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Home » सरकारी अस्पताल से PAN इंडिया तक : डॉ जयंत घोष की मेहनत को मिली राष्ट्रीय पहचान
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सरकारी अस्पताल से PAN इंडिया तक : डॉ जयंत घोष की मेहनत को मिली राष्ट्रीय पहचान

February 22, 2026No Comments3 Mins Read
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Ranchi (Pawan Thakur) : जब किसी डॉक्टर का नाम PAN इंडिया स्तर पर गूंजे, तो वह सिर्फ उसकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं होती, बल्कि उस शहर और राज्य की भी पहचान बन जाती है। रांची के जाने-माने गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट डॉ जयंत घोष का चयन PAN India Gastroenterology Study Group के सदस्य के रूप में होना, इसी तरह की एक बड़ी और प्रेरणादायक कहानी है। यह चयन उस डॉक्टर का हुआ है, जिसने चमक-दमक वाले बड़े शहरों से ज्यादा भरोसा सरकारी अस्पताल के मरीजों पर किया।

राष्ट्रीय मंच, लेकिन जड़ें जमीन से जुड़ी

PAN इंडिया गैस्ट्रोएंटरोलॉजी स्टडी ग्रुप देशभर के चुनिंदा विशेषज्ञों का ऐसा मंच है, जहां इलाज की नई तकनीक, रिसर्च और जटिल मामलों पर गहन चर्चा होती है। इस मंच पर जगह बनाना आसान नहीं होता। वर्षों की मेहनत, सफल इलाज और लगातार अपडेटेड नॉलेज इसके पीछे होती है। डॉ जयंत घोष का यहां चयन यह बताता है कि रांची में बैठकर भी राष्ट्रीय स्तर का काम किया जा सकता है।

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सदर अस्पताल से मिली नई पहचान

डॉ जयंत घोष वर्तमान में रांची सदर अस्पताल में गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष हैं। सरकारी अस्पताल की भीड़, सीमित संसाधन और रोज़ आने वाले जटिल मरीज, इन सबके बीच उन्होंने कभी अपने काम की गुणवत्ता से समझौता नहीं किया। यहीं से उनके इलाज की चर्चा धीरे-धीरे रांची से बाहर निकलकर राज्य और फिर देश तक पहुंची।

हर केस सिर्फ मेडिकल नहीं, मानवीय जिम्मेदारी

PAN इंडिया स्तर की पहचान के पीछे सिर्फ डिग्रियां नहीं होतीं, बल्कि वह भरोसा होता है जो मरीजों के बीच बनता है। डॉ घोष के पास आने वाले अधिकतर मरीज मध्यम या गरीब वर्ग से होते हैं। कई बार इलाज से पहले सबसे बड़ी चुनौती बीमारी नहीं, बल्कि मरीज का डर और असहायता होती है। डॉ घोष पहले मरीज को सुनते हैं, समझाते हैं और भरोसा दिलाते हैं… “इलाज होगा, घबराइए मत।” यही मानवीय दृष्टिकोण उन्हें अलग बनाता है।

एंडोस्कोपी से बदली इलाज की तस्वीर

हाल ही में रांची के ऑर्किड मेडिकल सेंटर में उन्होंने एक ऐसा ऑपरेशन किया, जिसकी चर्चा मेडिकल सर्किल में भी हुई। सिग्मॉइड कोलन में मौजूद बेहद बड़े पॉलिप को बिना बड़े ऑपरेशन के, एंडोस्कोपी से सफलतापूर्वक निकाल दिया गया। कम दर्द, कम खतरा और तेज़ रिकवरी… यही आधुनिक गैस्ट्रो ट्रीटमेंट की पहचान है, और डॉ घोष इसे रांची की जमीन पर उतार रहे हैं।

हार्वर्ड से सीखा, झारखंड में लागू किया

डॉ जयंत घोष ने हार्वर्ड मेडिकल स्कूल से एडवांस मैनेजमेंट ऑफ गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल डिजीज का कोर्स कर अंतरराष्ट्रीय स्तर की ट्रेनिंग हासिल की। लेकिन खास बात यह है कि उन्होंने उस ज्ञान को विदेश में नहीं, बल्कि अपने राज्य के मरीजों के लिए इस्तेमाल किया। यही कारण है कि आज रांची में भी वह इलाज संभव हो पा रहा है, जिसके लिए पहले लोगों को दिल्ली, मुंबई या हैदराबाद जाना पड़ता था।

PAN इंडिया पहचान, मरीजों के नाम समर्पित

PAN इंडिया गैस्ट्रोएंटरोलॉजी स्टडी ग्रुप की सदस्यता डॉ जयंत घोष के लिए सम्मान जरूर है, लेकिन उनके लिए सबसे बड़ी उपलब्धि अब भी वही है। इलाज के बाद मरीज का राहत भरा चेहरा। राष्ट्रीय मंच पर उनकी मौजूदगी यह संदेश दे गई कि अगर नीयत साफ हो और मेहनत सच्ची, तो छोटे शहरों से भी देशभर में पहचान बनाई जा सकती है।

रांची के लिए गर्व की बात

आज जब PAN इंडिया स्तर पर झारखंड का नाम लिया जा रहा है, तो उसके पीछे डॉ जयंत घोष जैसे डॉक्टरों की मेहनत है। वे न सिर्फ गैस्ट्रोएंटरोलॉजी के विशेषज्ञ हैं, बल्कि उन डॉक्टरों में से हैं जो इलाज को सेवा और इंसानियत से जोड़कर देखते हैं।

इसे भी पढ़ें : डॉक्टर जयंत घोष ने लिखी नयी इबारत, पित्त नली कैंसर पर रची जीत की कहानी

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