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Home » आंखों की टिमटिमाती लौ को फिर से रोशन करेंगे गौतम अदाणी, बिहार में रखी नींव
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आंखों की टिमटिमाती लौ को फिर से रोशन करेंगे गौतम अदाणी, बिहार में रखी नींव

May 17, 2026No Comments6 Mins Read
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अदाणी
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Bhagalpur : भागलपुर जिले का मस्तीचक गांव रविवार को अचानक देशभर की चर्चा का केंद्र बन गया। गांव की सड़कों पर हलचल थी, लोगों की भीड़ उमड़ी हुई थी और माहौल में उत्सुकता साफ महसूस हो रही थी। लेकिन यह भीड़ किसी राजनीतिक सभा या चुनावी कार्यक्रम के लिए नहीं जुटी थी। यहां बात हो रही थी आंखों की रोशनी, सेवा और उन लोगों की जिंदगी बदलने की, जो गरीबी और संसाधनों की कमी के कारण धीरे-धीरे अंधेरे की तरफ बढ़ जाते हैं। इसी गांव से अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी ने ग्रामीण भारत में नेत्र चिकित्सा को मजबूत बनाने के लिए 150 करोड़ रुपये की बड़ी पहल की शुरुआत की। इसके साथ ही उन्होंने देशभर के वंचित समुदायों तक आंखों का इलाज पहुंचाने के लिए 500 करोड़ रुपये की व्यक्तिगत प्रतिबद्धता की घोषणा भी कर दी। कुल मिलाकर यह पूरा मिशन 700 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश वाला बनने जा रहा है। यह सिर्फ अस्पताल बनाने का मामला नहीं है। यह उस सोच की शुरुआत है, जिसमें गांव के गरीब इंसान को भी वही इलाज मिले, जो बड़े शहरों के बड़े अस्पतालों में उपलब्ध होता है।

गांवों की सबसे बड़ी परेशानी… इलाज नहीं, पहुंच की कमी

बिहार सहित देश के कई ग्रामीण इलाकों में आज भी आंखों की बीमारी एक बड़ी समस्या बनी हुई है। मोतियाबिंद, कमजोर नजर, कॉर्निया से जुड़ी बीमारियां और दूसरी समस्याओं से लाखों लोग जूझते हैं। लेकिन समस्या सिर्फ बीमारी की नहीं है। असली परेशानी इलाज तक पहुंच की है। कई गांवों में आज भी आंखों के डॉक्टर नहीं हैं। लोगों को जांच के लिए शहर जाना पड़ता है। गरीब परिवार इलाज और यात्रा का खर्च नहीं उठा पाते। नतीजा यह होता है कि धीरे-धीरे रोशनी कम होती जाती है और कई लोग स्थायी रूप से दृष्टिहीन हो जाते हैं। मस्तीचक में शुरू हुई यह पहल इसी समस्या को जड़ से बदलने की कोशिश मानी जा रही है।

हर साल लाखों लोगों तक पहुंचेगा इलाज

इस योजना के तहत मस्तीचक में अदाणी सेंटर फॉर आई यानी ACE बनाया जाएगा। यहां आधुनिक तकनीक से आंखों का इलाज किया जाएगा और आम लोगों को कम खर्च में सुविधा मिलेगी। इसके साथ ही अदाणी ट्रेनिंग इन ऑप्थैल्मिक मेडिसिन यानी ATOM सेंटर की स्थापना होगी। यहां डॉक्टरों, नर्सों, पैरामेडिकल स्टाफ और सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को ट्रेनिंग दी जाएगी। योजना के अनुसार हर साल करीब 3.3 लाख आंखों की सर्जरी की जा सकेगी। वहीं 1,000 हेल्थ प्रोफेशनल्स को ट्रेनिंग भी मिलेगी। अगर यह मॉडल सफल रहा तो आने वाले वर्षों में इसे देश के दूसरे राज्यों में भी लागू किया जा सकता है।

मंच पर भावुक दिखे गौतम अदाणी

कार्यक्रम के दौरान गौतम अदाणी ने जब बोलना शुरू किया तो उनका संबोधन केवल कारोबारी घोषणा तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने कहा कि किसी इंसान की आंखों की रोशनी लौटाना सिर्फ इलाज नहीं होता, बल्कि उसके जीवन में उम्मीद, आत्मविश्वास और सम्मान वापस लौटाना होता है। उन्होंने कहा कि “सेवा ही साधना है” उनके लिए कोई नारा नहीं, बल्कि जीवन का मूलमंत्र है। उन्होंने बिहार को देश को नई चेतना देने वाली धरती बताया और कहा कि मस्तीचक से शुरू हो रही यह पहल सेवा, संस्कार और समर्पण की भावना से प्रेरित है। उनके संबोधन के दौरान मौजूद लोगों ने कई बार तालियां बजाकर स्वागत किया। गांव के लोगों के बीच भी इस परियोजना को लेकर खास उत्साह दिखाई दिया।

