अपनी मनपसंद भाषा में पढ़ें :
News Samvad : UPSC यानी संघ लोक सेवा आयोग ने अपनी सभी भर्ती परीक्षाओं में शामिल होने वाले उम्मीदवारों की पहचान को लेकर बड़ा फैसला लिया है। अब परीक्षा केंद्र पर उम्मीदवारों की पहचान चेहरे के माध्यम से की जाएगी। अधिकारियों ने शनिवार को इसकी जानकारी दी। आयोग का मानना है कि इस कदम से परीक्षा प्रक्रिया और अधिक निष्पक्ष और पारदर्शी बनेगी।
वेबसाइट पर जारी हुआ नोट
यूपीएससी की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी नोट में साफ कहा गया है कि आयोग की सभी परीक्षाओं में शामिल उम्मीदवारों की परीक्षा स्थल पर फेस आइडेंटिफिकेशन की जाएगी। इसका उद्देश्य फर्जी उम्मीदवारों पर रोक लगाना और पहचान प्रक्रिया को मजबूत करना है।
सिविल सेवा समेत कई परीक्षाओं में होगा इस्तेमाल
यूपीएससी देश में सरकारी सेवाओं के लिए कई अहम परीक्षाएं आयोजित करता है। इनमें सिविल सेवा परीक्षा भी शामिल है, जिसके जरिए IAS, IFS और IPS जैसे पदों पर अधिकारियों का चयन किया जाता है। अब इन सभी परीक्षाओं में यह नई व्यवस्था लागू होगी।
AI आधारित तकनीक का सफल परीक्षण
यूपीएससी ने पहले ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित फेस प्रमाणीकरण तकनीक का परीक्षण कर लिया है। यह पायलट कार्यक्रम 14 सितंबर 2025 को आयोजित एनडीए और एनए द्वितीय परीक्षा तथा सीडीएस द्वितीय परीक्षा के दौरान चलाया गया था।
गुरुग्राम के केंद्रों पर हुआ पायलट प्रोजेक्ट
पायलट कार्यक्रम के तहत गुरुग्राम के कुछ चुनिंदा परीक्षा केंद्रों पर उम्मीदवारों के चेहरे की तस्वीरों का मिलान उनके आवेदन फॉर्म में दी गई फोटो से किया गया। यह पूरा सत्यापन डिजिटल तरीके से किया गया।
सत्यापन समय में आई बड़ी कमी
यूपीएससी अध्यक्ष अजय कुमार के अनुसार नई प्रणाली से उम्मीदवारों का सत्यापन करने में लगने वाला समय काफी कम हो गया। पहले जहां ज्यादा समय लगता था, वहीं अब प्रति उम्मीदवार औसतन केवल 8 से 10 सेकंड में पहचान हो जा रही है। इससे प्रवेश प्रक्रिया तेज हुई है और सुरक्षा भी बढ़ी है।
इसे भी पढ़ें : कानून की डिग्री वालों के लिए सुनहरा मौका, UPSC में निकली वैकेंसी



