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New Delhi : अगर आप होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन की EMI भर रहे हैं तो फिलहाल आपके लिए राहत की खबर है। RBI यानी भारतीय रिजर्व बैंक ने लगातार तीसरी बार रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है। बुधवार को हुई मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक में रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर ही बनाए रखने का फैसला लिया गया। इसका मतलब है कि बैंकों की कर्ज देने की लागत में फिलहाल कोई बदलाव नहीं होगा और आम लोगों की ईएमआई भी पहले की तरह ही रहेगी।
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि दुनिया के कई हिस्सों में हालात अभी भी चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। पश्चिम एशिया में जारी तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और वैश्विक स्तर पर बनी अनिश्चितता को देखते हुए केंद्रीय बैंक ने फिलहाल सतर्क रुख अपनाया है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इन चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूती से आगे बढ़ रही है और घरेलू मांग लगातार आर्थिक विकास को सहारा दे रही है।
भारत की अर्थव्यवस्था पर भरोसा, लेकिन चुनौतियां अभी बाकी
RBI ने अपनी मौद्रिक नीति का रुख भी तटस्थ रखा है। यानी आने वाले समय में हालात को देखते हुए जरूरत पड़ने पर ब्याज दरों में बदलाव किया जा सकता है। गवर्नर ने बताया कि अप्रैल से जून तिमाही में आर्थिक गतिविधियां उम्मीद से बेहतर रहीं। सेवा क्षेत्र अच्छा प्रदर्शन कर रहा है, जिससे शहरों में खपत बढ़ने की संभावना है।
हालांकि उन्होंने यह भी माना कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष वैश्विक व्यापारिक मार्गों को प्रभावित कर रहा है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में उतार-चढ़ाव और अल-नीनो से जुड़े जोखिम भी भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने चुनौती बने हुए हैं। उनका कहना है कि इन परिस्थितियों पर आरबीआई लगातार नजर बनाए हुए है।
महंगाई बढ़ सकती है, लेकिन जीडीपी को लेकर बढ़ा भरोसा
RBI का मानना है कि आने वाले महीनों में कच्चे तेल और खाद्य वस्तुओं की कीमतों की वजह से खुदरा महंगाई कुछ बढ़ सकती है। हालांकि अनुमान है कि तीसरी तिमाही में महंगाई अपने उच्च स्तर पर पहुंचने के बाद धीरे-धीरे कम होने लगेगी। गवर्नर ने कहा कि फिलहाल महंगाई का दबाव मुख्य रूप से खाद्य और ईंधन की कीमतों की वजह से है।
वहीं अर्थव्यवस्था को लेकर केंद्रीय बैंक पहले से ज्यादा भरोसे में नजर आया। आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान 6.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.7 प्रतिशत कर दिया है। दूसरी ओर खुदरा महंगाई का अनुमान 5.1 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया है। इससे संकेत मिलता है कि आर्थिक विकास की रफ्तार मजबूत रहने की उम्मीद है।
रुपये पर दबाव बरकरार, बैंकिंग सिस्टम में पर्याप्त नकदी
RBI के मुताबिक जून से बैंकिंग प्रणाली में औसत तरलता एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा बनी हुई है। बैंकों के पास पर्याप्त नकदी है और ऋण वितरण भी मजबूत बना हुआ है। इससे उद्योग और उपभोक्ताओं को कर्ज मिलने में कोई दिक्कत नहीं होगी।
हालांकि विदेशी मोर्चे पर चुनौतियां कम नहीं हुई हैं। वैश्विक व्यापार में सुस्ती, महंगे कच्चे तेल का आयात, विदेशी निवेशकों की निकासी और डॉलर की मजबूती की वजह से रुपया लगातार दबाव में है। फिलहाल डॉलर के मुकाबले रुपया 95 से 96 रुपये के बीच कारोबार कर रहा है। वर्ष 2026 में अब तक रुपया करीब 7 प्रतिशत कमजोर हो चुका है, जबकि फरवरी के अंत में ईरान से जुड़े संघर्ष के बाद इसमें लगभग 6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।
फिलहाल RBI के इस फैसले का सबसे बड़ा असर यही है कि लाखों कर्जदारों की ईएमआई नहीं बढ़ेगी। साथ ही बैंकों की ब्याज दरों में भी तत्काल किसी बड़े बदलाव की संभावना नहीं है। ऐसे में जिन लोगों को ब्याज दरों में राहत का इंतजार था, उन्हें अभी कुछ और समय इंतजार करना पड़ सकता है।
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