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Hazaribagh : आज के डिजिटल दौर में अकेलापन, जिज्ञासा और आसान रास्ते की तलाश कई लोगों को ऑनलाइन दुनिया की ओर खींच लेती है। इसी कमजोरी को साइबर अपराधियों ने हथियार बना लिया। हजारीबाग में पकड़े गए इस गिरोह ने फर्जी वेबसाइट बनाकर खुद को एस्कॉर्ट सर्विस प्रदाता बताया। आकर्षक तस्वीरें, मीठी बातें और आसान रजिस्ट्रेशन के झांसे में आकर लोग फंसते चले गए। शुरुआत में सब सामान्य लगता था, लेकिन कुछ ही देर में बातों का रुख बदल जाता था। वीडियो कॉल के दौरान रिकॉर्डिंग की जाती और फिर वही वीडियो डर का हथियार बन जाती। कई पीड़ितों ने डर के कारण चुप्पी साध ली, तो कई ने ब्लैकमेलिंग के चलते बार-बार पैसे भेजे।
एक शिकायत ने खोली पूरी परत
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब प्रतिबिंब एप पर एक शिकायत दर्ज की गई। शिकायत में बताया गया कि एस्कॉर्ट सर्विस के नाम पर लगातार पैसों की मांग की जा रही है। पुलिस ने तकनीकी जांच शुरू की और मोबाइल लोकेशन ट्रेस करते हुए विष्णुगढ़ थाना क्षेत्र तक पहुंची। रात के अंधेरे में जब पुलिस ने इंटर कॉलेज के पास एक कार को रोका, तो किसी को अंदाजा नहीं था कि यही कार एक बड़े साइबर गिरोह की कड़ी साबित होगी। कार में बैठे छह युवक अलग-अलग मोबाइल फोन चला रहे थे। पूछताछ के बाद पूरी सच्चाई सामने आ गई।
तकनीक का गलत इस्तेमाल
पुलिस ने आरोपियों के पास से 12 मोबाइल फोन, 23 सिम कार्ड, 10 डेबिट कार्ड और कई डिजिटल सबूत बरामद किए। जांच में सामने आया कि एक ही व्यक्ति कई फर्जी नामों से लोगों से बात करता था। सिम कार्ड और अकाउंट बार-बार बदले जाते थे ताकि पहचान छुपी रहे।
इंसानी पहलू जो झकझोर देता है
इस मामले में सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि कई पीड़ित मानसिक रूप से टूट चुके थे। डर, शर्म और समाज के भय ने उन्हें चुप रहने पर मजबूर कर दिया। कुछ मामलों में तो पीड़ितों ने अपने परिवार तक को कुछ नहीं बताया। पुलिस का कहना है कि ऐसे अपराध सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि मानसिक और सामाजिक नुकसान भी पहुंचाते हैं।
पुलिस की अपील
हजारीबाग पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि वे ऑनलाइन किसी भी तरह के लालच में न आएं। अनजान वेबसाइट, कॉल या मैसेज से दूरी बनाए रखें। अगर कोई व्यक्ति ब्लैकमेल करता है तो डरने की बजाय तुरंत पुलिस से संपर्क करें।
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