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Patna : पटना के बापू सभागार का दरवाजा जब गुरुवार को खुला, तो उसके अंदर अभ्यर्थियों की भीड़ के साथ दाखिल हुई अनगिनत वो रातें जो किताबों के पन्नों पर जागते हुए बीती थीं। उनके साथ थीं वो सुबहें जो चाय की चुस्की के साथ डर और उम्मीद के बीच शुरू हुई थीं और पिता के कंधों का वो बोझ जो सालों से इस आस में टिका था कि एक दिन उनका बच्चा अफसर बनेगा। 70वीं BPSC परीक्षा में सफलता हासिल करने वाले 2,027 अभ्यर्थियों के लिए बापू सभागार में आयोजित यह कार्यक्रम महज नियुक्ति पत्र बांटने का मंच नहीं था। यह उनके उस लंबे, अकेले और थका देने वाले सफर का पड़ाव था, जहां असफलता के तानों और उम्मीद की डोर के बीच संघर्ष की एक पूरी कहानी छिपी थी। मंच पर सीएम सम्राट चौधरी मुस्कुरा रहे थे और सामने सभागार में कोई आंखों के आंसू पोंछ रहा था, तो कोई बार-बार बगल में बैठे अपने बुजुर्ग पिता के चेहरे को निहार रहा था, मानो कह रहा हो कि देखिए बाबूजी, आपकी मेहनत रंग ले आई।

जब पन्नों का संघर्ष हकीकत की खुशी में बदला
बाहर से देखने वालों के लिए प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी सिर्फ कुछ किताबें पढ़ना होती है। लेकिन जो इस दौर से गुजरता है, वही जानता है कि जब दोस्त घूमने जा रहे होते हैं, तब आठ बाय दस के छोटे से कमरे में अकेले बंद रहना कैसा लगता है। हर महीने घर से आने वाले पैसों की चिंता, कोचिंग की फीस का गणित और रिश्तेदारों के चुभते सवाल कि और कितना समय लगेगा, इन सब के बीच अपनी हिम्मत को संभाले रखना सबसे बड़ी चुनौती होती है। इसीलिए, जब साएम ने एक-एक करके 2,027 युवाओं के हाथों में नियुक्ति पत्र सौंपा, तो वह उस भरोसे की जीत थी जो सालों पहले एक परिवार ने अपने बेटे या बेटी पर जताया था।
सीएम सम्राट चौधरी ने नवनियुक्त अधिकारियों को बधाई देते हुए कहा कि लोक सेवा का मतलब सिर्फ एक सुरक्षित सरकारी नौकरी पाना नहीं है। इसका असली मतलब लोगों की सेवा करना है। उन्होंने अधिकारियों को समझाया कि उनकी एक दस्तखत से समाज के सबसे आखिरी पायदान पर खड़े व्यक्ति की जिंदगी बदल सकती है। इसलिए काम करते समय ईमानदारी, समर्पण और संवेदनशीलता को सबसे ऊपर रखना होगा।

कुर्सी मंजिल नहीं, असली पहचान तो काम से मिलेगी
सीएम सम्राट चौधरी ने नए अधिकारियों को सीधे-सीधे समझाया कि सरकारी कुर्सी कोई मंजिल नहीं होती, बल्कि यह तो जिम्मेदारी की शुरुआत है। उन्होंने कहा कि उस कुर्सी पर बैठकर आम आदमी के लिए क्या किया जाता है, वही असली पहचान बनाएगा। जब कोई गरीब आदमी दफ्तर में किसी उम्मीद के साथ पहुंचता है, तो वह चाहता है कि उसकी समस्या सुनी जाए और उसका काम समय पर हो। नए अधिकारियों को इस उम्मीद को समझना होगा। सीएम सम्राट चौधरी ने सहयोग कार्यक्रम का जिक्र करते हुए जोर दिया कि लोगों की शिकायतों का समाधान 30 दिनों के भीतर तय किया गया है। अधिकारियों का रवैया ऐसा होना चाहिए कि आम आदमी को एक छोटे से काम के लिए दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।
समारोह के दौरान सीएम सम्राट चौधरी ने राज्य में रोजगार के मोर्चे पर हो रहे बदलावों पर भी बात की। उन्होंने बताया कि 2020 से 2025 के बीच राज्य में 12 लाख सरकारी नौकरियां और 50 लाख से अधिक रोजगार के अवसर पैदा किए गए। अब अगला लक्ष्य 2025 से 2030 के बीच 1 करोड़ युवाओं को नौकरी और रोजगार से जोड़ने का है। राज्य के बजट का दायरा अब बढ़कर 3.47 लाख करोड़ रुपये हो गया है। शहरी विकास के लिए 12 नई टाउनशिप विकसित की जा रही हैं। बिहार को स्टील हब बनाने के साथ-साथ सेमीकंडक्टर, न्यूक्लियर एनर्जी और फूड प्रोसेसिंग जैसे आधुनिक क्षेत्रों में काम किया जा रहा है। सड़कों में सुधार से अब पटना से बोधगया का सफर महज डेढ़ घंटे में पूरा हो जाता है।

एक गरिमामयी शाम और नए बिहार की जिम्मेदारी
इस ऐतिहासिक मौके पर सरकार और प्रशासन का लगभग पूरा अमला बापू सभागार में मौजूद था। उपमुख्यमंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव, ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार, राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल, शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी, समाज कल्याण मंत्री डॉ. श्वेता गुप्ता समेत कई मंत्रियों और विधायकों ने युवाओं का उत्साह बढ़ाया। वहीं प्रशासनिक अमले से मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, डीजीपी विनय कुमार, पटना के डीएम कुंदन कुमार और एसएसपी कार्तिकेय के. शर्मा जैसे आला अधिकारी भी नए अफसरों का स्वागत करने के लिए मौजूद रहे।
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