अखंड ज्योति आई हॉस्पिटल की कहानी भी प्रेरणा

आज जिस अखंड ज्योति आई हॉस्पिटल का नाम देशभर में लिया जा रहा है, उसकी शुरुआत बहुत छोटे स्तर से हुई थी। साल 2005 में बिहार के ग्रामीण इलाके में 30 बेड वाले अस्पताल के रूप में इसकी नींव रखी गई थी। उस समय उद्देश्य सिर्फ इतना था कि गांव के गरीब लोगों तक आंखों का इलाज पहुंचाया जाए। धीरे-धीरे यह मिशन बढ़ता गया। डॉक्टरों की टीम जुड़ती गई और अस्पताल ने हजारों लोगों की जिंदगी बदलनी शुरू कर दी। आज स्थिति यह है कि यहां अब तक 14 लाख से ज्यादा लोगों की आंखों की रोशनी लौटाई जा चुकी है। लाखों लोगों की जांच हो चुकी है। ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में यह संस्था एक बड़े मॉडल के रूप में उभरी है। अखंड ज्योति आई हॉस्पिटल के सह-संस्थापक और सीईओ मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि यह साझेदारी केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े लोगों तक दृष्टि, सम्मान और अवसर पहुंचाना है।

गांव-गांव पहुंचेगी मोबाइल नेत्र सेवा

कार्यक्रम में 10 एंबुलेंस को भी हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। इन एंबुलेंस का उद्देश्य सिर्फ मरीजों को अस्पताल लाना नहीं है। इनके जरिए गांवों में नेत्र जांच शिविर, प्राथमिक उपचार और रेफरल सेवा भी दी जाएगी। ग्रामीण इलाकों में कई बार लोग बीमारी की गंभीरता समझ ही नहीं पाते। समय पर जांच नहीं हो पाती। ऐसे में मोबाइल हेल्थ सर्विस बड़ी राहत साबित हो सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अगर शुरुआती स्तर पर आंखों की बीमारी पकड़ ली जाए तो बड़ी संख्या में लोगों की दृष्टि बचाई जा सकती है।

पीरपैंती में बनेगा 200 बेड का बड़ा अस्पताल

इस मौके पर भागलपुर जिले के पीरपैंती में 200 बेड वाले अस्पताल की भी घोषणा की गई। यह अस्पताल अखंड ज्योति फाउंडेशन के स्वास्थ्य मिशन को और मजबूत करेगा। पीरपैंती वही इलाका है, जहां अदाणी ग्रुप 2400 मेगावॉट का अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल थर्मल पावर प्लांट स्थापित कर रहा है। इस परियोजना को बिहार में निजी क्षेत्र का सबसे बड़ा निवेश माना जा रहा है। ऐसे में अब स्वास्थ्य, रोजगार और आधारभूत संरचना तीनों क्षेत्रों में यह इलाका तेजी से विकसित होता नजर आ रहा है।

बिहार में लगातार बढ़ रहा अदाणी समूह का निवेश

बिहार में अदाणी समूह का निवेश लगातार बढ़ रहा है। समूह की कुल निवेश प्रतिबद्धता करीब 40 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है। इसमें पीरपैंती का पावर प्लांट, गया और नालंदा में सिटी गैस नेटवर्क, उत्तर बिहार में स्मार्ट मीटर परियोजना और नवादा-मुजफ्फरपुर में सीमेंट यूनिट का विस्तार शामिल है। समूह की कोशिश केवल उद्योग लगाने तक सीमित नहीं दिख रही, बल्कि सामाजिक क्षेत्रों में भी अपनी मौजूदगी मजबूत करने की है।

सेवा और सामाजिक जिम्मेदारी पर जोर

अदाणी फाउंडेशन पिछले कई वर्षों से शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और कौशल विकास से जुड़े कार्यक्रम चला रहा है। महाकुंभ और पुरी जगन्नाथ रथ यात्रा जैसे बड़े धार्मिक आयोजनों में भी समूह ने भोजन और सेवा कार्यों में भागीदारी निभाई थी। बताया गया कि महाकुंभ में करीब 50 लाख श्रद्धालुओं के भोजन की व्यवस्था की गई थी। वहीं पुरी रथ यात्रा में लगभग 40 लाख लोगों तक भोजन पहुंचाया गया। अब बिहार से शुरू हुई यह नई पहल सेवा आधारित सामाजिक मॉडल के रूप में देखी जा रही है।

आंखों की रोशनी से जुड़ी है जिंदगी की दिशा

ग्रामीण भारत में आंखों की बीमारी केवल स्वास्थ्य समस्या नहीं होती। कई बार इससे लोगों की रोजी-रोटी भी प्रभावित हो जाती है। किसान, मजदूर, बुजुर्ग और महिलाएं सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। घर के कमाने वाले सदस्य की नजर कमजोर हो जाए तो पूरा परिवार संकट में आ जाता है। बच्चे पढ़ाई छोड़ देते हैं। बुजुर्ग दूसरों पर निर्भर हो जाते हैं। ऐसे में नेत्र चिकित्सा की यह पहल केवल अस्पताल निर्माण नहीं, बल्कि हजारों परिवारों के भविष्य से जुड़ा प्रयास मानी जा रही है।

इसे भी पढ़ें : ऑफर लेटर से 45 सपनों को उड़ान, अदाणी फाउंडेशन ने बदली तकदीर

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