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Chaibasa : चाईबासा में जब कोल्हान प्रमंडल मुखिया सम्मेलन 2026 शुरू हुआ, तो यह सिर्फ एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं था। यहां उन लोगों की कहानियां थीं, जो रोज अपने गांव की तस्वीर बदलने में लगे हैं। मंच पर जब एक के बाद एक मुखियाओं का नाम पुकारा गया, तो उनके साथ उनके गांव की मेहनत भी सामने आई। किसी ने बच्चों के लिए बेहतर स्कूल माहौल बनाया, तो किसी ने गांव को साफ और हरा भरा रखने की ठानी। यह सम्मान उन छोटे छोटे बदलावों का था, जो धीरे धीरे बड़ी तस्वीर बना रहे हैं।
“हमने सोचा, गांव बदल सकता है”
सम्मेलन में आए कई मुखियाओं की आंखों में संतोष दिख रहा था। एक मुखिया ने बताया कि शुरुआत में लोगों को भरोसा दिलाना मुश्किल था, लेकिन जब गांव के लोग साथ आए, तो काम आसान होता गया। कहीं आंगनबाड़ी को ठीक किया गया, कहीं पेयजल की व्यवस्था सुधारी गई, तो कहीं महिलाओं के समूह बनाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की कोशिश हुई। ये काम बड़े बजट से नहीं, बल्कि मिलकर काम करने की सोच से आगे बढ़े।

जमीनी काम को मिला सम्मान
इस मौके पर मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि गांवों में हो रहा यह बदलाव ही असली विकास है। उन्होंने कहा कि यह सम्मान उन लोगों के लिए है, जो बिना किसी दिखावे के अपने गांव के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जब गांव मजबूत होंगे, तभी राज्य मजबूत होगा। इसलिए पंचायतों को और अधिकार देना जरूरी है।
पेसा नियमावली से गांवों को मिली आवाज
सम्मेलन में पेसा नियमावली को लेकर भी काफी चर्चा हुई। मंत्री ने बताया कि इससे ग्राम सभाओं को कानूनी अधिकार मिले हैं। अब गांव के लोग खुद तय कर सकेंगे कि उनके इलाके में क्या होगा और क्या नहीं। जल, जंगल और जमीन जैसे मुद्दों पर स्थानीय लोगों की राय सबसे अहम होगी। इससे गांव के लोगों में एक नई आत्मविश्वास की भावना पैदा हो रही है।

जब महिलाएं आगे बढ़ती हैं, तो गांव भी आगे बढ़ता है
इस बार की खास बात यह रही कि महिलाओं की भागीदारी पर खास जोर दिया गया। पेसा नियमावली के तहत महिलाओं को ग्राम सभा के सचिव पद पर मौका देने की पहल को लोगों ने सराहा। कई मुखियाओं ने बताया कि जब महिलाओं को जिम्मेदारी दी गई, तो गांव में कई चीजें बेहतर हुईं। बच्चों की पढ़ाई, साफ सफाई और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर ज्यादा ध्यान दिया जाने लगा।
पंचायत अब बदलाव की पहचान बन रही
पहले पंचायत को सिर्फ सरकारी कामकाज का हिस्सा माना जाता था, लेकिन अब यह सोच बदल रही है। अब पंचायत गांव के विकास का केंद्र बन रही है। लोग खुद आगे आकर अपने गांव की जिम्मेदारी ले रहे हैं। इससे न सिर्फ काम तेज हुआ है, बल्कि लोगों का भरोसा भी बढ़ा है।

एक नई शुरुआत की कहानी
चाईबासा का यह सम्मेलन सिर्फ एक दिन का आयोजन नहीं, बल्कि एक सोच का संकेत है। यह बताता है कि अगर गांव के लोग साथ आ जाएं, तो बदलाव संभव है। आज जिन मुखियाओं को सम्मान मिला, वे सिर्फ अपने गांव के नेता नहीं हैं, बल्कि उन उम्मीदों के चेहरे हैं, जो हर गांव में बसती हैं। आने वाले समय में यही छोटे छोटे प्रयास झारखंड के गांवों को नई पहचान देंगे।

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