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Ramgarh : कोयला, पत्थर और बालू जैसे खनिज संसाधनों से समृद्ध रामगढ़ जिला लंबे समय से अवैध खनन और खनिज तस्करी की चुनौती से जूझता रहा है। कई बार रात के अंधेरे में चलने वाले अवैध खनन के खेल ने न सिर्फ सरकार को राजस्व का नुकसान पहुंचाया, बल्कि पर्यावरण और स्थानीय सुरक्षा पर भी सवाल खड़े किए। अब जिला प्रशासन इस पूरे नेटवर्क पर निर्णायक चोट करने की तैयारी में दिख रहा है। समाहरणालय सभाकक्ष में आयोजित जिला स्तरीय खनन टास्क फोर्स की बैठक में जो फैसले लिए गए, उन्हें देखकर साफ है कि प्रशासन केवल छिटपुट कार्रवाई नहीं, बल्कि अवैध खनन के पूरे तंत्र को तोड़ने की रणनीति पर काम कर रहा है। बैठक की अध्यक्षता डीसी ऋतुराज ने की, जबकि एसपी मुकेश कुमार लुनायत भी मौजूद रहे।
अवैध खनन सिर्फ कानून का नहीं, संसाधनों की लूट का मामला
खनन से जुड़े जानकारों का मानना है कि अवैध खनन केवल नियमों के उल्लंघन तक सीमित नहीं है। इससे सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान होता है। कई बार अवैध खनन के कारण जमीन धंसने, दुर्घटनाओं और पर्यावरणीय नुकसान की घटनाएं भी सामने आती हैं। रामगढ़ जैसे जिले में, जहां खनिज आधारित गतिविधियां बड़ी संख्या में होती हैं, वहां अवैध खनन पर नियंत्रण प्रशासन के लिए हमेशा बड़ी चुनौती रहा है। इसी कारण जिला प्रशासन अब लगातार निगरानी और सख्त कार्रवाई की नीति अपना रहा है।
बैठक में हुई अब तक की कार्रवाई की समीक्षा
बैठक के दौरान जिला खनन पदाधिकारी निशांत अभिषेक ने प्रस्तुतीकरण के जरिए अवैध खनन, अवैध परिवहन और अवैध बालू कारोबार के खिलाफ अब तक हुई कार्रवाई की जानकारी दी। डीसी ने विभिन्न क्षेत्रों में चल रहे अभियानों की समीक्षा की और अधिकारियों से यह जानने की कोशिश की कि किन इलाकों में अब भी अवैध गतिविधियों की शिकायतें मिल रही हैं। समीक्षा के दौरान स्पष्ट किया गया कि केवल अभियान चलाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसका प्रभाव जमीन पर दिखाई देना चाहिए।
अवैध मुहाने बने प्रशासन की चिंता का बड़ा कारण
बैठक में सबसे ज्यादा जोर उन अवैध मुहानों पर दिया गया, जिनके जरिए चोरी-छिपे खनन किया जाता है। कई बार खदानों के आसपास या बंद खनन क्षेत्रों में ऐसे रास्ते बना लिए जाते हैं, जहां से अवैध रूप से खनिज निकाला जाता है। डीसी ने साफ निर्देश दिया कि किसी भी क्षेत्र में ऐसे मुहानों की सूचना मिलते ही संबंधित अधिकारी तत्काल कार्रवाई करें और उन्हें पूरी तरह बंद कराएं। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि बंद किए गए स्थानों पर दोबारा अवैध खनन शुरू न हो सके।
अब जीपीएस बताएगा खनिज वाहन कहां जा रहे हैं
बैठक का सबसे महत्वपूर्ण निर्णय खनिज परिवहन में जीपीएस को अनिवार्य बनाने का रहा। प्रशासन का मानना है कि अवैध खनन से निकाले गए खनिजों की सबसे बड़ी कड़ी उनका परिवहन है। कई बार वाहन निर्धारित रूट छोड़कर दूसरे रास्तों से खनिज पहुंचाते हैं, जिससे निगरानी मुश्किल हो जाती है। जीपीएस सिस्टम लागू होने के बाद प्रशासन वाहनों की लोकेशन पर नजर रख सकेगा। कौन सा वाहन कहां से चला, किस रास्ते से गया और किस स्थान पर पहुंचा, इसकी जानकारी रिकॉर्ड में रहेगी। इससे अवैध परिवहन पर काफी हद तक अंकुश लगाने की उम्मीद है।
बालू कारोबार पर भी प्रशासन की पैनी नजर
रामगढ़ समेत झारखंड के कई जिलों में अवैध बालू खनन और परिवहन लंबे समय से चिंता का विषय रहा है। नदी घाटों से अवैध तरीके से बालू निकालने और रात के समय उसकी ढुलाई की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रही हैं। इसी को देखते हुए डीसी ने सभी अंचल अधिकारियों और थाना प्रभारियों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में नियमित जांच अभियान चलाएं। जहां भी अवैध बालू परिवहन या भंडारण की सूचना मिले, वहां तत्काल कार्रवाई की जाए।
प्रशासन और पुलिस की संयुक्त रणनीति
बैठक में पुलिस और प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय पर भी जोर दिया गया। अधिकारियों का मानना है कि अवैध खनन के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई तभी संभव है, जब खनन विभाग, स्थानीय प्रशासन और पुलिस मिलकर काम करें। एसपी मुकेश कुमार लुनायत की मौजूदगी ने यह संकेत भी दिया कि आने वाले समय में कानून व्यवस्था के स्तर पर भी इस मुद्दे को गंभीरता से लिया जाएगा।
सिर्फ कार्रवाई नहीं, लगातार निगरानी पर भी जोर
बैठक में यह बात भी सामने आई कि अवैध खनन के खिलाफ एक बार की कार्रवाई काफी नहीं होती। कई मामलों में कार्रवाई के बाद कुछ समय तक स्थिति सामान्य रहती है, लेकिन बाद में गतिविधियां फिर शुरू हो जाती हैं। इसीलिए प्रशासन ने नियमित निगरानी, जांच अभियान और तकनीकी संसाधनों के उपयोग पर जोर दिया है। जीपीएस निगरानी, संयुक्त छापेमारी और स्थानीय स्तर पर सूचना तंत्र को मजबूत करने की दिशा में भी काम किया जाएगा।
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