिछला हाई फ्लड लेवल 50.52 मीटर था, जो 21 अगस्त 2016 को दर्ज किया गया था। यानी इस बार गंगा 0.05 मीटर ऊपर बह रही है। फिलहाल गांधीघाट पर पानी की प्रवृत्ति स्थिर है। पंडारक में भी गंगा पुराने रिकॉर्ड से ऊपर है। यहां जलस्तर 43.92 मीटर दर्ज किया गया, जबकि पिछला हाई फ्लड लेवल 43.73 मीटर था। इस हिसाब से गंगा यहां पुराने रिकॉर्ड से 0.19 मीटर ऊपर बह रही है। दानापुर में जलस्तर 52.63 मीटर दर्ज हुआ है, जो 2021 में दर्ज 52.61 मीटर के पिछले हाई फ्लड लेवल से 0.02 मीटर ज्यादा है। बांका घाट में गंगा 49.47 मीटर पर है, जबकि पिछला हाई फ्लड लेवल 49.44 मीटर था।
गंडक, कोसी और बूढ़ी गंडक भी खतरे के निशान से ऊपर
सिर्फ गंगा ही नहीं, राज्य की कई दूसरी नदियां भी लोगों की परेशानी बढ़ा रही हैं। गंडक नदी डुमरिया घाट और हाजीपुर में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। कोसी नदी बलतारा और कुर्सेला में खतरे के निशान के ऊपर है। बूढ़ी गंडक ने भी खगड़िया में खतरे का निशान पार कर लिया है। गंगा दीघा, हाथीदह, भागलपुर, कहलगांव, बक्सर और मुंगेर में भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। पुनपुन नदी श्रीपालपुर में, बागमती बेनीबाद में और घाघरा नदी दरौली और गंगपुर में खतरे के निशान से ऊपर है। नदियों के जलस्तर पर प्रशासन लगातार नजर बनाए हुए है।
27 लाख से ज्यादा आबादी बाढ़ की चपेट में
नदियों में पानी बढ़ने के कारण राज्य के 13 जिलों में करीब 27.01 लाख लोगों पर बाढ़ का असर पड़ा है। प्रभावित इलाकों में लोगों के लिए राहत और बचाव का काम जारी है। कई जगहों पर लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए नावों का इस्तेमाल किया जा रहा है। आबादी को सुरक्षित निकालने और आवागमन बनाए रखने के लिए कुल 1,602 नावें चलाई जा रही हैं। बाढ़ प्रभावित परिवारों को बारिश और पानी से बचाने के लिए अब तक करीब 81,100 पॉलीथीन शीट बांटी गई हैं। इसके साथ ही करीब 19 हजार ड्राई राशन पैकेट भी लोगों तक पहुंचाए गए हैं। प्रशासन का दावा है कि जरूरत के मुताबिक राहत सामग्री और बचाव संसाधन प्रभावित इलाकों में भेजे जा रहे हैं।
226 सामुदायिक रसोई में रोज मिल रहा खाना
बाढ़ में घरों से बाहर रहने को मजबूर लोगों के लिए अलग-अलग जिलों में 226 सामुदायिक रसोई चलाई जा रही हैं। अब तक इन रसोइयों के जरिए करीब 3.75 लाख थाली भोजन कराया जा चुका है। इसके अलावा चार राहत शिविर भी चल रहे हैं। इन शिविरों में 2,505 बाढ़ प्रभावित लोगों के रहने, खाने और इलाज की व्यवस्था की गई है। राहत शिविरों में रह रहे लोगों को भोजन के साथ जरूरी चिकित्सा सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है। प्रशासन की प्राथमिकता बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालना और प्रभावित परिवारों तक जरूरी सामान पहुंचाना है।
गंडक और कोसी में पानी स्थिर, सोन में घट रहा जलस्तर
7 सितंबर की सुबह 10 बजे वाल्मीकिनगर बराज पर गंडक नदी का जलस्राव 1,21,500 क्यूसेक दर्ज किया गया। यहां पानी की प्रवृत्ति स्थिर है। इस साल गंडक में अब तक सबसे ज्यादा 2,24,000 क्यूसेक पानी 14 जुलाई को दर्ज किया गया था। वीरपुर बराज पर कोसी नदी का जलस्राव 1,98,150 क्यूसेक दर्ज किया गया है। यहां भी पानी की प्रवृत्ति स्थिर है। इस साल कोसी में सबसे ज्यादा 2,55,425 क्यूसेक जलस्राव 20 जुलाई को दर्ज किया गया था। इंद्रपुरी बराज पर सोन नदी का जलस्राव 1,33,134 क्यूसेक दर्ज हुआ है। यहां पानी घट रहा है। सोन में इस साल अब तक सबसे ज्यादा 5,63,654 क्यूसेक जलस्राव 2 सितंबर को दर्ज किया गया था। फिलहाल सोन का पानी घटने की प्रवृत्ति प्रशासन के लिए राहत की बात है।
NDRF और SDRF की 37 टीमें मैदान में
बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव के लिए एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें तैनात हैं। संभावित बाढ़ को देखते हुए एसडीआरएफ की 27 और एनडीआरएफ की 10 टीमें अलग-अलग जिलों में लगाई गई हैं। जरूरत पड़ने पर इन टीमों को प्रभावित इलाकों में भेजकर लोगों को सुरक्षित निकालने का काम किया जा रहा है।
जून से अगस्त तक कम बारिश, सितंबर में ज्यादा
इस साल बिहार में जून, जुलाई और अगस्त में सामान्य से कम बारिश हुई है। बिहार मौसम सेवा केंद्र के अनुसार जून में 103.8 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से 36 फीसदी कम थी। जुलाई में 227.2 मिलीमीटर बारिश हुई, जो सामान्य से 33 फीसदी कम रही। अगस्त में अब तक 190.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य से 29 फीसदी कम है। इसके उलट सितंबर में अब तक 75.9 मिलीमीटर बारिश हो चुकी है। यह सितंबर के सामान्य वर्षापात से 45 फीसदी ज्यादा है। 1 जून से 7 सितंबर तक राज्य में कुल 597.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य से 27 फीसदी कम है।
अगले दो दिन भी बारिश की संभावना
बिहार मौसम सेवा केंद्र ने अगले दो दिनों में राज्य के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई है। कुछ जगहों पर भारी बारिश भी हो सकती है। ऐसे में नदियों के जलस्तर को लेकर प्रशासन की नजर बनी हुई है। खासकर उन इलाकों में सतर्कता बढ़ाई गई है, जहां नदियां पहले ही खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। आपदा प्रबंधन विभाग के मुताबिक बाढ़ की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। नदियों के जलस्तर, बराजों से छोड़े जा रहे पानी और बारिश की स्थिति के आधार पर राहत और बचाव की तैयारियों को आगे बढ़ाया जा रहा है।
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