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Ranchi : राष्ट्रपति भवन का भव्य दरबार हॉल तालियों की गूंज से भर उठा। मंच पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू थीं और सामने बैठा था पूरा देश। जैसे ही स्वर्गीय दिशोम गुरु शिबू सोरेन के नाम की घोषणा हुई, झारखंड की करोड़ों यादें एक साथ ताजा हो गईं। मंच पर उनकी जीवनसंगिनी ने पद्म भूषण सम्मान ग्रहण किया। यह सिर्फ एक सम्मान समारोह नहीं था, बल्कि उस जननायक को देश का नमन था, जिसने अपनी पूरी जिंदगी जल, जंगल, जमीन और झारखंड के अधिकारों की लड़ाई में लगा दी।इस भावुक पल ने सीएम हेमंत सोरेन को भी भीतर तक छू लिया। उन्होंने सोशल मीडिया पर ऐसा संदेश लिखा, जिसमें बेटे का अपनापन भी था और एक मुख्यमंत्री का गर्व भी।
मां ने ग्रहण किया सम्मान, बेटे ने साझा किए दिल के जज्बात
सीएम हेमंत सोरेन ने लिखा कि आज स्मृति शेष बाबा दिशोम गुरु शिबू सोरेन को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पद्म भूषण से सम्मानित किया। यह सम्मान उनकी आजीवन संघर्ष यात्रा, त्याग, जनसेवा और सामाजिक न्याय के प्रति समर्पण को मिला है। उन्होंने बताया कि बाबा के संघर्ष की साथी उनकी मां ने राष्ट्रपति के हाथों यह सम्मान ग्रहण किया। उन्होंने राष्ट्रपति और केंद्र सरकार के प्रति आभार जताते हुए कहा कि यह सम्मान सिर्फ उनके परिवार का नहीं, बल्कि उन लाखों लोगों का भी है, जिन्होंने दिशोम गुरु के साथ संघर्ष का रास्ता तय किया।
एक ऐसा नेता, जिसने लोगों के बीच रहकर राजनीति की
शिबू सोरेन की राजनीति बड़े मंचों से नहीं, बल्कि गांवों की पगडंडियों से शुरू हुई थी। उन्होंने आदिवासी समाज, किसानों, मजदूरों और गरीबों के बीच रहकर उनकी तकलीफों को समझा। महाजनी व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाई और उन लोगों के लिए लड़ाई लड़ी, जिनकी बात अक्सर कोई नहीं सुनता था। झारखंड आंदोलन को नई ताकत देने में उनकी भूमिका सबसे अहम मानी जाती है। यही कारण है कि लोग उन्हें सिर्फ नेता नहीं, बल्कि प्यार से “दिशोम गुरु” कहकर पुकारते थे।
झारखंड आंदोलन की सबसे मजबूत आवाज
अलग झारखंड राज्य का सपना आसान नहीं था। इसके लिए वर्षों तक आंदोलन हुए, हजारों लोगों ने संघर्ष किया और कई पीढ़ियों ने इंतजार किया। इस लंबे आंदोलन में शिबू सोरेन हमेशा सबसे आगे दिखाई दिए। उन्होंने गांव-गांव जाकर लोगों को जोड़ा। आदिवासी अस्मिता, जल, जंगल, जमीन और स्थानीय अधिकारों की लड़ाई को जनआंदोलन बनाया। उनकी यही पहचान आज भी झारखंड की राजनीति और समाज में सबसे अलग दिखाई देती है।
राजनीति के साथ समाज सुधार को भी बनाया मिशन
हेमंत सोरेन ने अपने संदेश में कहा कि बाबा सिर्फ राजनीतिक नेता नहीं थे। वे समाज को बदलने की सोच रखने वाले व्यक्ति थे। उन्होंने शिक्षा को बढ़ावा देने, सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ लोगों को जागरूक करने और समाज को संगठित करने का काम किया। उनका मानना था कि अगर समाज शिक्षित होगा और एकजुट रहेगा, तभी लोगों को उनके अधिकार मिल सकेंगे। यही सोच उन्हें आम नेताओं से अलग बनाती थी।
गरीबों और आदिवासियों के लिए पूरी जिंदगी लड़ते रहे
मुख्यमंत्री ने कहा कि दिशोम गुरु ने अपना पूरा जीवन वंचितों, शोषितों, आदिवासियों और मेहनतकश लोगों के अधिकारों के लिए समर्पित कर दिया। वे सिर्फ झारखंड तक सीमित नहीं रहे। देश के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले आदिवासी, दलित और गरीब तबके के लोगों के लिए भी वे प्रेरणा बने। उनकी राजनीति का केंद्र हमेशा आम आदमी रहा। शायद यही वजह है कि आज भी दूर-दराज के गांवों में लोग उन्हें अपने परिवार के सदस्य की तरह याद करते हैं।
सम्मान की सबसे बड़ी कीमत- लोगों का प्यार
हेमंत सोरेन ने अपने संदेश में लिखा कि किसी भी सम्मान की असली कीमत उसकी भावना में होती है। लोगों ने दिशोम गुरु को अलग-अलग नाम दिए। किसी ने उन्हें महाजनी व्यवस्था के खिलाफ लड़ने वाला योद्धा कहा, किसी ने गरीबों और आदिवासियों के अधिकारों का प्रहरी। लेकिन उनके परिवार के लिए और झारखंड की जनता के लिए वे ऐसे जननायक हैं, जिन्होंने सत्ता से कहीं ज्यादा जगह लोगों के दिलों में बनाई। यही उनकी सबसे बड़ी पूंजी रही।
आज स्मृति शेष बाबा दिशोम गुरु शिबू सोरेन जी को माननीय राष्ट्रपति आदरणीय श्रीमती द्रौपदी मुर्मु जी द्वारा पद्म भूषण सम्मान से अलंकृत किया जाना उनके आजीवन संघर्ष, त्याग, जनसेवा और सामाजिक न्याय के प्रति समर्पण को दिया गया सम्मान है। बाबा के संघर्ष की साथी, आदरणीय माँ ने यह सम्मान… pic.twitter.com/VmUXbVOM47
— Hemant Soren (@HemantSorenJMM) June 23, 2026
“देश ने पद्म भूषण दिया, हमारे लिए वे हमेशा भारत रत्न रहेंगे”
अपने संदेश के आखिर में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सबसे भावुक बात लिखी। उन्होंने कहा कि देश ने आज पद्म भूषण देकर दिशोम गुरु के महान योगदान को सम्मानित किया है, लेकिन झारखंड सहित देशभर के करोड़ों लोगों के दिलों में उनका स्थान हमेशा सर्वोच्च रहेगा। उन्होंने लिखा, “हमारे लिए दिशोम गुरु शिबू सोरेन जी भारत रत्न थे, हैं और सदैव रहेंगे।”
यही एक वाक्य बता देता है कि यह सम्मान सिर्फ एक पदक नहीं, बल्कि उस विरासत का सम्मान है, जिसने झारखंड को उसकी पहचान दिलाई। राष्ट्रपति भवन में मिला पद्म भूषण इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया, लेकिन दिशोम गुरु की असली पहचान आज भी उन लोगों के दिलों में है, जिनके लिए उन्होंने पूरी जिंदगी संघर्ष किया।
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