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Ranchi : शहर के जाने-माने चिकित्सक और बिरसा कृषि विवि के चीफ मेडिकल ऑफिसर डॉ वर्मा (डॉ उमा शंकर वर्मा) की क्लिनिक पर स्वास्थ्य शिविर लगाया गया। इस शिविर में मरीजों की जांच की गई और उन्हें जरूरी दवाईयां भी दी गई। यह सब बिल्कुल मुफ्त में किया गया। यह शिविर महात्मा हनीमैन के जन्मदिन के मौके पर लगाया गया। शिविर के 51 मरीजों की निशुल्क जांच की गई।
इससे पहले रांची के कचहरी रोड के यू.एस. पॉलीक्लिनिक में डॉ उमाशंकर वर्मा ने महात्मा हनीमैन की तस्वीर पर फूल-माला चढ़ा कर नमन किया। वहीं, मौके पर मौजूद साथी डॉक्टरों, कर्मचारियों और इलाज कराने आये मरीजों को होम्योपैथी इलाज के फायदे के बारे में बता गये। वहीं, महात्मा हनीमैन के बारे में भी जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि महात्मा हनीमैन को होम्योपैथी का जनक माना जाता है। उनका पूरा नाम क्रिश्चियन फ्रेडरिक सैमुअल हैनीमैन है। उनका जन्म 10 अप्रैल 1755 को जर्मनी के एक छोटे शहर मीसेन, सकसोनी में हुआ था। वहीं, उनका देहांत 88 साल की उम्र मे 2 जुलाई 1843 को पेरिस, फ्रांस में हुआ था।
रांची के BAU के चीफ मेडिकल ऑफिसर डॉ वर्मा ने सिर्फ इतना कहा कि उन्हें तब बेहद सुकून मिलता है, जब उनकी दवा के असर से उन्हें ढेर सारे दुआयें मिल जाती है। संसार में कुछ वैसे चीजें हैं जो इंसानों के वश में नहीं। इसमें यश और अपयश भी शामिल। डॉक्टर वर्मा ने बताया कि एलोपैथिक, होम्योपैथिक, आयुर्वेदिक, युनानी सिद्धा जितनी भी चिकित्सा पद्धतियां है। उसमें कुछ ना कुछ कमियां है, कोई भी चिकित्सा पद्धति पूर्ण नहीं है, बल्कि एक-दूसरे का बहुत हद तक पूरक है। इसमें गहन अनुसंधान की आवश्यकता है। कुछ ऐसे भी नए रोग सामने आए हैं, जिसे पूर्व में नहीं देखा गया था। एलोपैथिक इलाज ऑपरेशन, इमरजेंसी मैनेजमेंट में जहां प्रथम स्थान ग्रहण किए हुए है। वहीं पुराना, जटील, असाध्य रोग, चर्म रोग, मानसिक बीमारियों, किडनी, लिवर, हृदय, पीसीओडी, ज्वाइंट पेन, बवासीर, एनल फिशर, वायरस रोगों पर होम्योपैथी असरदार है।

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