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Giridih : “सुदिव्य सोनू जी का जाना केवल एक मंत्री या सहयोगी का खोना नहीं है, यह सीधे तौर पर मेरी अपनी व्यक्तिगत क्षति है। हमारा रिश्ता सिर्फ राजनीतिक मंचों तक सीमित नहीं था, हम बचपन से साथ थे।” गिरिडीह के हरसिंहरायडीह में जब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की जुबान से ये शब्द निकले, तो वहां मौजूद हर शख्स का गला भर आया। एक सूबे का मुखिया जब अपने सारे प्रोटोकॉल किनारे रखकर अपने पुराने साथी के घर पहुंचा, तो सत्ता का रौब पीछे छूट गया और सामने सिर्फ एक बेबस दोस्त का छलकता हुआ दर्द था।

‘हर उलझन का मुस्कुराकर हल निकालते थे सोनू’
हेमंत सोरेन ने अपने बचपन के साथी को याद करते हुए कहा कि सोनू जी के भीतर गजब का धीरज था। सामाजिक जीवन की कोई उलझी हुई गुत्थी हो या कोई मुश्किल राजनीतिक फैसला, वे हर मसले की तह तक जाते थे, सबकी बात इत्मीनान से सुनते थे और फिर सहज भाव से उसका सही समाधान निकाल लेते थे। मुख्यमंत्री ने भारी मन से कहा कि उनका इस तरह अचानक और असमय चले जाना अविश्वसनीय लगता है। दिमाग जानता है कि वे नहीं रहे, लेकिन दिल अब भी इस सच को मानने को तैयार नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य ने एक ऊर्जावान युवा नेतृत्व खो दिया है, जिसकी भरपाई कभी मुमकिन नहीं होगी।

दोपहर दो बजे जब रुंध गया सबका गला
घड़ी में दोपहर के ठीक दो बजे थे, जब मुख्यमंत्री अपनी पत्नी सह गांडेय विधायक कल्पना मुर्मू सोरेन के साथ हरसिंहरायडीह पहुंचे। जिस चबूतरे पर सुदिव्य कुमार की पार्थिव देह रखी थी, वहां कदम रखते ही हेमंत सोरेन की आंखें डबडबा गईं। उन्होंने कांपते हाथों से पुष्प चक्र अर्पित किया और कुछ पल खामोश खड़े होकर अपने दोस्त के चेहरे को देखते रहे। पास खड़ीं कल्पना सोरेन भी अपनी सिसकियां नहीं रोक सकीं। उन्होंने पार्थिव शरीर पर फूल चढ़ाए और सीधे बिलखती महिलाओं के बीच पहुंच गईं। उन्होंने रोती हुई परिजनों को अपनी बांहों में समेटकर ढांढस बंधाया, उस वक्त दोनों की आंखें लगातार बह रही थीं।

‘सरकार और संगठन आपके पीछे चट्टान की तरह खड़ा है’
शोक संतप्त परिजनों का हाथ थामकर मुख्यमंत्री काफी देर तक वहीं जमीन पर बैठे रहे। उन्होंने परिवार को भरोसा दिलाया कि इस अंधेरे दौर में वे अकेले नहीं हैं। सरकार और पूरा संगठन सोनू जी के परिवार के पीछे हर कदम पर एक मजबूत चट्टान की तरह खड़ा रहेगा। बाहर खड़े आम ग्रामीणों और समर्थकों की आंखों में भी वही खालीपन था। हर कोई अपने ‘सोनू भैया’ के सहज अंदाज, उनकी सादगी और जनता के बीच घुले-मिले रहने की आदतों को याद कर रहा था। मुख्यमंत्री ने हाथ जोड़कर ईश्वर से प्रार्थना की कि दिवंगत आत्मा को शांति मिले और परिवार को इस पहाड़ जैसे दुख को सहने की ताकत हासिल हो।
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