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Home » ‘वीरों की विरासत, स्वाभिमान का प्रतीक…’ आदिवासी प्रतिनिधियों से क्या बोल गये सीएम हेमंत… जानें
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‘वीरों की विरासत, स्वाभिमान का प्रतीक…’ आदिवासी प्रतिनिधियों से क्या बोल गये सीएम हेमंत… जानें

December 5, 2025No Comments3 Mins Read
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सीएम
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Ranchi : सीएम हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड की धरती हमेशा से वीरता, स्वाभिमान और संघर्ष की प्रतीक रही है। धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा से लेकर दिशोम गुरु शिबू सोरेन जैसे अनेक वीर‑वीरांगनाओं के त्याग और संघर्ष ने आदिवासी अस्मिता को नई दिशा दी है। आदिवासी समाज ने मानव सभ्यता के निर्माण एवं संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और आज भी इस समाज में एकता व जागरूकता की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक महसूस की जा रही है। मौका था देश भर से आये आदिवासी प्रतिनिधियों से मुलाकात का। यह मुलाकात रांची के कांके रोड स्थित मुख्यमंत्री आवासीय परिसर में हुई। मौके पर सीएम हेमंत ने आये हुए तमाम प्रतिनिधियों का तहे दिल से स्वागत किया। प्रतिनिधियों ने एकजुट होकर अपने हक-अधिकारों के लिए संघर्ष करने और सशक्त होकर आगे बढ़ने का आह्वान किया। आदिवासी प्रतिनिधियों ने हेमंत सोरेन से आग्रह किया कि देशभर में चल रहे आदिवासी संघर्षों को वे नेतृत्व प्रदान करें।

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संस्कृति, शिक्षा और पर्यावरण के संतुलन के लिए सरकार की मजबूत पहल

सीएम हेमंत सोरेन ने कहा कि राज्य सरकार आदिवासी समाज की संस्कृति, पहचान और अधिकारों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह समर्पित है। उन्होंने बताया कि सामाजिक, बौद्धिक और शैक्षणिक स्तर पर समुदाय को आगे बढ़ाने की दिशा में लगातार काम हो रहा है। झारखंड देश का पहला राज्य बन गया है जहां आदिवासी छात्र सरकारी खर्च पर विदेश में उच्च शिक्षा हासिल कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि समाज में नई उम्मीद जगी है और इसे और मजबूत बनाने के लिए सबको मिलकर आगे बढ़ना होगा। सरकार हर कदम पर समर्थन देने के लिए तैयार है।

पर्यावरण संरक्षण आदिवासी समाज की परंपरा का हिस्सा

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि आदिवासी समाज प्रकृति को मानने वाला समाज है और पर्यावरण संरक्षण उसकी परंपरा का हिस्सा है। हमारे पूर्वजों ने धरती और मिट्टी की रक्षा के लिए लंबी लड़ाई लड़ी है। आज आधुनिक विकास के कारण बाढ़, सुखाड़ और भूस्खलन जैसी आपदाएं बढ़ रही हैं, इसलिए प्रकृति के साथ संतुलन बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।

एकजुट होकर ही होगा समाज का पूरा सशक्तीकरण

उन्होंने कहा कि आज पूरे देश में आदिवासी समुदाय को सामाजिक और आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की जरूरत है। इसके लिए एकजुटता और आत्मनिर्भरता जरूरी है। विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधियों ने सरकार के प्रयासों की सराहना की और सहयोग का भरोसा दिया।

अधिकारों और अस्तित्व की रक्षा के लिए व्यापक प्रयासों का संकेत

मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधियों की मेहनत की तारीफ करते हुए कहा कि समाज के अस्तित्व और अधिकारों को सुरक्षित रखने के लिए आने वाले समय में वे स्वयं भी राष्ट्रीय स्तर पर जनसंपर्क अभियान में सक्रिय रहेंगे। उन्होंने कहा कि हमारी समस्याएं केवल आवाज न रहें, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में जगह पाएं। हमें यह साबित करना होगा कि हम बिखरे हुए लोग नहीं, बल्कि एक मजबूत समुदाय हैं जिसे भविष्य में अपनी जगह तय करनी है।

कार्यक्रम में गुजरात, महाराष्ट्र, असम, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा और मणिपुर सहित कई राज्यों से आए प्रतिनिधियों ने झारखंड सरकार की पहलों की सराहना की। उन्होंने कहा कि राज्य की पहल ने पूरे देश में आदिवासी समाज में नई ऊर्जा भरी है। इस अवसर पर सभी ने दिशोम गुरु शिबू सोरेन के संघर्ष और योगदान को याद करते हुए श्रद्धांजलि दी।

ये रहे मौजूद

इस अवसर पर मंत्री दीपक बिरुआ, मंत्री चमरा लिंडा, विधायक कल्पना सोरेन एवं अशोक चौधरी समेत सैकड़ो की संख्या में देश के विभिन्न राज्यों से आए आदिवासी प्रतिनिधि मौजूद रहे।

इसे भी पढ़ें : झारखंड विस शीतकालीन सत्र : दिवंगत हस्तियों की श्रद्धांजलि के बाद सदन स्थगित

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