अपनी मनपसंद भाषा में पढ़ें :
Ranchi : दोपहर का वक्त था। प्रेमाश्रय की बच्चियां खेल और पढ़ाई में व्यस्त थीं। किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ ही मिनटों में उनके बीच राज्य के चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान खुद पहुंचने वाले हैं। जैसे ही वे परिसर में दाखिल हुए, बच्चियों के चेहरों पर हैरानी और उम्मीद दोनों साथ-साथ दिखीं। चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान ने एक-एक बच्ची के पास जाकर बात की। किसी ने स्कूल जाने की बात कही, किसी ने घर की याद बताई, तो कोई अभी भी अपने परिवार के बारे में पूरी तरह बता नहीं पा रही थी। जब एक छोटी बच्ची ने धीमे स्वर में कहा, “सर, मैं घर जाना चाहती हूं…,” तो वहां मौजूद सभी लोग कुछ पल के लिए शांत हो गए। यह सिर्फ उसकी नहीं, वहां की कई बच्चियों की साझा इच्छा थी।
घर लौटने की ख्वाहिश, लेकिन कागजी दीवारें
ज्यादातर बच्चियां अपने माता-पिता के पास वापस जाना चाहती हैं। कई के अभिभावक उन्हें लेने के लिए तैयार भी हैं, लेकिन कागजी प्रक्रियाओं की लंबी राह उन्हें रोके हुए है। चीप जस्टिस तरलोक सिंह चौहान ने इस पर चिंता जताई और पूछा कि आखिर जब बच्ची और अभिभावक दोनों तैयार हैं, तो उन्हें इतनी देर क्यों झेलनी पड़ती है।
सुविधाएं ठीक, लेकिन मन की उलझनें बनी हुई
भवन साफ-सुथरा है। खाना अच्छा है। मुख्य न्यायाधीश ने खुद भोजन चखकर संतोष जताया। लेकिन इन सारी व्यवस्थाओं के बीच भी बच्चियों के मन में सवाल, डर और उम्मीदें साथ चल रही हैं। यहां की सुपरिटेंडेंट व्यवस्था को संजीदगी से संभाल रही हैं, जिसकी प्रशंसा भी की गई। लेकिन बच्चों की आंतरिक उलझनों को दूर करने के लिए सिर्फ प्रबंधन काफी नहीं, बल्कि संवेदनशील प्रयास की जरूरत भी साफ दिखाई दी। वहीं, कुछ बच्चियां अपने घर, गांव या परिजनों का नाम तक ठीक से नहीं बता पाईं।
विशेष जरूरत वाली बच्चियों के लिए पहल
निरीक्षण के दौरान DLSA के सचिव रवि भास्कर ने बताया कि विशेष जरूरतों वाली बच्चियों के लिए राजधानी में कोई उपयुक्त केंद्र मौजूद नहीं है। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने तुरंत विस्तृत प्रतिवेदन मांगा, ताकि जल्द समाधान निकाला जा सके।
निरीक्षण के बाद चीफ जस्टिस ने दिये कई अहम निर्देश…
- महिला अधिकारियों की टीम बनाई जाएगी, जो हर बच्ची से अलग से बात कर उनकी जरूरतें समझेगी।
- DCPO को साफ कहा गया कि पुनर्वास में देरी न हो।
- जिन बच्चियों के अभिभावक खो गए हैं, उनके लिए फॉस्टर केयर जैसे विकल्पों पर तुरंत कार्रवाई हो।
- अनावश्यक कागज़ी प्रक्रियाएँ कम हों ताकि बच्चियों की घर वापसी तुरंत हो सके।
“मैं फिर आऊंगा…”
निरीक्षण खत्म होने से पहले मुख्य न्यायाधीश ने सभी बच्चियों को आश्वासन दिया कि वे जल्द ही फिर मिलने आएंगे। यह सुनकर वहां मौजूद बच्चियों को उम्मीदों का भरोसा मिला और उनके चेहरों पर जो हल्की मुस्कान आई, वह किसी भी व्यवस्था से अधिक महत्वपूर्ण थी। मौके पर रजिस्ट्रार जनरल, जुवेनाइल जस्टिस समिति के सदस्य, सामाजिक सुरक्षा निदेशक, DCPO और अन्य अधिकारी शामिल रहे।
इसे भी पढ़ें : थानेदार से लेकर DSP-SP तक को टास्क दे गये IG भास्कर… जानें क्या

