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Patna : पटना का बापू सभागार शनिवार की दोपहर तालियों की गड़गड़ाहट और बच्चों के खिलखिलाते चेहरों से गूंज रहा था। मौका था ‘सेवा ही संकल्प’ अभियान के तहत आयोजित राज्यस्तरीय चित्रकला और भाषण प्रतियोगिता के पुरस्कार वितरण का। हाथ में ब्रश लिए किसी बच्चे ने कैनवास पर अपने सपनों का भारत उकेरा था, तो किसी ने मंच पर माइक संभालते ही देश और बिहार के विकास का पूरा खाका अपनी मासूम आवाज में खींच दिया। सभागार में बिहार के बदलते शैक्षणिक मिजाज की एक जीवंत तस्वीर दिखाई दे रही थी। कार्यक्रम का शुभारंभ सीएम सम्राट चौधरी और केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने दीप जलाकर किया। मंच पर पहुंचते ही सीएम ने बच्चों की पीठ थपथपाई और सीधे दिल से जुड़ने वाले अंदाज में कहा कि आज जो बच्चे कतार में खड़े होकर पुरस्कार ले रहे हैं, वे केवल विद्यार्थी नहीं हैं, बल्कि आने वाले कल के असली नायक और महानायक हैं।

सपनों के भारत में पूरे देश में अव्वल निकल गया बिहार
कार्यक्रम में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की रही कि ‘मेरे सपनों का भारत’ विषय पर हुई इस प्रतियोगिता में बिहार ने पूरे देश में सबसे ज्यादा बच्चों की भागीदारी दर्ज कराई और पहला स्थान हासिल किया। सीएम सम्राट चौधरी ने इसे राज्य के स्वाभिमान से जोड़ते हुए कहा कि यह उपलब्धि बताती है कि हमारे बच्चों में सोचने, समझने और नया रचने की कितनी बड़ी ताकत है। उन्होंने इतिहास के पन्नों को पलटते हुए याद दिलाया कि बिहार कभी ज्ञान और लोकतंत्र का केंद्र रहा है। मगध का स्वर्णिम दौर और चाणक्य की अखंड भारत की सोच इसी मिट्टी से निकली थी। नालंदा और विक्रमशिला जैसे संस्थान दुनिया को राह दिखाते थे। सीएम ने कहा कि आज जब केंद्र और राज्य मिलकर काम कर रहे हैं, तो नालंदा की उसी खोई प्रतिष्ठा को लौटाने का संकल्प जमीन पर उतर रहा है। उन्होंने साफ कहा कि अब हमें केवल अतीत के गौरव के सहारे नहीं बैठना है, बल्कि ऐसा मजबूत राज्य और देश बनाना है जो दुनिया के सामने अपनी पूरी ताकत से खड़ा हो सके।

ऑक्सफोर्ड की राह नापेंगे सरकारी स्कूलों के 100 गुरुजी
भाषण के दौरान सीएम ने जब शिक्षकों के लिए नई योजना का जिक्र किया, तो पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा। उन्होंने मंच पर मौजूद शिक्षा मंत्री को सीधे निर्देश दिया कि राज्यभर के सरकारी स्कूलों और कॉलेजों से ऐसे 100 बेहतरीन शिक्षकों को चुना जाए, जो अपने विषय में पारंगत हों और बच्चों को दिल से पढ़ाते हों। सीएम ने कहा कि इन 100 शिक्षकों को ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी सहित दुनिया के नामी संस्थानों में खास ट्रेनिंग के लिए भेजा जाएगा। मकसद सीधा है कि हमारे शिक्षक दुनिया की सबसे आधुनिक तकनीकों और पढ़ाने के तरीकों को करीब से देखें और सीखें। जब वे लौटकर बिहार की कक्षाओं में खड़े होंगे, तो सरकारी स्कूल के सामान्य घरों से आने वाले बच्चों को भी वही अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा मिल सकेगी, जिसके लिए कभी लोगों को लाखों रुपये खर्च करने पड़ते थे।

