अपनी मनपसंद भाषा में पढ़ें :
Pakur (Jaydev Kumar) : पाकुड़ के डांगापाड़ा चौक पर यादों का मेला लगा था। हर चेहरे पर सम्मान था, हर आंख में अपने नेता के लिए अपनापन। मौका था झारखंड के कद्दावर नेता, पूर्व मंत्री और झामुमो के संस्थापक सदस्य रहे स्व साइमन मरांडी की पुण्यतिथि का। उनकी प्रतिमा के सामने लोग सिर्फ फूल नहीं चढ़ा रहे थे, बल्कि अपनी यादें और भावनाएं भी साझा कर रहे थे।
प्रतिमा के पास सिमटी यादें, हर कोई हुआ भावुक
सुबह से ही लोग डांगापाड़ा चौक पहुंचने लगे थे। जैसे-जैसे समय बीतता गया, भीड़ बढ़ती गई। किसी के हाथ में माला थी, तो कोई चुपचाप खड़ा होकर प्रतिमा को देख रहा था। ऐसा लग रहा था जैसे हर कोई अपने-अपने तरीके से साइमन मरांडी को याद कर रहा हो। पूर्व विधायक दिनेश मरांडी अपनी पत्नी एंजेलिना टुडू के साथ पहुंचे। उन्होंने जब प्रतिमा पर माल्यार्पण किया, तो माहौल और भावुक हो गया। उनके साथ आए समर्थकों ने भी फूल चढ़ाकर श्रद्धांजलि दी। उस पल वहां मौजूद लोगों की आंखों में एक साथ सम्मान और यादों की झलक साफ दिख रही थी।
“छोटे पद से शुरू हुई थी बड़ी पहचान”
दिनेश मरांडी ने अपने पिता को याद करते हुए कहा कि उनकी राजनीति की शुरुआत बहुत साधारण तरीके से हुई थी। उन्होंने प्रमुख के पद से काम शुरू किया और धीरे-धीरे लोगों के बीच अपनी अलग पहचान बनाई। वे झारखंड मुक्ति मोर्चा के पहले विधायक बने और संथाल परगना में पार्टी को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने बताया कि शिबू सोरेन के साथ मिलकर साइमन मरांडी ने जिस तरह से संगठन को खड़ा किया, वह आज भी लोगों के लिए मिसाल है। उनकी राजनीति में दिखावा नहीं, बल्कि जमीन से जुड़ाव था।
लोगों के नेता, हर दिल के करीब
कार्यक्रम में मौजूद कई बुजुर्ग और स्थानीय लोग उन्हें याद करते हुए कह रहे थे कि साइमन मरांडी सिर्फ नेता नहीं थे, बल्कि अपने थे। किसी की समस्या हो, कोई जरूरत हो, वे हमेशा आगे रहते थे। यही वजह है कि आज भी उनका नाम लेते ही लोगों के चेहरे पर सम्मान दिखता है। उनके समर्थकों का कहना था कि चाहे वे सांसद रहे हों या विधायक, उन्होंने कभी लोगों से दूरी नहीं बनाई। हर तबके के लोगों के लिए काम किया और समाज के आखिरी व्यक्ति तक मदद पहुंचाने की कोशिश की।
इसे भी पढ़ें : 2029 तक तपोवन मंदिर का दिखेगा भव्य रूप, सीएम हेमंत ने दिया भरोसा



