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Pakur (Jaydev Kumar) : पाकुड़ जिले के हिरणपुर थाना क्षेत्र के पाडरकोला गांव में 17 जुलाई 2019 की शाम एक मामूली विवाद ने खतरनाक रूप ले लिया। डोमन पहाड़िया अपने मकई के खेत में खड़े थे, तभी उनके पड़ोसियों की बकरी खेत में घुस गई। बकरी को भगाने के लिए डोमन ने विरोध किया, लेकिन मामला अचानक हिंसक हो गया।
तीर और लाठी से हमला, खून से सना खेत
घटना के दौरान सीता पहाड़िया ने डोमन पर तीर चला दिया। दो बार तीर लगने से डोमन के पैर और गाल में गंभीर चोटें आई। जैसे ही डोमन जख्मी होकर पीछे हटे, गांदे और लखन पहाड़िया ने लाठी उठाकर पीछे से हमला कर दिया। इलाके में अचानक अफरा-तफरी मच गई। डोमन पहाड़िया गंभीर रूप से घायल हो गए और उन्हें तुरंत पाकुड़ सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया।
उनकी पत्नी बंदरी पहाड़िन ने घटना के तुरंत बाद हिरणपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई। मामला हिरणपुर थाना कांड संख्या 71/19 के तहत दर्ज किया गया।
लंबी सुनवाई और अदालत का कड़ा फैसला
इस मामूली विवाद में हुई हिंसा ने कोर्ट में लंबी सुनवाई का सिलसिला शुरू कर दिया। आखिरकार अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कुमार क्रांति प्रसाद की अदालत ने तीनों आरोपियों को दोषी ठहराया।
अदालत ने सीता, गांदे और लखन पहाड़िया को भारतीय दंड संहिता की दो धाराओं में 10-10 साल की सश्रम कारावास और 50-50 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई। जुर्माना अदा नहीं करने पर एक-एक साल का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। इसके अलावा एक अन्य धारा में तीनों को एक माह की जेल और 500 रुपये जुर्माना भी दिया गया।
पुलिस की कार्रवाई और न्याय की जीत
अदालत के आदेश के बाद फरार आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। यह घटना दिखाती है कि कभी-कभी छोटे विवाद भी गंभीर हिंसा में बदल सकते हैं। लेकिन न्यायपालिका ने स्पष्ट संदेश दिया कि कोई भी हिंसक कदम बिना सजा नहीं रह सकता।
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