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News Samvad : देश की सबसे बड़ी घरेलू एयरलाइन के लिए हालात पिछले चार दिनों में अचानक बिगड़ गए। इंडिगो की ऑन-टाइम परफॉर्मेंस (OTP), जो इस एयरलाइन की सबसे बड़ी पहचान मानी जाती है, लगातार गिरते हुए 4 दिसंबर को मात्र 8.5% पर पहुंच गई। इससे बड़ी संख्या में उड़ानें देरी से चलीं या रद्द हुईं, और देशभर के यात्रियों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी।
इंडिगो का बेड़ा और पैमाना कितना बड़ा है?
इंडिगो भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन है। इसके पास 434 विमान, रोजाना 2,200 से अधिक उड़ानें, और सालाना 12 करोड़ से ज्यादा यात्री हैं। इतना बड़ा नेटवर्क होने की वजह से किसी भी परिचालन गड़बड़ी का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है।
संकट की जड़—नए FDTL नियम और क्रू की कमी
DGCA द्वारा लागू किए गए नए फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) नियम इस संकट के केंद्र में हैं। रात 12 से सुबह 6 बजे के बीच क्रू की ‘नाइट लैंडिंग’ सीमा 6 से घटाकर 2 कर दी गई है। इससे इंडिगो को अचानक अधिक पायलटों और केबिन क्रू की जरूरत पड़ने लगी। पायलट संगठनों ने इसे “कुप्रबंधन” और “भर्ती फ्रीज” का परिणाम बताया है।
डीजीसीए का हस्तक्षेप और इंडिगो की अपील
विमानन सेक्टर में हड़कंप मचने के बाद DGCA ने साप्ताहिक विश्राम से जुड़े सख्त नियम वापस ले लिए। इंडिगो ने भी रात की उड़ानों के नियमों से फरवरी 2026 तक राहत मांगी है। कंपनी ने यात्रियों से माफी मांगते हुए कहा कि 10–15 दिसंबर तक हालात सामान्य हो जाएंगे।
यात्रियों के लिए सतर्कता जरूरी
हालांकि स्थिति धीरे-धीरे सुधर रही है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि सिस्टम को पूरी तरह पटरी पर लौटने में समय लगेगा। यात्रियों को सलाह है कि एयरपोर्ट जाने से पहले अपनी फ्लाइट स्टेटस जरूर जांच लें।
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