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राज्य सरकार की ओर से आयोजित नव नियुक्त इंटर एवं स्नातक प्रशिक्षित सहायक आचार्यों और आंगनबाड़ी पर्यवेक्षिकाओं के नियुक्ति-पत्र वितरण समारोह में माहौल भावुक भी था और उम्मीदों से भरा हुआ भी। सीएम ने जब मंच से कहा कि “यह सिर्फ नौकरी नहीं, बल्कि झारखंड को बदलने का मिशन है”, तो सभागार तालियों से गूंज उठा।

गांवों तक पहुंचेगी सरकार की नई ताकत
समारोह में कक्षा 1 से 5 तक के लिए 160 और कक्षा 6 से 8 तक के लिए 156 सहायक आचार्यों को नियुक्ति पत्र दिए गए। इसके साथ ही 17 आंगनबाड़ी पर्यवेक्षिकाओं को भी नई जिम्मेदारी सौंपी गई। लेकिन कम के भाषण का केंद्र सिर्फ नियुक्ति नहीं था। उन्होंने बार-बार इस बात पर जोर दिया कि झारखंड के सुदूर गांवों तक विकास की असली रोशनी पहुंचाना अब इन नए शिक्षकों और कर्मियों की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि राज्य के कई इलाके आज भी ऐसे हैं, जहां संसाधनों की कमी है, बच्चों के सामने अवसर कम हैं और महिलाएं अभी भी मुख्यधारा से दूर हैं। ऐसे में सरकार चाहती है कि उसके कर्मचारी सिर्फ दफ्तरों तक सीमित न रहें, बल्कि समाज के बीच जाकर बदलाव की भूमिका निभाएं।
“बच्चे कच्ची मिट्टी की तरह होते हैं”
सीएम हेमंत की बातों का सबसे भावुक हिस्सा तब आया, जब उन्होंने बच्चों को “कच्ची मिट्टी” बताया। उन्होंने कहा कि गांवों के बच्चे जिस माहौल में पलते हैं, उसी के अनुसार उनका आत्मविश्वास और सोच बनती है। ऐसे में शिक्षक ही वह व्यक्ति होता है, जो बच्चे को नई दिशा दे सकता है। उन्होंने नवनियुक्त शिक्षकों से कहा कि वे सिर्फ पाठ्यक्रम पूरा करने तक सीमित न रहें। बच्चों के भीतर सपने जगाना, उन्हें आगे बढ़ने का भरोसा देना और उनके अंदर छिपी प्रतिभा को पहचानना भी उतना ही जरूरी है। उनकी बातों में साफ दिखा कि सरकार शिक्षा को केवल नौकरी पाने का जरिया नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव का रास्ता मान रही है।

सरकारी स्कूलों की बदली तस्वीर दिखाना चाहती है सरकार
सीएम हेमंत सोरेन ने अपने संबोधन में यह भी माना कि लंबे समय तक सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर लोगों के मन में नकारात्मक धारणा रही है। लेकिन अब सरकार उस छवि को बदलना चाहती है। उन्होंने सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य के स्कूलों को बेहतर सुविधाओं से जोड़ा जा रहा है। मकसद यह है कि गांव का बच्चा भी वही माहौल पाए, जो बड़े शहरों के अच्छे स्कूलों में मिलता है। सीएम हेमंत सोरेन की बातों से साफ था कि वे शिक्षा व्यवस्था को केवल भवन और नियुक्तियों तक सीमित नहीं रखना चाहते, बल्कि उसे सामाजिक बराबरी के बड़े अभियान के रूप में देख रहे हैं।
“महिलाएं अब चारदीवारी तक सीमित नहीं”
सीएम हेमंत ने अपने भाषण में महिलाओं के सशक्तिकरण को भी प्रमुखता से रखा। उन्होंने कहा कि झारखंड मुख्यमंत्री मंईयाँ सम्मान योजना के जरिए लाखों महिलाओं तक आर्थिक मदद पहुंच रही है और इसका असर अब समाज में दिखने लगा है। उन्होंने कहा कि पहले महिलाओं को घर की चारदीवारी तक सीमित रखने की सोच थी, लेकिन अब बेटियां आगे बढ़ रही हैं। पढ़ाई कर रही हैं, प्रतियोगी परीक्षाएं पास कर रही हैं और बड़े पदों तक पहुंच रही हैं। मुख्यमंत्री ने गर्व के साथ कहा कि कई बेटियां आज कलेक्टर जैसे पदों तक पहुंच रही हैं और यह बदलाव समाज में नई उम्मीद पैदा कर रहा है।

“पेपर लीक के बीच झारखंड में हो रही नियुक्तियां”
देश के कई राज्यों में भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी और पेपर लीक के मामलों के बीच मुख्यमंत्री ने झारखंड सरकार की नियुक्ति प्रक्रिया को भी अपनी उपलब्धि के तौर पर पेश किया। उन्होंने कहा कि पिछले चार महीनों में शिक्षा विभाग में 9 हजार से अधिक युवाओं को रोजगार दिया गया है, जबकि दो वर्षों में 16 हजार से ज्यादा नियुक्तियां हुई हैं। उनका कहना था कि सरकार पारदर्शी तरीके से युवाओं को रोजगार देने के लिए लगातार काम कर रही है और आने वाले समय में भी यह प्रक्रिया जारी रहेगी।
नियुक्ति पत्र के साथ बढ़ी उम्मीदें
समारोह में मौजूद कई परिवारों के लिए यह दिन किसी त्योहार से कम नहीं था। कई अभ्यर्थियों के माता-पिता अपने बच्चों को मंच से नियुक्ति पत्र लेते देख भावुक हो उठे। कुछ युवाओं के लिए यह परिवार की पहली सरकारी नौकरी थी। सभागार में बार-बार तालियां गूंजती रहीं, लेकिन उन तालियों के बीच मुख्यमंत्री की एक बात सबसे ज्यादा असर छोड़ गई… “यह सिर्फ नौकरी नहीं है। आपके जरिए सरकार गांव-गांव तक पहुंचना चाहती है।”

ये रहे मौजूद
इस अवसर पर राज्य के वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर, श्रम नियोजन एवं प्रशिक्षण विभाग के मंत्री संजय प्रसाद यादव, मुख्य सचिव अविनाश कुमार, स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव उमा शंकर सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। समारोह में बड़ी संख्या में नवनियुक्त अभ्यर्थी और उनके परिजन शामिल हुए।
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