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Tinsukia (Assam) : असम के तिनसुकिया जिले में आयोजित 21वीं आदिवासी महासभा में झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन ने आदिवासी समाज के लोगों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि असम में लगभग डेढ़ सौ वर्षों से रह रहे आदिवासी समुदाय से सीधे संवाद का यह अवसर उनके लिए बेहद खास है। मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड और असम के आदिवासी समाज का रिश्ता पुराना और गहरा है, जिसे कोई अलग नहीं कर सकता।
संघर्ष और इतिहास की याद
मुख्यमंत्री ने आदिवासी समाज के ऐतिहासिक संघर्ष को याद करते हुए कहा कि देश की आजादी से पहले ही झारखंड के वीर सपूत अंग्रेजों से लोहा ले रहे थे। धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा, सिदो कान्हू और तिलका मांझी जैसे महापुरुषों का योगदान देश कभी नहीं भूल सकता। उन्होंने कहा कि जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए आदिवासी समाज ने पीढ़ियों तक बलिदान दिया है।

हाशिए पर खड़ा आदिवासी समाज
सीएम हेमंत सोरेन ने चिंता जताई कि आज भी देश के कई हिस्सों में आदिवासी, मूलवासी, दलित और पिछड़ा वर्ग अपने हक और पहचान के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर ऐसी क्या परिस्थितियां बनीं कि आदिवासी समाज को हाशिए पर धकेल दिया गया। इस पर गंभीर चिंतन की जरूरत है।
श्रद्धांजलि और सम्मान
महासभा के दौरान सीएम हेमंत सोरेन ने असम के वरिष्ठ आदिवासी नेता स्वर्गीय प्रदीप नाग और प्रसिद्ध गायक स्वर्गीय जुबिन गर्ग को श्रद्धांजलि अर्पित की।

घर-घर तक पहुंची सरकारी योजनाएं
मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड राज्य गठन के बाद लंबे समय तक आदिवासी समाज को उसका हक नहीं मिला। उनकी सरकार ने सत्ता संभालते ही गांव, टोला और पंचायत स्तर तक जाकर लोगों को जागरूक किया। जो लोग पहले जिला और प्रखंड कार्यालय नहीं जानते थे, आज तक उनके घर तक सरकारी योजनाएं पहुंच रही हैं।
अधिकार और पहचान की लड़ाई
हेमंत सोरेन ने कहा कि आदिवासी समाज आज भी अपने अधिकार और मान्यता के लिए संघर्ष कर रहा है। कुछ ताकतें जानबूझकर आदिवासियों को कमजोर बनाए रखना चाहती हैं। उन्होंने साफ कहा कि जरूरत पड़ी तो असम में रहने वाले आदिवासियों के लिए पूरा झारखंड साथ खड़ा होगा। एकजुटता ही आदिवासी समाज की सबसे बड़ी पहचान है।

महिला सशक्तिकरण पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड देश की अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान देता है, इसलिए राज्य के लोगों को उनका हक लौटाना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना के तहत हर महीने करीब 55 लाख महिलाओं को 2500 रुपये सीधे उनके खातों में भेजे जा रहे हैं, जिससे महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं।
झारखंड मॉडल की चर्चा
हेमंत सोरेन ने कहा कि आज झारखंड का विकास मॉडल दूसरे राज्यों के लिए उदाहरण बन रहा है। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में आदिवासी मुख्यमंत्री के नेतृत्व में झारखंड की मौजूदगी राज्य के लिए गर्व की बात है। युवाओं के लिए बिना गारंटी 15 लाख रुपये तक का शिक्षा ऋण भी सरकार की बड़ी पहल है।
बड़ी संख्या में लोग रहे मौजूद
कार्यक्रम में मंत्री चमरा लिंडा, सांसद विजय हांसदा, विधायक एमटी राजा सहित ASSAA के पदाधिकारी और असम के विभिन्न इलाकों से बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के महिला, पुरुष और युवा शामिल हुए।

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