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Ranchi : शहर सो रहा था। गलियों में सन्नाटा पसरा था। लेकिन मधुकम रूगड़ीगड़ा की एक गली में उस रात कुछ और ही चल रहा था। बाहर से देखने पर एक आम सा घर, भीतर चल रहा था नशे का गंदा धंधा। वही धंधा, जिसने न जाने कितने घर उजाड़े होंगे, कितनी जिंदगियों को अंधेरे में धकेला होगा। एक जनवरी की रात करीब 10:46 बजे रांची पुलिस कप्तान राकेश रंजन को इंफॉर्मेशन मिली। इंफॉर्मेशन साधारण नहीं थी, बल्कि उस दर्दनाक सच्चाई की ओर इशारा कर रही थी, जिसे अक्सर समाज अनदेखा कर देता है… नशे की काली कमाई।
जब पुलिस पहुंची, तो भागने लगे लोग
सूचना मिलते ही पुलिस हरकत में आई। सिटी एसपी पारस राणा के नेतृत्व में नशे के जानी दुश्मन माने जाने वाले पुलिस अधिकारी कोतवाली DSP प्रकाश सोय को आगे का टास्क सौंपा गया। DSP प्रकाश सोय जानते थे कि अगर इस वक्त कार्रवाई नहीं हुई, तो न जाने कितने युवाओं की जिंदगी इस जहर की भेंट चढ़ जाएगी। उन्होंने समय नहीं गंवाया। बिना देर किए टीम बनायी गयी। डीएसपी ने हर जवान को उसकी जिम्मेदारी सौंपी और खुद पूरे ऑपरेशन की कमान संभाली। रात के करीब 10:46 बजे पुलिस की गाड़ियां चुपचाप मधुकम रूगड़ीगड़ा की गलियों में दाखिल हुईं। उस घर को घेर लिया गया। जैसे ही पुलिस ने दबिश दी, घर के भीतर मौजूद लोग घबरा गए। कुछ ने भागने की कोशिश की, लेकिन DSP प्रकाश सोय की रणनीति काम आ चुकी थी। चारों ओर से घेराबंदी कर दो लोगों को मौके पर ही दबोच लिया गया। गिरफ्तार लड़कों की पहचान नुतून लिण्डा उर्फ मिथुन और अमन जायसवाल के रूप में हुई। उनके चेहरों पर डर साफ दिख रहा था।
घर के भीतर गांजा, पलंग के भीतर मिला कैश
पकड़े गये लड़कों से DSP प्रकाश सोय ने अपने स्टाइल से पूछताछ शुरू की तो दोनों तोते की तरह राज उगलने लगे। घर के अंदर से पुलिस ने गांजा बरामद किया। करीब एक किलो से ज्यादा गांजा घर के भीतर से मिला। डीएसपी का माथा ठनका। उनके जहन ख्याल आया कि हो न हो गांजा बेचने के बाद जो माल इन्होंने कमाया है, वह इसी घर में कहीं छुपा रखा होगा। फिर अचानक उन्होंने घर में रखे पलंग का पल्ला खोला। अंदर जो दिखा, वह देख हर कोई चौंक गया। पलंग के अंदर नोट छ्पाकर रखे गये थे। पुलिस ने सभी पैसों को जब्त कर लिया। कुल 2 लाख 71 हजार रुपये बरादम किये गये। पलंग के नीचे छिपाकर रखे गये कैश ने पूरे धंधे की पोल खोल दी। यह पैसा किसी मेहनत की कमाई नहीं, बल्कि नशे से जुड़े कारोबार की गंदी कमाई थी। पूछताछ में दोनों लड़के कोई वैध दस्तावेज नहीं दिखा सके। धीरे-धीरे परतें खुलती गईं और सामने आया कि इस धंधे का असली संचालक कोई और था।

एक फरार नाम, जो चला रहा था पूरा नेटवर्क
पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ कि इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड नन्हकु लिण्डा है, जो बाहर से गांजा मंगवाकर इन युवकों के जरिए पुड़िया बनवाकर बेचता था। पुलिस के पहुंचते ही वह मौके से फरार हो गया। उसकी तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है।
अपराध का पुराना इतिहास
जांच में यह भी सामने आया कि पकड़े गए आरोपी पहले भी आपराधिक मामलों में शामिल रहे हैं। नशे की लत और आसान पैसे की चाह ने उन्हें बार-बार अपराध की राह पर धकेला। डीएसपी ने साफ और सख्त लहजे में कहा है कि नशे के गंदे धंधे से जुड़े किसी भी शख्स को बख्शा नहीं जाएगा। चाहे वह कितना ही रसूखदार क्यों न हो।
सराहनीय रही इनकी भूमिका
नशे के इन दोनों धंधेबाजों को दबोचने में कोतवाली डीएसपी प्रकाश सोय के अलावा सुखदेवनगर थानेदार सुनिल कुमार कुशवाहा, एसआई सहावीर उरांव, बंजरग टोप्पो, बबलू बेसरा, मीनकेतन कुमार, प्रदीप सवैया, सिपाही मुन्ना लाल गुप्ता, प्रदीप कुमार गुप्ता और महिला सिपाही कुमारी प्रज्ञा की भूमिका सराहनीय रही।
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