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Giridih : गिरिडीह की पावन धरती पर आयोजित ऐतिहासिक मारांग बुरू धोरोमगाड महासम्मेलन में सीएम हेमंत सोरेन शामिल हुए। इस मौके पर उन्होंने कहा कि मारांग बुरू सिर्फ एक पर्वत नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की अस्मिता, संस्कृति और स्वाभिमान का सबसे बड़ा प्रतीक है। कार्यक्रम में हिस्सा लेने के बाद सीएम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट साझा कर अपनी भावनाएं जाहिर कीं। उन्होंने मारांग बुरू को शत-शत नमन करते हुए सम्मेलन में पहुंचे लोगों का दिल से आभार जताया।
आदिवासी अस्मिता, संस्कृति और स्वाभिमान के प्रतीक मारांग बुरू को शत-शत नमन।
आज गिरिडीह की पावन धरती पर आयोजित ऐतिहासिक मारांग बुरू धोरोमगाड महासम्मेलन में शामिल हुआ। मारांग बुरू की पावन धरती पर विभिन्न राज्यों से आये सभी गणमान्य अतिथियों और लोगों का मैं हार्दिक स्वागत और आभार करता हूँ।
जोहार! जोहार मारांग बुरू!
https://t.co/Zzgw0ietNE— Hemant Soren (@HemantSorenJMM) November 5, 2026
सीएम ने लिखा कि गिरिडीह की इस पवित्र जमीन पर देश के अलग-अलग राज्यों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे हैं। महासम्मेलन में शामिल हुए सभी गणमान्य अतिथियों और समाज के लोगों का उन्होंने स्वागत किया। उन्होंने पारंपरिक अभिवादन के साथ जोहार और जोहार मारांग बुरू कहकर समाज के लोगों के प्रति अपना सम्मान प्रकट किया। कार्यक्रम को लेकर पूरे क्षेत्र में सुबह से ही भारी उत्साह देखा गया और पारंपरिक वेशभूषा में सजे लोगों ने अपनी संस्कृति की छटा बिखेरी।
इस महासम्मेलन में झारखंड के अलावा ओडिशा, पश्चिम बंगाल, असम और बिहार समेत कई राज्यों से आदिवासी समुदाय के प्रतिनिधि और आम लोग शामिल होने पहुंचे थे। सम्मेलन के दौरान समाज की सांस्कृतिक विरासत को बचाने, पारंपरिक रीति-रिवाजों के संरक्षण और धार्मिक धरोहरों की हिफाजत पर खुलकर चर्चा हुई। सीएम की मौजूदगी से कार्यक्रम में पहुंचे लोगों का हौसला और बढ़ गया। चारों तरफ पारंपरिक वाद्य यंत्रों की गूंज और जोहार के नारों के बीच यह पूरा आयोजन ऐतिहासिक बन गया।
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