रात एक बजे भी जलती है पढ़ाई की बत्ती, ऐप पर जुटते हैं पौने दो लाख छात्र
डिजिटल दौर में बिहार के गांव-कस्बों के बच्चे कैसे खुद को ढाल रहे हैं, इसका एक दिलचस्प आंकड़ा सीएम ने साझा किया। उन्होंने बताया कि राज्य में 700 मॉडल स्कूल शुरू किए गए हैं, जहां करीब साढ़े तीन लाख बच्चे पढ़ रहे हैं। इन्हीं बच्चों के लिए शुरू किया गया ‘विद्यार्थी साथी ऐप’ अब छात्रों की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। सीएम ने मुस्कुराते हुए कहा कि आजकल के बच्चों की आदत बदल गई है, वे दिन के शोरगुल से दूर रात के शांत माहौल में पढ़ना पसंद करते हैं। इस ऐप के जरिए वे देर रात तक नीट और जेईई जैसी कठिन परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक, हर रात एक बजे तक लगभग 1.42 लाख बच्चे ऐप पर ऑनलाइन रहकर पढ़ाई करते हैं। वहीं शनिवार और रविवार की रातों में यह आंकड़ा पौने दो लाख के पार चला जाता है। सीएम ने कहा कि यह संख्या सिर्फ एक डाटा नहीं है, बल्कि यह इस बात का सबूत है कि अभावों के बीच भी बिहार के बच्चों के भीतर कुछ बड़ा कर गुजरने की आग धधक रही है।
पिताजी न उड़ाएं पैसा, इसलिए जीविका दीदियां सिलकर देंगी ड्रेस
स्कूली बच्चों की योजनाओं पर बात करते हुए सीएम ने एक जमीनी हकीकत पर से पर्दा उठाया। उन्होंने कहा कि पहले सरकार बच्चों की स्कूल ड्रेस के लिए सीधे बैंक खाते में पैसे भेजती थी। लेकिन कई जगहों से यह कड़वा सच सामने आया कि बच्चों के कपड़ों के लिए भेजी गई रकम उनके पिता दूसरी आदतों या निजी खर्चों में उड़ा देते थे और बच्चा बिना सही यूनिफॉर्म के ही स्कूल जाता रह जाता था।
इस दर्द को समझते हुए सरकार ने पूरी व्यवस्था को पलट दिया है। सीएम ने एलान किया कि अब नकद पैसा देने के बजाय सीधे सिली-सिलाई पोशाक बच्चों को बांटी जाएगी। यह बड़ा जिम्मा राज्य की जीविका दीदियों को सौंपा जा रहा है। जीविका दीदियां लगभग एक करोड़ बच्चों के लिए ड्रेस सिलेंगी और सीधे स्कूलों में पहुंचाएंगी। इससे जहां बच्चों को समय पर अच्छी यूनिफॉर्म मिल जाएगी, वहीं गांव-देहात में बैठी लाखों महिलाओं को घर के पास ही सम्मानजनक रोजगार और आमदनी का पक्का जरिया मिल सकेगा।
घर के पास पोस्टिंग और 2030 तक पलायन पर पूर्णविराम का संकल्प
शिक्षकों की परेशानियों को दूर करने के लिए सीएम ने पोस्टिंग से जुड़ा एक संवेदनशील फैसला साझा किया। उन्होंने कहा कि महिला शिक्षकों को उनके घर की सबसे नजदीकी पंचायत में और पुरुष शिक्षकों को उनके नजदीकी प्रखंड में ही स्कूल देने की व्यवस्था बनाई जा रही है। इसका सीधा फायदा यह होगा कि शिक्षक लंबी और थकाऊ यात्राओं से बचेंगे और अपनी पूरी ऊर्जा बच्चों को सिखाने में लगाएंगे। साथ ही उन्होंने बताया कि टीआरई चार के जरिए जल्द ही 33 हजार नए शिक्षकों की बहाली भी पूरी की जाएगी।
सीएम ने कहा कि आज राज्य सरकार अपने कुल बजट का 21 फीसदी यानी करीब 78 हजार करोड़ रुपये सिर्फ शिक्षा पर खर्च कर रही है। 211 नए डिग्री कॉलेज शुरू किए गए हैं और 17 नए केंद्रीय विद्यालयों के लिए जमीन उपलब्ध कराई गई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार का अंतिम लक्ष्य यह है कि 2030 से पहले बिहार से मजदूरी और मजबूरी का पलायन पूरी तरह खत्म हो। यहां इतने बेहतरीन स्कूल-कॉलेज हों कि पढ़ाई के लिए किसी बेटे-बेटी को बाहर न जाना पड़े और इतने उद्योग लगें कि रोजी-रोटी के लिए किसी नौजवान को अपना घर न छोड़ना पड़े।
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