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Home » नक्सलवाद की रीढ़ तोड़ने में झारखंड जगुआर का रोल अहम : डीजीपी
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नक्सलवाद की रीढ़ तोड़ने में झारखंड जगुआर का रोल अहम : डीजीपी

February 19, 2026No Comments4 Mins Read
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डीजीपी
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अपनी मनपसंद भाषा में पढ़ें :

Ranchi : झारखंड को नक्सलियों से मुक्त करने की लड़ाई में झारखंड जगुआर की भूमिका को लेकर स्थापना दिवस समारोह में बड़ा संदेश दिया गया। कार्यक्रम में मौजूद डीजीपी तदाशा मिश्र ने साफ कहा कि राज्य को नक्सलवाद की रीढ़ तोड़ने में झारखंड जगुआर का योगदान निर्णायक रहा है। डीजीपी ने मौके पर झारखंड जगुआर परिसर में 9 बेड के अस्पताल और अन्य निर्माण कार्यों की घोषणा भी की, ताकि जवानों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।

2008 में हुआ गठन, अब नतीजे सामने

आईजी अनूप बिरथरे ने बताया कि वर्ष 2008 में झारखंड जगुआर का गठन लेफ्ट विंग एक्सट्रीमिज्म से लड़ने के लिए एक एंटी-नक्सल फोर्स के रूप में किया गया था। तब हालात चुनौतीपूर्ण थे, लेकिन आज तस्वीर काफी बदल चुकी है। उन्होंने कहा कि गठन से लेकर अब तक बल ने अपने कर्तव्य को पूरी निष्ठा से निभाया है और राज्य में वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ मजबूती से मोर्चा संभाला है।

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24 शहीदों को नमन

कार्यक्रम में सबसे पहले उन 24 वीर शहीद अधिकारियों और जवानों को श्रद्धांजलि दी गई, जिन्होंने नक्सलियों के खिलाफ लड़ते हुए अपनी जान की कुर्बानी दी। आईजी ने कहा कि इन शहीदों के बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। उनके परिवारों को भी नमन किया गया।

अब तक की बड़ी कार्रवाई

झारखंड जगुआर के अब तक के ऑपरेशन का आंकड़ा खुद उसकी ताकत दिखाता है :

  • 114 मुठभेड़ों में 50 से अधिक उग्रवादी ढेर
  • 300 से ज्यादा उग्रवादियों की गिरफ्तारी
  • 4500 से अधिक पुलिस हथियार बरामद
  • 3000 से ज्यादा आईईडी रिकवर
  • वर्ष 2025 में 7 उग्रवादी मार गिराए
  • संयुक्त अभियानों में सैकड़ों आईईडी बरामद

इन आंकड़ों से साफ है कि बल लगातार जमीनी स्तर पर सक्रिय रहा है।

अब सिर्फ चार जिले प्रभावित : आईजी बिरथरे

आईजी बिरथरे ने बताया कि आज झारखंड ऐसे मुकाम पर है जहां नक्सल प्रभाव लगभग खत्म होने की स्थिति में है। फिलहाल सिर्फ चार जिले प्रभावित हैं और उनमें भी मुख्य रूप से पश्चिमी सिंहभूम को माओवादी गतिविधियों का केंद्र माना जाता है। सारंडा के घने जंगलों में अभी 17 टीमें तैनात हैं, जो दुर्गम हालात में ऑपरेशन चला रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि आखिरी चरण की लड़ाई चल रही है।

ट्रेनिंग में भी नंबर वन

झारखंड जगुआर को सिर्फ ऑपरेशन के लिए ही नहीं, बल्कि ट्रेनिंग के क्षेत्र में भी पहचान मिली है। गृह मंत्रालय ने इसे पूरे देश में सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षण संस्थान के रूप में पुरस्कृत किया है। यह उपलब्धि दिखाती है कि बल केवल मैदान में ही नहीं, बल्कि तैयारी के स्तर पर भी मजबूत है।

वीरता और सेवा के लिए कई सम्मान

गठन से लेकर अब तक झारखंड जगुआर के कई अधिकारियों और जवानों को अलग-अलग स्तर पर सम्मान मिला है। इनमें शामिल हैं:

  • राष्ट्रपति द्वारा 3 विशिष्ट सेवा पुलिस पदक
  • 68 सराहनीय सेवा पुलिस पदक
  • 17 पुलिस मेडल फॉर गैलंट्री
  • 53 उत्कृष्ट प्रशिक्षण पदक
  • 76 वीरता पदक (मुख्यमंत्री द्वारा)
  • 78 झारखंड पुलिस पदक (सराहनीय सेवा के लिए)

इन सम्मानों से बल की कार्यशैली और समर्पण साफ झलकता है।

सिर्फ ऑपरेशन ही नहीं, VIP सुरक्षा भी जिम्मेदारी

झारखंड जगुआर सिर्फ नक्सल विरोधी अभियान तक सीमित नहीं है। वीआईपी मूवमेंट, एयरपोर्ट सुरक्षा और बम निरोधक दस्ते (BDS) की जिम्मेदारी भी यही संभालता है। देवघर और जमशेदपुर एयरपोर्ट की सुरक्षा में इसकी बीडीएस टीम की सराहना राष्ट्रीय स्तर पर भी हुई है। एनएसजी जैसी एजेंसियों ने भी इसकी कार्रवाई की तारीफ की है।

विकसित हो रहा है आधुनिक कैंपस

पिछले 15 वर्षों में राज्य सरकार और पुलिस मुख्यालय के सहयोग से झारखंड जगुआर का कैंपस आधुनिक सुविधाओं से लैस हुआ है।

  • सोलर प्लांट आधारित व्यवस्था
  • स्वच्छ पेयजल
  • बेहतर आवास और शौचालय
  • हर साल हजारों पौधारोपण

आज यह कैंपस एक विकसित और व्यवस्थित परिसर के रूप में सामने है।

“अंतिम चरण की लड़ाई”

अधिकारियों का कहना है कि राज्य में नक्सल समस्या अब अंतिम चरण में है। कठिन भौगोलिक हालात के बावजूद जवान लगातार डटे हुए हैं। स्थापना दिवस का कार्यक्रम सिर्फ उत्सव नहीं था, बल्कि यह एक भरोसा भी था कि झारखंड को पूरी तरह नक्सल मुक्त बनाने का लक्ष्य अब दूर नहीं है।

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